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मोदी-संघ को ‘तानाशाह’ बताने वाली अग्रिमा को छत्रपति शिवाजी महाराज का मज़ाक उड़ाना महंगा पड़ा, शिवसेना से मांगनी पड़ी माफी

जब विरोध करने की हिम्मत खत्म हो जाए, और ना चाह कर भी आपको अपने अंदर का गुस्सा अंदर ही रखने पर मजबूर होना पड़े, तब समझ आता है की, तानाशाही वाकई में क्या होती है।

अग्रिमा जोशुआ, स्टैंड अप कलाकार(Picture: Twitter)

अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे एक महिला स्टैंड अप कॉमेडियन, अग्रिमा जोशुआ, अपने एक शो के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिपन्नी करती हुई देखी गईं थी। इस वीडियो के वायरल होते ही महाराष्ट्र से आने वाले कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ट्वीटर पर अपनी आपत्ति जताई थी। कुछ लोगों ने अग्रिमा से माफी की मांग की तो कइयों ने उसे गालियां भी दी थी। 

इस सब के बावजूद अग्रिमा का कहना था की वो इस बात को लेकर माफी हरगिज़ नहीं मांगेगी। यह बताने के लिए उन्होने एक ट्वीट भी किया था, जिसे अब हटा लिया गया है। 

लेकिन शिवसेना और राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं के विरोध और कानूनी कार्यवाही की धमकी के बीच अग्रिमा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने लिखित और मौखिक तौर पर एक वीडियो डाल कर लोगों से माफी मांगी थी। उस वीडियो में अग्रिमा ने मुख्यमंत्री कार्यालय, अदित्या ठाकरे, अनिल देशमुख, और राज ठाकरे के ट्वीटर हैंडल को टैग कर माफी मांगा था। 

आपको बता दें की अग्रिमा एक स्टैंड अप आर्टिस्ट है और विचारधारा से कट्टर मोदी विरोधी हैं। अगर आप अग्रिमा का ट्वीटर टाइमलाइन खंगालेंगे तो आप मोदी, संघ और भाजपा के विरोध में लिखे गए कई ट्वीट्स देख पाएंगे। उन ट्वीट मे अग्रिमा अक्सर मोदी को ‘फैसिस्ट’ या तानाशाह साबित करने की कोशिश करती हुई नज़र आएँगी। 

अग्रिमा की माफी के बाद भी विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा। अब इस विवाद में नया नाम आया है, शुभम मिश्रा का। अग्रिमा द्वारा छत्रपती महाराज पर की गई टिपन्नी पर शुभम मिश्रा ने एक वीडियो के जरिये, अग्रिमा को गंदी माँ-बहन के गालियां दी है, और उसकी भाषा से ये भी प्रतीत हो रहा है की वो सिर्फ गाली ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर बलात्कार की धमकी भी दे रहा है। यह वीडियो भी काफी वायरल हुआ, जिसके बाद अग्रिमा के समर्थन में लोगों ने शुभम मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर आवाज़ उठाना शुरू कर दिया है। ट्वीटर पर अभी भी #ArrestBadassShubhamMishra ट्रेंड कर रहा है। 

इस ट्रेंड के बीच बड़े बड़े कॉमेडियन और कलाकार निकल कर सामने आ रहे हैं, और अग्रिमा के साथ खड़े होते हुए दिख रहे हैं। आपको बता दें की ये सारी घटना महाराष्ट्र की है जहां अभी महा विकास आघाडी(शिवसेना, काँग्रेस, एनसीपी का गठबंधन) की सरकार है। इस वजह से ऐसी घटनाओं पर ये कथित स्टार और कलाकार अग्रिमा के साथ तो हैं लेकिन खुल कर राज्य सरकार या मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। हाँ, दबे स्वर में विरोध ज़रूर उठता हुआ नज़र आ रहा है, लेकिन सीधे तौर पर कोई भी उद्धव ठाकरे या राज ठाकरे का नाम लेकर विरोध नहीं जता पा रहा है। अग्रिमा का माफीनामा भी उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, व राज ठाकरे के लिए ही था।

तानाशाही और डर का माहौल कैसा होता है, वो इस पूरे घटनाक्रम से आप समझ सकते हैं। जब विरोध करने की हिम्मत खत्म हो जाए, और ना चाह कर भी आपको अपने अंदर का गुस्सा अंदर ही रखने पर मजबूर होना पड़े, तब समझ आता है की, तानाशाही वाकई में क्या होती है। आज सरकार का विरोध करने से डर रहे ये लोग, उठते, बैठते, सोते, जागते, हर वक़्त मोदी को गाली देते हैं, हिन्दू धर्म को बदनाम करते हैं, और हिन्दू ग्रन्थों का मज़ाक बनाते हैं। इन सब के बावजूद भी एक तरफ तो ये बच कर निकल जाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी पर गालियों की बौछार करते हुए उन्हे तानाशाह भी बताते हैं, और आज़ादी भी मांगते हैं। या लक्षण सिर्फ हास्यस्प्द नहीं, बल्कि बेवकूफना भी प्रतीत होता है। 

अग्रिमा द्वारा शिवाजी महाराज पर किए गए टिपन्नी वाले वीडियो को हटा देना एक अच्छा संकेत है, क्यूंकी हिन्दू धर्म के इतिहास पर मज़ाक बनाने के चलन को अब चलने नहीं देना है। इस प्रथा को खत्म करना ही पड़ेगा, और जो चेतावनी के बाद भी इस पर अमल ना करे उसे कानूनी तरीके से सज़ा भी दिलानी पड़ेगी। 

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इस घटना के बीच कलाकार का खाल ओढ़े वामपंथियों का दोगलापन सामने आ गया है। अगर यही घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती तो ये लोग अब तक सड़कों पर आ गए होते, तानाशाही का आरोप लगाया जाता, और इसे भी लोकतंत्र की हत्या बताई जाती। लेकिन ये गैर भाजपा शासित राज्य है, तो चुप रहना ही जायज़ लगता होगा। और जो ना रहे चुप, तो उन्हे तानाशाही क्या होती है, ये दिखाने वाले शिव सेना और मनसे के कार्यकर्ता तो हैं ही, और जब उनसे बच जाए तो पुलिस कब काम आएगी। 

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

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जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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