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बिहार में ‘पक्षीप्रेम’, 21 वर्षो के बाद दिखा ‘इंडियन कोर्सर

बिहार में पक्षियों के प्रति जागरूकता लाने और युवाओं में ‘पक्षी प्रेम’ जगाने के उद्देश्य से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य में राजकीय पक्षी महोत्सव ‘कलरव’ मनाने का निर्णय लिया है। ‘कलरव’ का आयोजन अगले साल जनवरी महीने में बिहार के सबसे सुरम्य पक्षी स्थल जमुई जिले के नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य में

बिहार में पक्षियों के प्रति जागरूकता लाने और युवाओं में ‘पक्षी प्रेम’ जगाने के उद्देश्य से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य में राजकीय पक्षी महोत्सव ‘कलरव’ मनाने का निर्णय लिया है। ‘कलरव’ का आयोजन अगले साल जनवरी महीने में बिहार के सबसे सुरम्य पक्षी स्थल जमुई जिले के नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य में किया जाएगा।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पक्षी हमारे पर्यावरण में किसी भी बदलाव का सूचक होते हैं, हमारी कृषि को उन्नत रखते हैं, वनाच्छादन में अहम भूमिका निभाते हैं। पक्षी के जानकारों का भी कहना है कि बिहार में पक्षियों की अद्भुत विविधता है, मगर यहां पक्षियों का अध्ययन करने वालों की संख्या बहुत कम है। पक्षियों के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव रहने के कारण यहां पक्षियों का शिकार-व्यापार भी अधिक होता है। इसका मुख्य कारण यहां के दुर्लभ पक्षी जगत को प्रसारित नहीं किया जा सका है। ऐसे में कहा जा रहा है कि पक्षियों के अध्ययन और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए इस ‘राजकीय पक्षी महोत्सव- कलरव’ का आयोजन बिहार में पक्षियों की सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।


वन विभाग के अधिकारी कहते हैं, “इस महोत्सव के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित और प्रशिक्षित करना है। उन्हें कई तकनीकी सत्रों के माध्यम से पक्षियों को पहचानने के तरीके बताए जाएंगें और वैज्ञानिक तरीकों से उनके आहार व्यवहार आदि से परिचित कराया जायगा।” युवाओं को फील्ड में ले जाकर भी पक्षियों के सम्बन्ध में जानकारियां दी जाएंगी। इन सत्रों में राज्य और देश के अनुभवी पक्षी वैज्ञानिक और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के वैज्ञानिकों द्वारा आम लोगों और युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : “डीआरएस से अंपायर्स कॉल को हटा देना चाहिए क्योंकि”

राज्य के महत्वपूर्ण पक्षी स्थलों के आस-पास के युवाओं को विशेष रूप से इस राजकीय पक्षी महोत्सव में आमंत्रित किया जाएगा, साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी के कैडेट, विद्यार्थियों, ग्रामीणों, मछुआरों और अन्य समुदाओं को शामिल किया जाएगा, जो पक्षियों के अध्ययन और संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

इंडियन कोर्सर । ( Wikimedia Commons )

कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने के लिए जमुई के वन प्रमंडल पदाधिकारी सत्यजीत कुमार, आईएफएस अधिकारी भरत चिंतापल्लली और मंदार नेचर क्लब, भागलपुर के संस्थापक अरविन्द मिश्रा अभी नागी, नकटी और जिले के पक्षियों के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का दो दिवसीय भ्रमण कर रहे हैं। अरविंद मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि इस दल ने नकटी पक्षी अभयारण्य का दौरा करते हुए इलाके में ‘यूरेशियन राईनेक’ पक्षी को पहली बार देखा और 21 वर्षो के बाद ‘इंडियन कोर्सर’ पक्षी को देखा। मिश्रा ने बताया, “1998 में पहली बार दो की संख्या में ये ‘इंडियन कोर्सर’ यहां दिखे थे, उसके बाद वर्षो तक पठारों में मीलों भटकने के बाद भी इनके दर्शन नहीं हुए थे। अब चार की संख्या में इनका दिखना किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है। ये पक्षी बिहार में अब तक बस जमुई के इसी क्षेत्र ही दिखे हैं।”

उन्होंने कहा कि फाल्केटेड डक का भी 2018, 2019 और 2020 में इस क्षेत्र में लगातार दिखना इस प्रजाति के व्यवहार की विचित्रता रही है। इस आयोजक दल ने कहा कि बिहार राज्य का पहला राजकीय पक्षी महोत्सव मनाने के लिए जमुई जिले के नागी, नकटी से बेहतर स्थल की कल्पना नहीं की जा सकती। (आईएएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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