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इतिहास

8 May 1933: गांधी जी ने अस्पृश्यता के विरूद्ध आवाज उठाई थी।

गांधी जी ने आज ही के दिन यानी 8 मई 1933 को देश के अछूत समुदायों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए 21 दिन का उपवास शुरू किया था।

मोहन दास करमचंद गांधी। जिन्हें पूरा विश्व बापू के नाम से भी जनता है। (Wikimedia Commons)

मोहन दास करमचंद गांधी। जिन्हें पूरा विश्व बापू के नाम से भी जनता है। भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। राजनीतिक और सामाजिक प्रगति के लिए गांधी जी ने कई अहिंसक आंदोलन को शुरू किया था। समाज से जुड़े अहम मुद्दों को उजागर किया था। विश्व पटल पर गांधी जी केवल एक नाम नहीं हैं अपितु शांति और अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं। 

गांधी जी (Gandhi ji) कभी भी सामाजिक भेदभाव सहन नहीं कर सकते थे। भारत के नागरिकों के बीच असमानता एवं उच्च और निम्न की भावना का उन्होंने सदा विरोध किया था और इसी की तरह गांधी जी ने आज ही के दिन यानी 8 मई 1933 को देश के अछूत समुदायों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए 21 दिन का उपवास शुरू किया था। यह अस्पृश्यता के खिलाफ उनकी एक बड़ी लड़ाई थी। गांधी जी ने 1933 में साप्ताहिक हरिजन पत्रिका (Harijan Magazine) की शुरुआत की थी। अछूतों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए गांधी जी द्वारा एक नया अभियान शुरू किया गया था। जिसे उन्होंने हरिजन का नाम दिया था। लेकिन इस लड़ाई में गांधी जी को उनके अपने अनुयायियों से समर्थन हासिल नहीं हो पाया था। 


गांधी जी ने हरिजन सेवक संघ के माध्यम से पूरे भारत का दौरा किया था। (Wikimedia Commons)

उसके बाद दर्शकों तक उनके महान विचारों का अनुसरण करने के लिए गांधी जी ने एक साल बाद यानी 9 मई 1934 को ऐतिहासिक पदयात्रा को आरम्भ किया था। गांधी जी और उनके अनुयायियों ने बालकाटी (Balakati) से सत्यभामापुर (Satyabhamapur) तक यह पदयात्रा निकाली थी। जिसमें हरिजनों को भी आमंत्रित किया गया था और 15 मई 1934 को हरिजनों सहित सभी हिन्दुओं के लिए बलियांटा में कुंज बिहारी मंदिर की स्थापना की गई। उसके बाद 16 मई को कटक नागरिकों की एक विशेष बैठक में गांधी जी ने सभी से अपील की, कि लोगों को जातिगत पूर्वाग्रहों को छोड़ना पड़ेगा और सभी मंदिर, स्कूल और कुओं को हरिजन के लिए भी खोलना होगा। 

यह भी पढ़ें :- ‘चौरी-चौरा की घटना के साल भर पहले गोरखपुर आए थे गांधीजी’

गांधी जी का मानना था कि यह अस्पृश्यता (Untouchability), भेदभाव की भावना समाज में हिंसा और विभाजन की भावना को पैदा करेगा। गांधी जी ने हरिजन सेवक संघ के माध्यम से पूरे भारत का दौरा किया था। गांधी जी ने कहा था की अगर “अस्पृश्यता समाज में कायम रहेगी तो हिन्दू धर्म का विनाश हो जाएगा|” गाँधी जी की इस बात ने सभी को आकर्षित किया और आगे चलकर भारत की आजादी के बाद अस्पृश्यता निवारण का कानून बनाया गया। अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के लिए विशेष आयुक्तों को भी नियुक्त किया गया। 

हालांकि अस्पृश्यता की भावना आज भी हमारे देश में, समाज में पूर्ण रूप से विद्यमान है। लेकिन उस वक्त गांधी जी द्वारा किए गए संघर्ष ने इस भावना को बहुत हद तक खत्म कर दिया था। 

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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