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प्रदर्शन के दौरान भड़के हिंसा की तस्वीर(Source: VOA)

अमरीका के अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने आक्रामक रूप ले लिया है। जॉर्ज फ्लॉय्ड के समर्थन और सरकार एवं पुलिस कार्यवाही के विरोध में सड़क पर उतरे लोगों ने आगजनी शुरू कर दी है। लोगों को मारने और गाड़ियों को जलाने से लेकर प्रदर्शनकारियों द्वारा दुकानों तक को लूटा जा रहा है। 

क्या है मामला?

अमरीका के मिनिसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में सोमवार को एक 46 वर्षीय अश्वेत नागरिक, जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत हो जाती है। वायरल हुए वीडियो के मुताबिक मौत की वजह, पुलिस अधिकारी द्वारा जॉर्ज फ्लॉय्ड पर की गयी बर्बरता नज़र आ रही है।


इस घटना के बाद मिनियापोलिस शहर में कई जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना था। लेकिन देखते ही देखते, प्रदर्शनकारियों द्वारा, सुरक्षा बलों पर हमले किए जाने लगे। मिनियपोलिस पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया गया, और उसके साथ साथ पुलिस की अनगिनत गाड़ियों को या तो तोड़ दिया गया या उसे भी आग में झोंक दिया गया। 

न्यूयॉर्क की तस्वीर (Image: VOA)

धीरे-धीरे प्रदर्शन, मिनियपोलिस से निकाल कर देश के अन्य राज्यों मे फैलने लगा। हिंसक हो चुके इस प्रदर्शन की चपेट में अब तक अमरीका के कई राज्य आ चुके है। यहाँ तक की प्रदर्शनकारी, वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस के करीब भी पहुँच गए थे, लेकिन सुरक्षा बलों की मदद से उन्हे पीछे धकेलने में सफलता हासिल की गयी।

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत का विरोध करना था। इसके अलावा अश्वेत नागरिकों की ज़िंदगी की अहमियत और उसकी सुरक्षा की मांग के लिए भी लोगों ने प्रदर्शन के दौरान आवाज़ उठाए। लोगों द्वारा सड़क से लेकर ट्वीटर तक #BlackLivesMatter के नारे लगाए गए।

लेकिन उग्र होती भीड़ अब सिर्फ प्रदर्शन या जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत के विरोध तक सीमित नहीं रह गयी है। भारी मात्रा में पुलिस पर हो रहे पथराव, आगजनी और कई कंपनियों, जैसे एप्पल और गूची के शौरोम को तोड़ कर लूटे जाने के आ रही खबर, कुछ और ही हकीक़त बयां कर रही है। कई प्रदर्शनकारी, रोनाल्ड रेगन फ़ाउंडेशन बिल्डिंग के शीशे तोड़ कर अंदर घुसते हुए भी नज़र आए। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस को, प्रदर्शनकारियों के ऊपर रबर बुलेट और आँसू गैस के गोले छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। कुछ जगहों के दीवारों पर स्प्रे पेंटिंग के ज़रिये ‘F*** कैपिटलिज़्म’ भी लिखा देखा गया।






ये जानना ज़रूरी है की अमरीका में इससे पहले भी कई नस्लभेदी हिंसा देखें गए हैं, जिसे मीडिया द्वारा इस हद्द तक कवरेज नहीं दी जाती थी। लेकिन जॉर्ज फ्लॉय्ड के मौत के बाद इस घटना को मीडिया ने जोरों शोर से उठाया, जिसके बाद एक नीतिगत तरीके से लोग सड़कों पर आ कर आगजनी करने लगे और देखते ही देखते ये खबर दुनिया भर का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।
इस प्रदर्शन को अमरीका की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं द्वारा मुखर रूप से समर्थन दिया जा रहा है। 

आपको बता दें की अभी कुछ ही महीनों में अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिणपंथी विचारधारा वाली रिपब्लिकन पार्टी है तो वहीं दूसरी तरफ, वामपंथी विचारधारा की ओर थोड़ा झुकाव रखने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी है।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Image: Wikimedia Commons)

डेमोक्रेटिक पार्टी से मिल रहे समर्थन को देखते हुए इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है की इस मुद्दे को हवा देने और सड़कों पर तय तरीके से हिंसात्मक प्रदर्शन और आगजनी के पीछे राजनीतिक प्रायोजकता होने की संभावना हो सकती है। सरकार के विरोध में हो रहे इस प्रदर्शन से जन्मी सरकार विरोधी जनभावना की लहर पर सवार, डेमोक्रेटिक पार्टी इस चुनाव में निश्चित फायदा उठा सकती है।

अमरीका में हो रहे इस आगजनी, उग्र प्रदर्शन, सुरक्षा बलों पर पथराव के साथ लूटपाट की घटना, को देख कर, कुछ महीनों पहले भारत मे हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों की भयावह यादें ताज़ा हो गयी हैं। उन दंगों में भी एक समुदाय विशेष द्वारा दिल्ली को जला कर खाक करने से लेकर, सुरक्षाबलों पर पथराव, और लूट पाठ की ख़बरें सामने आई थी। और याद करें तो उस आंदोलन को भी भारत के वामपंथी धड़े का समर्थन हासिल था। उस प्रदर्शन के ज़रिये, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, विश्व स्तर पर इस्लाम विरोधी छवि बनाने की कोशिश की गयी थी। 

पुलिस बर्बरता का शिकार हुए जॉर्ज फ्लॉय्ड को इंसाफ मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसे उग्र प्रदर्शन जॉर्ज फ्लॉय्ड के पक्ष को बेशक कमजोर कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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