Saturday, July 11, 2020
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अमरीका के अश्वेत प्रदर्शन ने लिया हिंसात्मक रूप, दिला रहा हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगो की याद

अमरीका के अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने आक्रामक रूप ले लिया है। जॉर्ज फ्लॉय्ड के समर्थन और सरकार एवं पुलिस कार्यवाही के विरोध में सड़क पर उतरे लोगों ने आगजनी शुरू कर दी है। लोगों को मारने और गाड़ियों को जलाने से लेकर प्रदर्शनकारियों द्वारा दुकानों तक को लूटा जा रहा है। 

क्या है मामला?

अमरीका के मिनिसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में सोमवार को एक 46 वर्षीय अश्वेत नागरिक, जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत हो जाती है। वायरल हुए वीडियो के मुताबिक मौत की वजह, पुलिस अधिकारी द्वारा जॉर्ज फ्लॉय्ड पर की गयी बर्बरता नज़र आ रही है।

इस घटना के बाद मिनियापोलिस शहर में कई जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना था। लेकिन देखते ही देखते, प्रदर्शनकारियों द्वारा, सुरक्षा बलों पर हमले किए जाने लगे। मिनियपोलिस पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया गया, और उसके साथ साथ पुलिस की अनगिनत गाड़ियों को या तो तोड़ दिया गया या उसे भी आग में झोंक दिया गया। 

न्यूयॉर्क की तस्वीर
(Image: VOA)

धीरे-धीरे प्रदर्शन, मिनियपोलिस से निकाल कर देश के अन्य राज्यों मे फैलने लगा। हिंसक हो चुके इस प्रदर्शन की चपेट में अब तक अमरीका के कई राज्य आ चुके है। यहाँ तक की प्रदर्शनकारी, वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस के करीब भी पहुँच गए थे, लेकिन सुरक्षा बलों की मदद से उन्हे पीछे धकेलने में सफलता हासिल की गयी।

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत का विरोध करना था। इसके अलावा अश्वेत नागरिकों की ज़िंदगी की अहमियत और उसकी सुरक्षा की मांग के लिए भी लोगों ने प्रदर्शन के दौरान आवाज़ उठाए। लोगों द्वारा सड़क से लेकर ट्वीटर तक #BlackLivesMatter के नारे लगाए गए।

लेकिन उग्र होती भीड़ अब सिर्फ प्रदर्शन या जॉर्ज फ्लॉय्ड की मौत के विरोध तक सीमित नहीं रह गयी है। भारी मात्रा में पुलिस पर हो रहे पथराव, आगजनी और कई कंपनियों, जैसे एप्पल और गूची के शौरोम को तोड़ कर लूटे जाने के आ रही खबर, कुछ और ही हकीक़त बयां कर रही है। कई प्रदर्शनकारी, रोनाल्ड रेगन फ़ाउंडेशन बिल्डिंग के शीशे तोड़ कर अंदर घुसते हुए भी नज़र आए। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस को, प्रदर्शनकारियों के ऊपर रबर बुलेट और आँसू गैस के गोले छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। कुछ जगहों के दीवारों पर स्प्रे पेंटिंग के ज़रिये ‘F*** कैपिटलिज़्म’ भी लिखा देखा गया।






ये जानना ज़रूरी है की अमरीका में इससे पहले भी कई नस्लभेदी हिंसा देखें गए हैं, जिसे मीडिया द्वारा इस हद्द तक कवरेज नहीं दी जाती थी। लेकिन जॉर्ज फ्लॉय्ड के मौत के बाद इस घटना को मीडिया ने जोरों शोर से उठाया, जिसके बाद एक नीतिगत तरीके से लोग सड़कों पर आ कर आगजनी करने लगे और देखते ही देखते ये खबर दुनिया भर का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।
इस प्रदर्शन को अमरीका की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं द्वारा मुखर रूप से समर्थन दिया जा रहा है। 

आपको बता दें की अभी कुछ ही महीनों में अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिणपंथी विचारधारा वाली रिपब्लिकन पार्टी है तो वहीं दूसरी तरफ, वामपंथी विचारधारा की ओर थोड़ा झुकाव रखने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी है।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
(Image: Wikimedia Commons)

डेमोक्रेटिक पार्टी से मिल रहे समर्थन को देखते हुए इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है की इस मुद्दे को हवा देने और सड़कों पर तय तरीके से हिंसात्मक प्रदर्शन और आगजनी के पीछे राजनीतिक प्रायोजकता होने की संभावना हो सकती है। सरकार के विरोध में हो रहे इस प्रदर्शन से जन्मी सरकार विरोधी जनभावना की लहर पर सवार, डेमोक्रेटिक पार्टी इस चुनाव में निश्चित फायदा उठा सकती है।

अमरीका में हो रहे इस आगजनी, उग्र प्रदर्शन, सुरक्षा बलों पर पथराव के साथ लूटपाट की घटना, को देख कर, कुछ महीनों पहले भारत मे हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों की भयावह यादें ताज़ा हो गयी हैं। उन दंगों में भी एक समुदाय विशेष द्वारा दिल्ली को जला कर खाक करने से लेकर, सुरक्षाबलों पर पथराव, और लूट पाठ की ख़बरें सामने आई थी। और याद करें तो उस आंदोलन को भी भारत के वामपंथी धड़े का समर्थन हासिल था। उस प्रदर्शन के ज़रिये, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, विश्व स्तर पर इस्लाम विरोधी छवि बनाने की कोशिश की गयी थी। 

पुलिस बर्बरता का शिकार हुए जॉर्ज फ्लॉय्ड को इंसाफ मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसे उग्र प्रदर्शन जॉर्ज फ्लॉय्ड के पक्ष को बेशक कमजोर कर रहे हैं।

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