केले का वैज्ञानिक नाम 'मूसा पैराडाइसियाका' (Musa Paradisiaca) है। यह दुनियाभर में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े केला उत्पादकों में से एक है, और यहां इसे पूजा, धार्मिक समारोहों और रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल किया जाता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) की एक स्टडी के मुताबिक, केले में फेनोलिक एसिड और फ्लेवोनोइड जैसे बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये एडिमा, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से जुड़े एंजाइमों को रोकने में भी काफी मददगार होते हैं।
केले में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर भी कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है।
इसी के साथ ही इसमें ट्रिप्टोफैन नामक एमिनो एसिड होता है, जो शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में भी मददगार है। सेरोटोनिन को 'हैप्पी हार्मोन' भी कहते हैं, जो मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में सहायक होता है।
चरक संहिता के अनुसार केला एक पोषक और बलवर्धक फल (Nutritious and strengthening fruits) है, जिसे अन्न के समान माना गया है। यह पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है, रक्त को शुद्ध करता है और शारीरिक शक्ति बढ़ाता है। हालांकि, इसके खाने के नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है; इसे भोजन के बाद खाना फायदेमंद होता है, लेकिन इसे दूध, दही या पानी के साथ तुरंत नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन में बाधा आ सकती है और शरीर में विषाक्त पदार्थ बन सकते हैं।
केले में प्राकृतिक शर्करा (जैसे सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज) और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए, वर्कआउट से पहले या बाद में इसका सेवन करना फायदेमंद माना गया है।
केला खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है; अगर आपको कोई गंभीर समस्या है, तो अपने चिकित्सक से पूछकर ही इसका सेवन करें।
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