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थोड़ा हट के

दफ्तर जाए बिना घर से काम करके अधिक खुश हैं 62 प्रतिशत कर्मचारी : सर्वे

कोरोनावायरस महामारी के बीच घर से काम (Work from home ) का चलन बढ़ा है। इस बीच एक नए सर्वे में सामने आया है कि कर्मचारी भी दूरस्थ रूप से (कार्यालय में जाए बिना घर से काम) काम करना पसंद कर रहे हैं।

कोरोनावायरस महामारी के बीच घर से काम (Work from home ) का चलन बढ़ा है। इस बीच एक नए सर्वे में सामने आया है कि कर्मचारी भी दूरस्थ रूप से (कार्यालय में जाए बिना घर से काम) काम करना पसंद कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा है कि वह दूरस्थ रूप से काम करके खुश हैं।

लगभग 56 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे दूरस्थ रूप से और अधिक अच्छे ढंग से काम कर पाते हैं और 61 प्रतिशत ने कहा कि वे दूरस्थ तरीके से काम करते हुए अपनी आठ घंटे की शिफ्ट में अधिक काम कर सकते हैं। लोगमीइन द्वारा संचालित फॉरेस्टर स्टडी में यह दावा किया गया है, जो कि क्लाउड-आधारित सॉल्यूशंस गोटूमीटिंग का एक प्रमुख प्रदाता है।


हालांकि सर्वेक्षण के निर्णयकतार्ओं में से केवल पांच प्रतिशत का मानना है कि दूरस्थ तरीके से काम करने वाले कर्मचारी अधिक प्रोडक्टिव काम करते हैं और 70 प्रतिशत ने कहा कि कार्यालय में कर्मचारी अधिक भरोसेमंद हैं।
 

सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा है कि वह दूरस्थ रूप से काम करके खुश हैं। ( आईएएनएस  ) 

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अध्ययन में पता चला है कि 83 प्रतिशत कर्मचारियों मानते हैं कि यदि उन्हें अधिक लचीले (फ्लेक्सिबल) ढंग से काम करने की अनुमति दी जाती है तो उनकी कंपनी में रहने की अधिक संभावना है।

लगभग 60 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे लचीले ढंग से काम के लिए एक व्यवसाय में कम वेतन स्वीकार करने के लिए भी तैयार हैं।

अध्ययन दो ऑनलाइन सर्वेक्षणों का उपयोग करते हुए आयोजित किया गया है, जिसमें 582 रिमोट वर्क डिसिजन मेकर्स और वैश्विक संगठनों से 427 कर्मचारियों को शामिल किया गया था।
( AK आईएएनएस )

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

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कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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