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दुनिया

यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में देश के 6 स्थानों का चयन: केंद्रीय मंत्री पटेल

यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल करने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संस्था, एएसआई ने नौ स्थलों के नाम का प्रस्ताव दिया था|

यूनेस्को द्वारा 6 स्थलों को सूची में शामिल किया गया| (Wikimedia Commons)

यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल करने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संस्था, एएसआई ने नौ स्थलों के नाम का प्रस्ताव दिया था, जिनमें से देश (India) के छह स्थलों को संभावित सूची में शामिल कर लिया गया है। जिस पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlada Singh Patel) ने खुशी जाहिर की है। इस सूची में महाराष्ट्र की मराठा सैन्य वास्तुकला, वाराणसी का गंगाघाट रिवरफ्रंट, हायर बेंकल, मेगालिथिक साइट, मध्यप्रदेश के दो स्थल जिनमें नर्मदा घाटी स्थित भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शामिल हैं। वहीं कांचीपुरम के मंदिरों को इस साल संभावित सूची में शामिल किया गया है।

यूनेस्को द्वारा 6 स्थलों को सूची में शामिल करने की खुशी में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने ट्वीट कर जानकारी साझा की। जिसमें उन्होंने लिखा कि, “यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में जिन 6 स्थानों का चयन हुआ। उसमें मध्यप्रदेश से भेड़ाघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी शामिल हैं।”


उन्होंने आगे कहा कि, “संस्कृति मंत्रालय के संगठन एएसआई ने 9 नामांकन भेजे थे, जिसमें से 6 को चयनित किया है। इसके लिए बहुत सारी बधाई देता हूं।”

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दरअसल एएसआई ने यूनेस्को वल्र्ड हैरिटेज में नौ स्थलों का नामांकन के लिए भेजा था। जिनमें मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी के भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट, मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, अरुणाचल प्रदेश की टेल वाइल्डलाइफ सेंचुरी, वाराणसी का प्रतिष्ठित रिवरफ्रंट और जियोग्राफी ऑफ कोंकण शामिल हैं।

इनके अलावा तमिलनाडु स्थित कांचीपुरम के मंदिर, कर्नाटक का बेंकल महापाषाण स्थल, जम्मू की मुबारक मंडी, महाराष्ट्र में मराठा सैन्य वास्तुकला नामांकन (Architectural Enrollment) के लिए भेजे गए थे। (आईएएनएस-SM)

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यूनेस्को को पूर्व पेंटागन अधिकारी, माइकल रुबिन की फटकार (Wikimedia Commons)

माइकल रुबिन, जो एक पूर्व पेंटागन सलाहकार रह चुके हैं, का मानना हैं कि यूनेस्को को न केवल अफगानिस्तान, बल्कि पाकिस्तान को भी अपने संस्था से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि दोनों ही देश यूनेस्को की सहायता के योग्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि चीन भी इसी काबिल है। तीनों वर्तमान में यूनेस्को के कार्यपालक समिति में हैं, जबकि तीनों इसके बिल्कुल भी योग्य नहीं है। रुबिन, वाशिंगटन एक्जामिनर में लिखते हैं कि, "सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के बजाय, यूनेस्को के भ्रष्टाचार ने इसे विनाश का उत्प्रेरक बना दिया है। अफगानिस्तान में, दुनिया को तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए"।

रुबिन आगे कहते हैं कि किस तरह अफगानिस्तान में तालिबान, अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। वे पाकिस्तानी अधिकारियों के इशारे पर ऐसा करते हैं, जो पश्तून राष्ट्रवाद से डरते हैं और विभिन्न अफगान राजवंशों की विरासत के साथ-साथ इसके इतिहास की गहराई को मिटाना चाहते हैं। अफगानी विरासत को खत्म करके, पाकिस्तान अपनी भविष्य की भूमि हथियाने को सही ठहरा सकता है ।

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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