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देश

अमर सिंह पहले, बबलू गुप्ता 100वें, मोंगिया 200वें और नटराजन 300वें टेस्ट क्रिकेटर

ब्रिस्बेन के गाबा इंटरनेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को तमिलनाडु के दो खिलाड़ियों ने एक साथ टेस्ट डेब्यू किया। तेज गेंदबाज टी. नटराजन और स्पिनर वॉशिंगटन सुंदर का टेस्ट खेलने का सपना पूरा हुआ। आस्ट्रेलिया के साथ हुई सीमित ओवरों की सीरीज में खेल चुके नटराजन और सुंदर को मूल रूप से नेट बॉलर्स के तौर

 ब्रिस्बेन के गाबा इंटरनेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को तमिलनाडु के दो खिलाड़ियों ने एक साथ टेस्ट डेब्यू किया। तेज गेंदबाज टी. नटराजन और स्पिनर वॉशिंगटन सुंदर का टेस्ट खेलने का सपना पूरा हुआ। आस्ट्रेलिया के साथ हुई सीमित ओवरों की सीरीज में खेल चुके नटराजन और सुंदर को मूल रूप से नेट बॉलर्स के तौर पर आस्ट्रेलिया लाए गए थे लेकिन किस्मत उनका साथ देती गई और उनके लिए नए दरवाजे खुलते गए।

अब नटराजन भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले 300वें और सुंदर 301वें खिलाड़ी बन चुके हैं। तो फिर भारत का पहला, 100वां, 200वां टेस्ट क्रिकेटर कौन था? यह जानना भी जरूरी है। भारत ने 1932-33 सीजन में अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। उस सीरीज में भारतीय टीम के कप्तान सीके नायडू थे। इस लिहाज से वही भारत के पहले टेस्ट खिलाड़ी माने जा सकते हैं।


वैसे रिकार्डबुक को देखें तो उस सीरीज में भारतीय ओपनर रहे ऑलराउंडर अमर सिंह को पहला भारतीय टेस्ट क्रिकेटर होने का गौरव प्राप्त है। अमर सिंह को सबसे पहले टेस्ट कैप सौंपा गया था। वह भारत के लिए सिर्फ टेस्ट खेल सके क्योंकि 29 साल की आयु में उनका निधन हो गया। अमर सिंह सात टेस्ट मैचों में 292 रन बनाने के अलावा उन्होंने 28 विकेट भी लिए थे। सिंह के नाम भारत के लिए पहला टेस्ट अर्धशतक लगाने का रिकार्ड है। वह भारत के पहले तेज गेंदबाज थे।

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भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले 100वें खिलाड़ी बबलू गुप्ते थे। मुम्बई निवासी गुप्ते ने नॉरी कांट्रेक्टर की कप्तानी में 1960-61 में डेब्यू किया था। वह भारत के लिए हालांकि सिर्फ तीन टेस्ट खेल सके थे। भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले 200वें खिलाड़ी का करियर हालांकि इससे काफी लम्बा था। विकेटकीपर बल्लेबाज नयन मोंगिया ने 1994 में श्रीलंका के खिलाफ लखनऊ में डेब्यू किया था। वह भारत के लिए 44 टेस्ट मैचों में खेले। मोंगिया ने 24 के औसत से 1442 रन बनाए, जिसमें एक शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं।

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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