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थोड़ा हट के

ऐसा विरोध शायद ही पहले कभी देखा हो, कचरे के ढेर पर लगाई गई बार्बेक्यू ग्रिल

लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके के निवासी ने लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) का अनूठे तरीके से विरोध करते हुए बार्बेक्यू ग्रिल के नीचे कोयले की बजाय कूड़े के ढेर का इस्तेमाल किया। 32 साल के आशुतोष सिंह ने अपने घर के बाहर लगे कचरे के ढेर का उपयोग ईंधन के तौर पर करते हुए एक

लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके के निवासी ने लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) का अनूठे तरीके से विरोध करते हुए बार्बेक्यू ग्रिल के नीचे कोयले की बजाय कूड़े के ढेर का इस्तेमाल किया। 32 साल के आशुतोष सिंह ने अपने घर के बाहर लगे कचरे के ढेर का उपयोग ईंधन के तौर पर करते हुए एक पोर्टेबल बारबेक्यू ग्रिल लगाई। इसके जरिए वह कचरे के बढ़ते ढेर के खिलाफ विरोध कर रहे थे, जिसे स्थानीय नगरपालिका के अधिकारियों से कई बार आग्रह करने के बाद भी हटाया नहीं जा रहा था।

कचरे के ढेर पर लगाई गई ग्रिल पर उन्होंने पनीर और सब्जियों को ग्रिल किया, साथ ही अपने दोस्तों को इन्हें चाय के साथ परोसा। उनका यह विरोध प्रदर्शन गुरुवार की दोपहर को 3 घंटे तक चला। रास्ते से गुजर रहे एक व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाया और उसे वायरल कर दिया।


आशुतोष ने बाद में संवाददाताओं से कहा, “यहां लोग खुले में कचरा फेंकते हैं क्योंकि यहां डोर-टू-डोर कचरा लेने की व्यवस्था बहुत खराब है। हम रोजाना सुबह उठकर अपने चारों ओर कचरे के ढेर को देखने और बदबू सहने के लिए मजबूर हैं। हमारी शिकायत पर नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की।”

वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट।

स्थानीय निवासियों ने आशुतोष का उनके विरोध समर्थन किया और कहा कि अगर इलाके को साफ नहीं किया गया तो इस तरह के ‘असामान्य’ विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।

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राज्य की राजधानी में पिछले साल नवंबर में भी इसी तरह का विरोध देखा गया था, जब पूरे दिन सिटी स्टेशन के पास कॉलेज का एक पूरे दिन कचरे के ढेर पर खड़ा रहा था। उसका वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारी हरकत में आ गए थे।

मामले में नगर निगम के एक अधिकारी विद्या सागर यादव ने कहा है, “इलाके में घरों से कचरा इकट्ठा करने की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को दी गई है, हम उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। साथ ही कचरे के ढेर को भी 2 दिनों के भीतर साफ कर दिया जाएगा।” (आईएएनएस)

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