‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ देखने के बाद !

डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक डॉ मुनीश रायज़ादा ने बड़ी ईमानदारी के साथ अन्ना आंदोलन और उसी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी के भीतर के छल कपट को हमारे सामने पेश किया है।

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personal views on Transparency: Pardarshita ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता
ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता।

राजनीतिक रास्तों से मेरा कुछ खास सरोकार नहीं मगर ‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ सीरीज़ देखने के बाद, मेरी भावनाओं के ठहराव ने मुझे हैरान कर दिया। दिल्ली को ठगने वाली सरकार के मुखौटे उतार कर फेंक देने वाली इस डॉक्यूमेंट्री ने, राजनीति के असल दाव पेंचो की कहानियों से मुझे स्तब्ध कर दिया। और शायद ‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ देखने के बाद आपके विचार भी कुछ यही होंगे। 

‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ इस समय, एमएक्स प्लेयर (MX Player) पर निशुल्क उपलब्ध है।

अभी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें –

https://www.mxplayer.in/show/watch-transparency-pardarshita-series-online-f377655abfeb0e12c6512046a5835ce1

डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक डॉ मुनीश रायज़ादा ने बड़ी ईमानदारी के साथ अन्ना आंदोलन और उसी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी के भीतर के छल कपट को हमारे सामने पेश किया है। डॉक्यूमेंट्री में कुमार विश्वास, शाज़िया इल्मी और अन्य कई लोगों की बातों ने बड़ा ही रोचक और गंभीर माहौल बना दिया था ; कभी आँखें नर्म हुईं, कभी मिज़ाज नाज़ुक हुआ।  

‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ के गीत, डॉक्यूमेंट्री में एक नया रंग भरते दिखाई देते हैं। ऐसे तो डॉक्यूमेंट्री में कुल तीन गीत हैं, मगर कैलाश खेर की आवाज़ में ‘बोल रे दिल्ली बोल’ मेरे दिल के बेहद करीब है। इसे लिखा है अन्नू रिज़वी ने और संगीत प्रवेश मल्लिक का है। 

मेरा विश्वास है कि यह डॉक्यूमेंट्री अपनी अलग पहचान के कारण, आपकी आँखों और मन को बाँधे रखेगी। मेरा मानना है कि ‘ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता’ ने देश में, अपनी बात रखने की स्वतंत्रता और कला की अस्मिता को एक नई दिशा प्रदान की है। 

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