डॉ एपीजे अब्दुल कलाम  Wikimedia
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इस घटना के बाद से डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने सभी धर्मों का आदर करना शुरू किया

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु (Tamilnadu) के रामेश्वरम (Rameshwaram) में हुआ था। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति (11th President) थे।

Poornima Tyagi, न्यूज़ग्राम डेस्क

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) पूरे विश्व के युवाओं के लिए एक मिसाल है। एक साधारण से परिवार में जन्म लेने से एक महान वैज्ञानिक बनने तक का सफर और फिर बाद में देश के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भी उन्होंने अपना विनम्र स्वभाव नहीं छोड़ा यह एक सम्मानजनक विषय है। आज हम आपको उनके बचपन में घटित कुछ ऐसे ही घटनाओं के बारे में बताएंगे जिनसे उनके मन में सभी धर्मों के प्रति आदर पनपता गया। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु (Tamilnadu) के रामेश्वरम (Rameshwaram) में हुआ था। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति (11th President) थे। उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी शिक्षा और गोष्ठियों पर चर्चा करना आदर का विषय होगा। उनके बारे में यदि किसी विषय पर सबसे ज्यादा बात की जा सकती है तो वह उनका व्यक्तित्व है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने खुद बताया कि कैसे बचपन में घटित कुछ घटनाओं से उनके मन में सभी धर्मों के लिए आदर पनपा।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम डॉ अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम (Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam) था। उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था किंतु उनके पिता नाव चलाते थे और नाव से हिंदुओं को तीर्थ यात्रा कराते थे। लेकिन जल्द ही उनके परिवार से रोजी-रोटी का यह साधन छिन गया। नतीजतन अब्दुल कलाम का बचपन बहुत ही संघर्ष में बीता और अपने परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने अखबार बेचने का काम भी किया।

डॉ कलाम ने अपनी आत्मकथा विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire) में अपने बचपन का जिक्र करते हुए लिखा है कि उनके जीवन में कुछ लोगों का बहुत गहरा प्रभाव है। उनके लिखे गए इन्हीं वृत्तातों से पता चलता है कि अब्दुल कलाम के अंदर बचपन से ही एक वैज्ञानिक होने के मूलभूत गुण मौजूद थे। बचपन में उनके सभी संदेहों को उनके धार्मिक पिता हल कर दिया करते थे। यही कारण था कि उनके अंदर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पनपने लगा।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के घर के पास एक शिव मंदिर हुआ करता था जिससे उनके जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ा। उनका घर एक मुस्लिम बहुल इलाके में था लेकिन उनके ऊपर रामेश्वरम मंदिर (Rameshwaram Temple) के पुजारी पक्षी लक्ष्मण शास्त्री का असर था जो उनके पिता के मित्र हुआ करते थे उन दोनों के बीच कई बार आध्यात्मिक चर्चाएं होती थी जिन्हें अब्दुल कलाम सुन लिया करते थे। एक बार उन्होंने अपने पिता से प्रार्थना के महत्व के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि प्रार्थना आत्माओं को जोड़ने का काम करती है प्रार्थना करने से हमारा शरीर ब्रह्मांड से जुड़ता है जो किसी संपदा, उम्र, जाति और पंथ का भेदभाव नहीं करता है।

एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल

डॉ कलाम की तीन बहुत अच्छे दोस्त रामानंद शास्त्री, अरविंदन और शिवप्रकाशन तीनों ही परंपरागत हिंदू ब्राह्मण परिवारों से ताल्लुक रखते थे। वे सब बिना किसी भेदभाव के बचपन से ही अच्छे मित्र बने रहे। पांचवी कक्षा में एक नए शिक्षक ने देखा कि डॉक्टर कलाम मुस्लिम होने के बावजूद हिंदू बच्चों के साथ बैठे हैं तो उन्होंने उन्हें अलग बैठा दिया। जिसका कलाम और रमन शास्त्री को बहुत बुरा लगा हुआ है इस पर लक्ष्मण शास्त्री में दोनों को शिक्षक के सामने समझाया कि हमें ऐसा भेदभाव नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर कलाम के विज्ञान के शिक्षक शिव सुब्रमण्यम अय्यर ब्राह्मण परिवार से होने के बावजूद उनसे कहते थे कि कलाम "मैं चाहता हूं कि तुम अपना विकास ऐसा करो कि तुम बड़े शहरों के उच्च शिक्षित लोगों के बीच बैठ सको।"

(PT)

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