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रैना के ‘मैं ब्राह्मण हूँ’ के बाद जडेजा भी ट्विटर के मैदान में उतरे!

'मैं भी ब्राह्मण' उन ट्रोलर्स के खिलाफ उठाया गया हैशटैग था जिन्होंने भारतीय टीम के पूर्व तेज-तर्रार बल्लेबाज सुरेश रैना को स्वम को ब्राह्मण बताने पर ट्रोल किया था।

(NewsGram Hindi)

सोशल मीडिया और खास कर ट्विटर एक ऐसा मंच है जहाँ ट्रेंडिंग में आय-दिन दिचस्प ट्रेंड दिख ही जाते हैं। बीते 2 दिनों से ट्विटर पर ‘मैं भी ब्राह्मण’ ट्रेंड कर रहा है, किन्तु अब इस ट्रेंड में 2 और हैशटैग जुड़ गए हैं। एक है ‘मैं सर्व प्रथम हिन्दू हूँ’ और RAJPUT BOY(राजपूत लड़का)। ‘मैं भी ब्राह्मण’ उन ट्रोलर्स के खिलाफ उठाया गया हैशटैग था जिन्होंने भारतीय टीम के पूर्व तेज-तर्रार बल्लेबाज सुरेश रैना को ब्राह्मण बताने पर ट्रोल किया था। जिसमें सबसे आगे थे स्वयं को अंबेडकरवादी बताने वाले भीम आर्मी के सोशल मीडिया कार्यकर्ता। इसमें एक ट्विटर हैंडल ने लिखा “रैना और रवींद्र, आप अपनी द्विज जाति का महिमामंडन कर सकते हैं। यह वर्ण व्यवस्था की महिमा है। लेकिन एक शूद्र और एक अछूत अपने वर्ण का महिमामंडन कैसे करेंगे?”


अब आपको बता दें की जिस तरह ‘मैं भी ब्राह्मण’ ट्रेंडिंग में ऊपर आया इसके ही समरूप ‘मैं सर्वप्रथम हिन्दू’ के हैशटैग को इस्तेमाल कर ट्वीट किया जाना शुरू हुआ। यह इसलिए क्योंकि कई एटीजंस को यह आभास हो चुका है कि आपसी मतभेद में क्षत्रु का फायदा है। आपको ज्ञात होगा कि आपसी मतभेद के कारण ही पंजाब और आंध्र में धर्मान्तरण को बढ़ावा मिल रहा है। बहरहाल सोशल मीडिया पर एक और हैशटैग जो सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है वह है RAJPUT BOY। जो भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रविंद्र जडेजा के ट्वीट बाद वायरल हो गया है। रविंद्र जडेजा ने ट्वीट कर लिखा “हमेशा से राजपूत लड़का, जय हिंदी”।

इस ट्वीट के बाद कई नेटिजन्स ने रैना के साथ-साथ जडेजा को समर्थन दिया और #IsupportSureshRaina जैसे हैशटैग से ट्वीट करना शुरू किया।

यह भी पढ़ें: “हिन्दू धर्म” व “यज़ीदी धर्म” में आखिर क्या समानताएं हैं?

आपको बता दें कि इन सभी हैशटैग के साथ हिंदुत्व से जुड़ा एक और हैशटैग ट्रेंडिंग में है। #ArrestRamkeshMeena को कई लोगों ने ट्वीट किया है। बीते दिन राजस्थान कांग्रेस के विधायक रामकेश मीणा और उनके समर्थकों ने आमागढ़ किले पर लगे भगवा ध्वज को फाड़ दिया था। इस कार्य को कांग्रेस का राजस्थान के साथ देश के हिन्दुओं पर हमला बताया गया है।

(SHM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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