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राजनीति

क्या अमनातुल्लाह खान द्वारा लिया गया ‘दान’, दंगों में खर्च हुए पैसों की रिकवरी थी? बड़ा सवाल!

"लेकिन अमानतुल्लाह खान पर शक तब और गहराया जब दंगों के बाद 28 फरवरी को अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर लोगों से दंगा पीड़ितों के नाम पर पैसे मांगने शुरू किए"

अमानतुल्लाह खान (माला पहना व्यक्ति), विधायक, आम आदमी पार्टी

फरवरी महीने में हुए दिल दहला देने वाले हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस आक्रमक रूप से लगातार कार्यवाही कर रही है। इस क्रम में आम आदमी पार्टी के पार्षद(अब निष्कासित) ताहिर हुसैन पर दंगों से जुड़ी प्लानिंग, आगजनी, अपहरण, हत्या करवाने जैसे कई गंभीर अपराधों को लेकर दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर कर ली है।

ताहिर हुसैन के अलावा उनके भाई, शाह आलम, ‘पिंजड़ा तोड़’ नामक वामपंथी संगठन से जुड़ी नताशा, देवांगना, जेएनयू छात्र उमर खालिद के साथ कई लोग जांच के घेरे में है। पुलिस के चार्जशीट में दंगों के पीछे बहुत बड़ी साजिश के होने की बात को स्पष्ट किया गया है।


लेकिन इन सभी नामों में ताहिर हुसैन का नाम मुख्य भूमिका में है। ताहिर हुसैन, आम आदमी पार्टी के पार्षद(निष्कासित) तो हैं ही लेकिन इसके अलावा, उन्हे पार्टी के बड़े नेता संजय सिंह, अमानतुल्लाह खान और खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता है।

हालांकि दंगों में नाम आने के बाद ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद, पार्टी के नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह और ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान, ताहिर हुसैन का खुलेआम समर्थन करते रहे। संजय सिंह का कहना था की, भीड़ ताहिर हुसैन के घर में घुस आई थी, और ताहिर हुसैन द्वारा पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी पुलिस वहाँ नहीं पहुंची।

जबकि ताहिर हुसैन के घर की छत पर मिले पेट्रोल बम, एसिड के थैलियाँ, भारी मात्रा में जमा किए गए पत्थर और गुलेल कुछ और ही सच बयां कर रहा था। इस बात से ये तो साबित होता है की पार्टी द्वारा ताहिर हुसैन को निष्कासित करने का फैसला महज एक औपचारिकता थी, जब की पार्टी के बड़े नेता और केजरीवाल के दाएँ हाथ माने जाने वाले संजय सिंह और विधायक अमानतुल्लाह खान द्वारा ताहिर हुसैन का खुलेआम समर्थन किया जा रहा था।

कइयों का मानना है की दंगो के दौरान ताहिर हुसैन से जुड़ी जानकारी उनके करीबी संजय सिंह, अमानतुल्लाह खान, या केजरीवाल को ना हो, इसकी संभावना बहुत कम है। लेकिन अमनातुल्लाह खान इन दंगों से जुड़ी वो कड़ी हैं जिन पर अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है। अमनातुल्लाह खान आम आदमी पार्टी के ओखला से विधायक हैं और ताहिर हुसैन व अरविंद केजरीवाल के बहुत करीबी माने जाते हैं।

विधायक अमानतुल्लाह खान से जुड़ी कड़ी

दिल्ली दंगों से पहले ऐसे कई ऐसे विडियो सामने आए थे जिनमे कथित तौर पर अमानतुल्लाह खान द्वारा भीड़ को भड़काने की बात सामने आई थी। इसके अलावा अमानतुल्लाह खान ने दंगों से पहले चुनाव को लेकर किए जा रहे प्रचार में सीएए-एनआरसी के संदर्भ में मुस्लिमों को डीटेंसन कैंप में रखे जाने जैसी बातों का ज़िक्र कर भड़काने की भी कोशिश की थी।

लेकिन अमानतुल्लाह खान पर शक तब और गहराया जब दंगों के बाद 28 फरवरी को अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर लोगों से दंगा पीड़ितों के नाम पर पैसे मांगने शुरू किए।

अगर आप इस ट्वीट पर गौर करेंगे तो आप देख पाएंगे की अमानतुल्लाह खान ने दान के पैसों के लिए किसी भी ट्रस्ट या एनजीओ के बैंक खाते का नंबर नहीं बल्कि अपने निजी खाते का नंबर दे रखा है। इससे कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इन पैसों को आखिर निजी खाते में क्यूँ मंगाया क्या? इन पैसों को कहाँ खर्च किया गया? क्या इन पैसों को किसी विशेष समुदाय से जुड़े लोगों के लिए ही खर्च किया गया?

गौरतलब है की दिल्ली पुलिस की चार्ज शीट में दंगों को लेकर अमानतुल्लाह खान के करीबी ताहिर हुसैन द्वारा खर्च की गयी रकम 1.3 करोड़ रुपये बताई गयी है। इस जानकारी के सामने आने के बाद अमानतुल्लाह खान द्वारा निजी खाते में पैसे मंगाने के पीछे के मकसद को लेकर की जा रही शक को और बल मिल रहा है।

जिसके बाद एक और बड़ा सवाल ये भी उठता है की, क्या दंगों के बाद अमानतुल्लाह खान द्वारा की गयी दान की अपील , 1.3 करोड़ रुपये के इस भारी रकम की रिकवरी के लिए थी?

इससे जुड़ी जानकारी के लिए हमने सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी जी से बात की। अमित तिवारी ने हमें बताया की उन्होने इस संदर्भ में उत्तर पूर्वीय दिल्ली डीसीपी, वेद प्रकाश सूर्या के पास अमानतुल्लाह खान के खिलाफ शिकायत दर्ज करा रखी है।

अमित तिवारी द्वारा अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दर्ज की गयी शिकायत की डिजिटल कॉपी

अमित तिवारी ने हमसे बात करते हुए कहा की उन पैसों को अपने खाते में मँगवाने के पीछे का क्या मकसद था इसका खुलासा तो होना ही चाहिए, उसके साथ साथ उन पैसों को कहाँ खर्च किया गया इस जानकारी को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

अमित तिवारी ने हमें बताया की कानूनी तौर से सरकारी पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति निजी खाते या निजी इस्तेमाल के लिए किसी भी स्थिति में इस प्रकार पैसों की मांग नहीं कर सकता है, चाहे वो सांसद -विधायक ही क्यूँ ना हों। ये कानूनी अपराध है और इसके लिए संविधान में 3 से 7 वर्षों तक की सज़ा का प्रावधान है।

“सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा निजी काम को लेकर पैसे लेने” से जुड़े कानून का हिस्सा।

हाँ, वो किसी संस्था या ट्रस्ट में दान करने की अपील कर सकता है लेकिन निजी खाते में लोगों से ‘दान’ के नाम पर पैसे लेना सरासर गैर कानूनी है। ऐसे निजी खातों में दान के नाम पर पैसे लेने की प्रथा से किसी भी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के लिए रिश्वत लेने में आसानी हो जाएगी। अमित तिवारी ने आगे कहा की दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार द्वारा दंगा पीड़ितों को आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही थी, उस वक़्त अमानतुल्लाह खान अपने निजी खाते में ‘दान’ ले कर उन पैसों का क्या करना चाहते थे?

आपको बता दें की ताहिर हुसैन पर दंगों की प्लानिंग, आगजनी, हत्या और दंगों को करवाने में 1.3 करोड़ रुपए खर्च करने जैसे गंभीर आरोपों को लेकर चार्जशीट दायर होने के बाद भी, आप विधायक और अरविंद केजरीवाल के करीबी अमानतुल्लाह खान ने ताहिर हुसैन के बचाव में आज भी मुस्लिम कार्ड खेला है, और इल्ज़ाम लगाया है की ताहिर हुसैन को मुसलमान होने के कारण फंसाया जा रहा है।

जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा और तजींदर पाल सिंह बग्गा ने उन्हे करारा जवाब दिया है।

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