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मनोरंजन

अजय देवगन : जीवन में एक बार भगत सिंह का किरदार निभाना काफी नहीं

बॉलीवुड स्टार अजय देवगन ने 19 साल पहले अपनी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' की रिलीज का जश्न मनाने के लिए सोमवार को एक इंस्टाग्राम नोट पोस्ट किया।

बॉलीवुड स्टार अजय देवगन| (सोशल मीडिया)

बॉलीवुड स्टार अजय देवगन (Bollywood star Ajay Devgan) ने 19 साल पहले अपनी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ (The Legend of Bhagat Singh) की रिलीज का जश्न मनाने के लिए सोमवार को एक इंस्टाग्राम नोट पोस्ट किया। फिल्म 7 जून 2002 को सिनेमाघरों में आई।

अजय ने एक तस्वीर जिसमें उन्हें शहीद भगत सिंह के रूप में दिखाया गया है, उसके साथ लिखा, “अपने जीवनकाल और करियर में एक बार भगत सिंहजी जैसे क्रांतिकारी की भूमिका निभाना पर्याप्त नहीं है। आपको उन्हें लगातार वहां रखने की आवश्यकता है .. आखिरकार, ये वही हैं जिन्होंने अपने (खून) से इतिहास लिखा है। हैशटैग 19इयर्सऑफदलीजेंडऑफभगतसिंह हैशटैग राजकुमारसंतोष। “


अजय ने अपनी अभिनीत भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, जबकि राजकुमार संतोषी निर्देशित फिल्म को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

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ऐतिहासिक नाटक में सुशांत सिंह को सुखदेव के रूप में, डी. संतोष को राजगुरु के रूप में और अखिलेंद्र मिश्रा को चंद्रशेखर आजाद के रूप में, राज बब्बर और अमृता राव को भी दिखाया गया था।

अजय की आगामी परियोजनाएं ‘मैदान’, ‘भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया’, ‘आरआरआर’ और उनकी निर्देशित फिल्म ‘मेयडे’ हैं, और वह ‘सूर्यवंशी’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में भी दिखाई देंगे। (आईएएनएस-SM)

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प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

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महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

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By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार, हरियाणा

केजरीवाल सरकार की झूठ, फरेब, धूर्तता और भ्रष्टाचार की पोल खोलता 'बोल रे दिल्ली बोल' गीतरुपी शब्दभेदी बाण एकदम सटीक निशाने पर लगा है। सुभाष, आजाद, भगतसिंह जैसे आजादी के अमर शहीद क्रांतिकारियों के नाम व चेहरों को सामने रखकर जनता को बेवकूफ बना सुशासन ईमानदारी और पारदर्शिता का सब्जबाग दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार आज पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार, कुशासन एवं कुव्यवस्था के दल-दल में धंस चुकी है। आज केजरीवाल का चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। दिल्ली में कोविड-19 के दौरान डॉक्टरों सहित सैकड़ों विभिन्न धर्म-संप्रदाय के मेडिकल स्टाफ के लोगों ने बतौर कोरोना योद्धा अपनी जाने गंवाई थी। लेकिन उन सब में केजरीवाल के चश्मे में केवल मुस्लिम डॉक्टर ही नजर आया, जिसके परिजनों को 'आप सरकार' ने एक करोड़ की धनराशि का चेक भेंट किया। किंतु बाकी किसी को नहीं बतौर मुख्यमंत्री यह मुस्लिम तुष्टिकरण, असंगति, पक्षपात आखिर क्यों ?

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