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देश

बुंदेलखंड में ‘एम्स’ की बंधती आस

By: संदीप पौराणिक देश के कम ही ऐसे हिस्से हैं जिनकी तस्वीर समस्या का जिक्र आते ही उभरने लगती है, ऐसा ही एक इलाका है बुंदेलखंड। ज्यादातर मौकों पर यह इलाका सिर्फ समस्याओं के कारण ही पहचाना जाता है। यहां की बड़ी समस्या स्वास्थ्य से संबंधित है, बीते कुछ दिनों से चल रही कवायद ने

By: संदीप पौराणिक

देश के कम ही ऐसे हिस्से हैं जिनकी तस्वीर समस्या का जिक्र आते ही उभरने लगती है, ऐसा ही एक इलाका है बुंदेलखंड। ज्यादातर मौकों पर यह इलाका सिर्फ समस्याओं के कारण ही पहचाना जाता है। यहां की बड़ी समस्या स्वास्थ्य से संबंधित है, बीते कुछ दिनों से चल रही कवायद ने इस इलाके में स्वास्थ्य जगत के सबसे बड़े संस्थान आखिल भारतीय आयुर्विज्ञान स्वास्थ्य संस्थान (AIIMS) स्थापित होने की आस को और पक्का कर दिया है।


वैसे तो बुंदेलखंड मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है, दोनों राज्यों के सात-सात जिले इसमें आते हैं। यानी कुल जमा 14 जिलों में इलाका फैला हुआ है। इस इलाके की पहचान गरीब, समस्याग्रस्त क्षेत्र के तौर पर है। यह सांस्कृतिक, खनिज, पर्यटन के मामले में समृद्धि है, मगर आधुनिक सुविधाओं से दूर है। इनमें स्वास्थ्य संबंधी सुविधा भी शामिल है।

खजुराहो से सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस पिछले इलाके को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए पहल की। वे राज्य से लेकर केंद्र के जिम्मेदार लोगों से इस मसले पर चर्चा भी कर चुके हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात कर बुंदेलखंड में एम्स की स्थापना की मांग की।

एम्स से कई जिलों के स्वास्थ्य व्यवस्था में आएगा सुधार।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

एक तरफ जहां राजनीतिक तौर पर AIIMS की कदम ताल तेज हो रही है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राजीव खरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि, “बुंदेलखंण्ड चिकित्सकीय अभाव ग्रस्त इलाका है। इस इलाके के भौगोलिक क्षेत्र में मघ्यप्रदेश के सात जिले दतिया, टीकमगढ, निवाडी, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर जबकि उत्तर प्रदेश के सात जिले जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट आते हैं। बुंदेलखण्ड अभावों से भरा क्षेत्र है, यहां की एक प्रमुख समस्या समुचित स्वास्थ्य सुविधा का न होना है।”

उन्होंने आगे लिखा है कि, “मघ के सात जिलों में से दतिया और सागर में मेडिकल कॉलेज हैं, इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में भी झांसी एवं बांदा में मेडिकल कालेज हैं। इसी कारण इस क्षेत्र में गम्भीर बीमारी होने पर बेहतर इलाज के लिये कानपुर, नागपुर जबलपुर अथवा ग्वालियर जाना पड़ता है। गरीबी अधिक है इस कारण परिजन अपने मरीज को कानपुर ,नागपुर, जबलपुर अथवा ग्वालियर ले जाने में सक्षम नहीं होते, जिस कारण समुचित इलाज नहीं मिल पाता।”

यह भी पढ़ें: भारत को स्किल कैपिटल बनाने की तैयारी, स्किल इंडिया का तीसरा चरण होगा शुरू

खरे ने पूर्व में स्थापित AIIMS और नए एम्स स्थापना के चल रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए लिखा है कि, “भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में एम्स ( आल इंडिया इन्स्टीटयूट आफ मेडिकल साइंस ) का सबसे अहम स्थान है। एम्स नई दिल्ली के उपरांत भुवनेश्वर उड़ीसा राज्य में, रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में ,भोपाल एम्स एमपी राज्य में, जोधपुर राजस्थान राज्य में, पटना बिहार राज्य में, ऋषिकेष उत्तराखंण्ड राज्य में स्थापित हुए हैं। केंद्र सरकार की और भी स्थानों पर एम्स स्थापित करने की योजना है। इसमें बुंदेलखंड को भी शामिल किया जाए।”

सामाजिक कार्यकर्ता खरे ने सुझाव दिया है कि बुंदेलखंड में खजुराहो के पास एम्स स्थापित करना बेहतर होगा। बुन्देलखण्ड का खजुराहो जहां से दिल्ली, मुम्बई के लिये विमान सेवा भी संचालित है। यदि खजुराहो-पन्ना के मध्य एम्स की स्थापना की जाती है, तो इसका लाभ उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा जिलों के लोगों को मिलेगा।(आईएएनएस)

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