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अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार के 142 उम्मीदवारों में 24 भारतीय बच्चे शामिल !

यह पुरस्कार हर साल किसी एक बच्चे को मिलता है, जिनके द्वारा बच्चों के अधिकारों का प्रसार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है।

उम्मीदवारों की सूची 42 विभिन्न देशों को मिलाकर तैयार की गयी है। (Unsplash)

प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार 2020 के लिए भारत से 24 बच्चे नामांकित किए गए हैं। ये उन 42 विभिन्न देशों के 142 उम्मीदवारों में से हैं, जिन्हें इस पुरस्कार के लिए योग्य माना गया है। यह पुरस्कार हर साल किसी एक बच्चे को मिलता है, जिनके द्वारा बच्चों के अधिकारों का प्रसार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है और जो कमजोर वर्ग से आने वाले बच्चों की स्थिति में बेहतर सुधार लाने की दिशा में प्रयासरत रहते हैं। पिछले साल यह पुरस्कार स्वीडन से ग्रेटा थुनबर्ग और कैमरून से डिविना मलौम को दिया गया था।

बाल अधिकार संगठन ‘सेव द चिल्ड्रन इन इंडिया’ से जुड़ी पांच लड़कियां उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें से एक हैं पूनम, जो नासिक की रहने वाली हैं, उन्हें किशोरावस्था, युवावस्था, मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन से संबंधित मुद्दों और वॉश के लिए मुखर रहने के लिए नामांकित किया है, जिनमें पानी, साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़े अभ्यास शामिल हैं।


15 साल की नजरीन मुंबई के गोवांडी से ताल्लुक रखती हैं। उन्हें यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार (एसआरएचआर) की दिशा में उनके कार्यों के लिए नामांकन मिला है। उन्होंने पिछले छह सालों में कुपोषण, स्वच्छता और एसआरएचआर पर 100 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए हैं। वह अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की भी काउंसलिंग करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में अस्पताल में उनका पंजीकरण हो।

यह भी पढ़ें – ‘स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया’

महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए अपनी प्रचेष्ठा के चलते राजस्थान के ओसियां में स्थित गांव आशापुरा में रहने वालीं जशोदा (15) को भी नामित किया गया है। राजस्थान के टोंक के दारदा तुर्क गांव की वसुंधरा को बाल विवाह को खत्म करने, लड़कियों के बीच यौन व प्रजनन स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के लिए जागरूकता फैलाने के उनके काम के लिए नामांकित किया गया है।

अब बारी आती है बिहार के नौशीन की, जो जिन्होंने बाल विवाह और समाज में महिलाओं के लिए प्रचलित अन्य रूढ़ियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। 15 साल की नौशीन समाज में महिलाओं व लड़कियों को ऐसी ही कुरीतियों के बीच में से होकर गुजरते देखा है। वह जीवन कौशल सत्र आयोजित करती हैं और अपने गांव की अन्य किशोरियों को लैंगिक भावना पर आधारित सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। (आईएएनएस)

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यूपी में आज होने वाली थी यूपी टीईटी की परीक्षा। (Wikimedia Commons)

उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(Yogi Adityanath) ने रविवार को घोषणा की कि यूपी टीईटी-2021(UP TET-2021) पेपर-लीक में शामिल लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट(Gangster Act) और एनएसए लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने देवरिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, जो लोग इस अपराध में शामिल हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। उनकी संपत्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू करने के साथ ही जब्त कर लिया जाएगा।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को खराब करने वाले सभी लोगों को चेतावनी का एक नोट भेजते हुए, उन्होंने कहा, यदि कोई युवाओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश कर रहा है, तो उसे परिणामों के बारे में पता होना चाहिए। चाहे वह नौकरी हो या कोई परीक्षा। अत्यधिक पारदर्शिता बनाए रखी जानी चाहिए।

आदित्यनाथ ने यह भी आश्वासन दिया कि एक महीने के भीतर परीक्षा फिर से पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। किसी भी परीक्षार्थी से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और सरकार यूपीएसआरटीसी की बसों के माध्यम से उनके मुक्त आवागमन की व्यवस्था करेगी।

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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस तीन दशक से सत्ता से बाहर है। (Wikimedia Commons)

उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में कांग्रेस(Congress) को अरसा हो गया है सत्ता में आए हुए। लगभग 3 दशक हो गए हैं और अब तक कांग्रेस सत्ता से बाहर है। इसके कई कारण है पर सबसे बड़ा कारण है राज्य में कांग्रेस का गठबंधनों पर निर्भर रहना।

कांग्रेस का गठबंधन(Alliance) का खेल साल 1989 ने शुरू हुआ जब राज्य में वो महज़ 94 सीटें जीत पाई और उसने तुरंत मुलायम सिंह यादव(Mulayam Singh Yadav) के नेतृत्व वाली जनता दल सरकार को समर्थन दे दिया था।

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मोहम्मद खालिद (IANS)

मिलिए झारखंड(Jharkhand) के हजारीबाग निवासी मृतकों के अज्ञात मित्र मोहम्मद खालिद(Mohammad Khalid) से। करीब 20 साल पहले उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई, जब उन्होंने सड़क किनारे एक मृत महिला को देखा। लोग गुजरते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

हजारीबाग में पैथोलॉजी सेंटर चलाने वाले खालिद लाश को क्षत-विक्षत देखकर बेचैन हो गए। उन्होंने एक गाड़ी का प्रबंधन किया, एक कफन खरीदा, मृत शरीर को उठाया और एक श्मशान में ले गए, बिल्कुल अकेले, और उसे एक सम्मानजनक अंतिम संस्कार(Last Rites) दिया। इस घटना ने उन्हें लावारिस शवों का एक अच्छा सामरी बना दिया, और तब से उन्होंने लावारिस शवों को निपटाने के लिए इसे अपने जीवन का एक मिशन बना लिया है।

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