Saturday, August 15, 2020
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मोदी-संघ को ‘तानाशाह’ बताने वाली अग्रिमा को छत्रपति शिवाजी महाराज का मज़ाक उड़ाना महंगा पड़ा, शिवसेना से मांगनी पड़ी माफी

जब विरोध करने की हिम्मत खत्म हो जाए, और ना चाह कर भी आपको अपने अंदर का गुस्सा अंदर ही रखने पर मजबूर होना पड़े, तब समझ आता है की, तानाशाही वाकई में क्या होती है।

अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे एक महिला स्टैंड अप कॉमेडियन, अग्रिमा जोशुआ, अपने एक शो के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिपन्नी करती हुई देखी गईं थी। इस वीडियो के वायरल होते ही महाराष्ट्र से आने वाले कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ट्वीटर पर अपनी आपत्ति जताई थी। कुछ लोगों ने अग्रिमा से माफी की मांग की तो कइयों ने उसे गालियां भी दी थी। 

इस सब के बावजूद अग्रिमा का कहना था की वो इस बात को लेकर माफी हरगिज़ नहीं मांगेगी। यह बताने के लिए उन्होने एक ट्वीट भी किया था, जिसे अब हटा लिया गया है। 

लेकिन शिवसेना और राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं के विरोध और कानूनी कार्यवाही की धमकी के बीच अग्रिमा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने लिखित और मौखिक तौर पर एक वीडियो डाल कर लोगों से माफी मांगी थी। उस वीडियो में अग्रिमा ने मुख्यमंत्री कार्यालय, अदित्या ठाकरे, अनिल देशमुख, और राज ठाकरे के ट्वीटर हैंडल को टैग कर माफी मांगा था। 

आपको बता दें की अग्रिमा एक स्टैंड अप आर्टिस्ट है और विचारधारा से कट्टर मोदी विरोधी हैं। अगर आप अग्रिमा का ट्वीटर टाइमलाइन खंगालेंगे तो आप मोदी, संघ और भाजपा के विरोध में लिखे गए कई ट्वीट्स देख पाएंगे। उन ट्वीट मे अग्रिमा अक्सर मोदी को ‘फैसिस्ट’ या तानाशाह साबित करने की कोशिश करती हुई नज़र आएँगी। 

अग्रिमा की माफी के बाद भी विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा। अब इस विवाद में नया नाम आया है, शुभम मिश्रा का। अग्रिमा द्वारा छत्रपती महाराज पर की गई टिपन्नी पर शुभम मिश्रा ने एक वीडियो के जरिये, अग्रिमा को गंदी माँ-बहन के गालियां दी है, और उसकी भाषा से ये भी प्रतीत हो रहा है की वो सिर्फ गाली ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर बलात्कार की धमकी भी दे रहा है। यह वीडियो भी काफी वायरल हुआ, जिसके बाद अग्रिमा के समर्थन में लोगों ने शुभम मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर आवाज़ उठाना शुरू कर दिया है। ट्वीटर पर अभी भी #ArrestBadassShubhamMishra ट्रेंड कर रहा है। 

इस ट्रेंड के बीच बड़े बड़े कॉमेडियन और कलाकार निकल कर सामने आ रहे हैं, और अग्रिमा के साथ खड़े होते हुए दिख रहे हैं। आपको बता दें की ये सारी घटना महाराष्ट्र की है जहां अभी महा विकास आघाडी(शिवसेना, काँग्रेस, एनसीपी का गठबंधन) की सरकार है। इस वजह से ऐसी घटनाओं पर ये कथित स्टार और कलाकार अग्रिमा के साथ तो हैं लेकिन खुल कर राज्य सरकार या मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। हाँ, दबे स्वर में विरोध ज़रूर उठता हुआ नज़र आ रहा है, लेकिन सीधे तौर पर कोई भी उद्धव ठाकरे या राज ठाकरे का नाम लेकर विरोध नहीं जता पा रहा है। अग्रिमा का माफीनामा भी उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, व राज ठाकरे के लिए ही था।

तानाशाही और डर का माहौल कैसा होता है, वो इस पूरे घटनाक्रम से आप समझ सकते हैं। जब विरोध करने की हिम्मत खत्म हो जाए, और ना चाह कर भी आपको अपने अंदर का गुस्सा अंदर ही रखने पर मजबूर होना पड़े, तब समझ आता है की, तानाशाही वाकई में क्या होती है। आज सरकार का विरोध करने से डर रहे ये लोग, उठते, बैठते, सोते, जागते, हर वक़्त मोदी को गाली देते हैं, हिन्दू धर्म को बदनाम करते हैं, और हिन्दू ग्रन्थों का मज़ाक बनाते हैं। इन सब के बावजूद भी एक तरफ तो ये बच कर निकल जाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी पर गालियों की बौछार करते हुए उन्हे तानाशाह भी बताते हैं, और आज़ादी भी मांगते हैं। या लक्षण सिर्फ हास्यस्प्द नहीं, बल्कि बेवकूफना भी प्रतीत होता है। 

अग्रिमा द्वारा शिवाजी महाराज पर किए गए टिपन्नी वाले वीडियो को हटा देना एक अच्छा संकेत है, क्यूंकी हिन्दू धर्म के इतिहास पर मज़ाक बनाने के चलन को अब चलने नहीं देना है। इस प्रथा को खत्म करना ही पड़ेगा, और जो चेतावनी के बाद भी इस पर अमल ना करे उसे कानूनी तरीके से सज़ा भी दिलानी पड़ेगी। 

इसे भी पढ़ें: कोई भी आता है और घंटा बजा कर चला जाता है, लेकिन अब नहीं: ISKCON

इस घटना के बीच कलाकार का खाल ओढ़े वामपंथियों का दोगलापन सामने आ गया है। अगर यही घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती तो ये लोग अब तक सड़कों पर आ गए होते, तानाशाही का आरोप लगाया जाता, और इसे भी लोकतंत्र की हत्या बताई जाती। लेकिन ये गैर भाजपा शासित राज्य है, तो चुप रहना ही जायज़ लगता होगा। और जो ना रहे चुप, तो उन्हे तानाशाही क्या होती है, ये दिखाने वाले शिव सेना और मनसे के कार्यकर्ता तो हैं ही, और जब उनसे बच जाए तो पुलिस कब काम आएगी। 

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Kumar Sarthak
•लेखक •घोर राजनीतिज्ञ• विश्लेषक• बकैत

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