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देश

80 प्रतिशत भारतीय स्वतंत्र तिब्बत का समर्थन करते हैं : सर्वे

आईएएनएस सी वोटर तिब्बत सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत भारतीय स्वतंत्र तिब्बत का समर्थन करते हैं। इस सर्वेक्षण का अच्छा हिस्सा यह है कि अधिकांश भारतीय इस कारण का समर्थन करेंगे, यदि उन्हें पर्याप्त जानकारी दी जाए और वे इसके बारे में सोचना शुरू कर देंगे। इस जानकारी का बुरा हिस्सा यह है कि

आईएएनएस सी वोटर तिब्बत सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत भारतीय स्वतंत्र तिब्बत का समर्थन करते हैं। इस सर्वेक्षण का अच्छा हिस्सा यह है कि अधिकांश भारतीय इस कारण का समर्थन करेंगे, यदि उन्हें पर्याप्त जानकारी दी जाए और वे इसके बारे में सोचना शुरू कर देंगे। इस जानकारी का बुरा हिस्सा यह है कि उन्हें वास्तव में इस बारे में सूचित करने की आवश्यकता है। इस जानकारी का सबसे बुरा हिस्सा यह है कि वस्तुत: कोई भी ऐसा नहीं कर रहा है।

2016 से भारत सरकार द्वारा हाल ही में अपनाई गई नीतियों के कारण निर्वासित तिब्बत सरकार के बारे में लोग कम जानते हैं। इसके लिए अधिक प्रयास की आवश्यकता है। भारत में लोग बेलारूस और कजाकिस्तान में चुनाव और राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हैं, लेकिन वे तिब्बत के नियमित चुनाव के बारे में अस्पष्ट हैं, जिसके तहत तिब्बती अपने निर्वासित सरकार का चुनाव करते हैं।


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सर्वेक्षण के अनुसार, निर्वासित तिब्बती सरकार के बारे में लोगों को पता नहीं है। यह शायद ही आश्चर्य की बात है क्योंकि वे निर्वासित तिब्बती सरकार के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। इस बारे में स्थान और आगे के विवरण स्पष्ट रूप से दायरे से बाहर हैं। सोशल मीडिया में भी, ये मामले हिमाचल प्रदेश के बारे में ब्लॉग पढ़ने के दौरान यात्रा वृतांतों और पर्यटकों के आकर्षण के हिस्से के रूप में सामने आते हैं, बजाय वास्तविक संदर्भों में चर्चा के।

लगभग 3/4 उत्तरदाता भारत और चीन के बीच एक बफर इकाई के रूप में तिब्बत का समर्थन करते हैं। यह भविष्य में तिब्बती लोगों के लिए बड़ा सकारात्मक कदम है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि चीन विरोधी भावनाएं भारत में उच्च स्तर पर चल रही हैं, और तिब्बत के संघर्ष को इस सार्वजनिक धारणा में जोड़ा जा सकता है। लेकिन इसके लिए इस जमीनी स्थिति की स्पष्ट रूप से समझ की जरूरत है। (आईएएनएस)

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भारत का खूबसूरत क्षेत्र कोडाईकनाल।(Unsplash)

भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कोडाईकनाल एक पर्वतीय नगर है। यह समुद्र तल 2133 मी. की ऊंचाई पर पिलानी नामक पहाड़ पे बसा हैं। ये अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से सब को मनमोहित कर देता है । खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य के कारण इसे भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता हैं। यहां पर घूमने का मजा तब बढ़ जाता है, जब मानसून दस्तक देता है, क्योंकि इस समय यहां के झरने वादियां और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां कुरिंजी नामक एक फूल है जो कि 12 वर्षों में खिलता है, जिससे यहां की पहाड़ियों में सुंदरता और निखरती है और इसकी महक मदहोश कर देने वाली होती है। कोडाईकनाल में प्रकृति की सुंदरता अपने तमाम रूपों में नजर आती है। विशाल चट्टान , शांत झील ,फलों के बगीचे और यहां के हरे भरे दृश्य अपनी सुंदरता की कहानियां व्यक्त करते हैं। मानसून में यह जगह जन्नत सी नजर आती है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने , घूमने फिरने , या हनीमून के लिए आते हैं।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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