कौन हैं क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की? X
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हिंदी से प्रेम-BHU से पढ़ाई-गुप्तचर का आरोप...! जानिए कौन हैं क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की, जिन्हें भारत से है गहरा लगाव?

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की एक प्रसिद्ध पोलिश विद्वान, इंडोलॉजिस्ट (भारतविद्) हैं और साथ ही वो 1993 से 1996 तक भारत में पोलैंड के राजदूत के रूप में कार्यरत रहे। उन्हें भारत की संस्कृति, संस्कृत साहित्य और प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र के क्षेत्र में उनके गहन योगदान के लिए जाना जाता है।

Author : Mayank Kumar

Summary

  • पोलैंड के विद्वान मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की भारत-प्रेमी इंडोलॉजिस्ट रहे और 1993–96 में भारत में पोलैंड के राजदूत रहे।

  • उन्होंने हिंदी, संस्कृत, भारतीय संस्कृति और नाट्यशास्त्र पर गहन कार्य किया तथा संस्कृत ग्रंथों का पॉलिश में अनुवाद किया।

  • भारत से उनके योगदान और लगाव के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया

कहते हैं, जो भारत में आता है, वो यहाँ का ही होकर रह जाता है। पारसी समुदाय को ही ले लीजिये, जिनके बारे में ये कहा जाता है कि वो ईरान से जब भारत आए, तो वहां के राजा जादी राणा ने उन्हें यह दिखाने के लिए दूध से भरा पात्र दिया कि राज्य पहले से भरा हुआ है। आप यहाँ कैसे रह सकते हैं? इसके बाद पारसी नेता ने उसमें चीनी घोल दी, यह दिखाने के लिए कि वे समाज में घुल-मिलकर रहेंगे और उसे बेहतर बनाएँगे।

हम इस कहानी का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज के समय में जहाँ हम छोटी-छोटी बातों को लेकर लड़ते हैं, हिंदी को लेकर एक दूसरे का मजाक बनाते हैं, तो वहीं, दूसरी ओर जो विदेशी लोग हैं, भारतीय संस्कृति और यहाँ की भाषा हिंदी के कायल हैं। इन्हीं में से एक हैं मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski), जो पोलैंड के रहने वाले हैं।

बायर्स्की एक प्रसिद्ध पोलिश विद्वान, इंडोलॉजिस्ट (भारतविद्) हैं और साथ ही वो 1993 से 1996 तक भारत में पोलैंड के राजदूत (Ambassador) के रूप में कार्यरत रहे। उन्हें भारत की संस्कृति, संस्कृत साहित्य और प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र के क्षेत्र में उनके गहन योगदान के लिए जाना जाता है। सबसे खास बात यह है कि उन्हें भारत और यहाँ की भाषा हिंदी से बहुत प्रेम है। उनका एक इंटरव्यू भी हैं, जिसमें उन्होंने हिंदुस्तान की खूबसूरती बताई है। आइये इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

भारत के पारिवारिक जीवन से प्रभावित हुए बायर्स्की

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) का एक इंटरव्यू है, जो संसद टीवी द्वारा लिया गया है। ये इंटरव्यू 28 अप्रैल 2014 को सामने आया था। बायर्स्की करीब 10 साल से ज्यादा भारत में रहे। करीब 6-7 साल उन्होंने बतौर छात्र बिताया जबकि 3 साल भारत में वो पोलैंड के राजदूत के तौर पर रहे। जब उनसे इंटरव्यू में यह सवाल हुआ कि भारत में बिताए गए दिनों को वो कैसे देखते हैं, तो बायर्स्की ने भारत के पारिवारिक जीवन की काफी तारीफ की। उनसे भारत के लोगों की चुनौतियों को लेकर भी सवाल हुआ था। इसपर भी उन्होंने अपनी राय रखी।

बायर्स्की ने कहा कि मुसीबत हर जगह होती है। गरीबी हर जगह होती है। हमारे यहाँ पोलैंड में ठंड काफी होती है, इसलिए यह छिपा हुआ है जबकि गरम देश में गरीबी सड़कों पर दिख जाती है। हालांकि, मैंने जो गरीब लोग हैं, उनके चेहरे पर मुस्कराहट काफी देखी है जबकि पोलैंड में अमीर काफी दुखी रहते हैं।

उन्होंने पारिवारिक जीवन पर बात करते हुए कहा कि परिवार बहुत जरूरी है। हिन्दू-मुसलमान दोनों के लिए भारत में परिवार बहुत जरूरी है। हमारे यहाँ पोलैंड में परिवार क्षीण हो जाता है अर्थात अलग-थलग हो जाते हैं। बच्चे अपना अलग-अलग परिवार बना लेते हैं। बुजुर्गों से नाता तोड़ लेते हैं। बहुत कम मेलमिलाप रखते हैं। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि जैसा हमारे यहाँ होता है, वो भारत में हो, क्योंकि परिवार आपके साथ हमेशा खड़ा रहता है।

बायर्स्की ने हिंदी क्यों सीखी?

इस इंटरव्यू में मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) ने यह भी बताया कि उन्होंने हिंदी क्यों सीखी? बायर्स्की कहते हैं कि उनकी शिक्षा-दीक्षा सब भारत में हुई। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उन्होंने पढ़ाई की। हिंदी का व्याकरण उन्होंने यहाँ आकर सीखा। धाराप्रवाह बोल नहीं सकता लेकिन हिंदी मेरे लिए एक खुली किताब की तरह थी। इसलिए मैं यह भाषा बहुत जल्दी सीख गया।

उन्होंने आगे कहा कि मेरी मां ने बोला कि अंग्रेजी सब जानते हैं और तुम्हें आनी भी चाहिए लेकिन कुछ ऐसी भाषा सीखो जो पोलैंड में कोई नहीं जानता है। मेरी मां कहती थी कि जब वो जवान थीं, तब उनका मन भारत आने का था। वो यहाँ आकर पढ़ना भी चाहती थी। इसलिए माँ की बात मैंने मानी।

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि उन्होंने भारत के बारे में बहुत कुछ सीखा और खुद को भाग्यवान भी समझता हूँ।

बायर्स्की पर लगा गुप्तचर का लगा आरोप!

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) ने इंटरव्यू के दौरान यह भी खुलासा किया कि एक समय यही भी आया था, उन्हें गुप्तचर कहा जाने लगा था। ये घटना उनके साथ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई थी। हालांकि, उनके दोस्तों ने उनका यह मजाक बनाया था, कोई गंभीर बात नहीं थी।

इसके बारे में याद करते हुए बायर्स्की ने बताया कि उन्हें संगीत सुनने का बड़ा शौक था। वो दोस्तों के साथ अपना समय काफी बिताते थे। सांस्कृतिक दृष्टि से उन्हें भारत में कभी कोई कमी महसूस नहीं हुई। उन्होंने खुद को कभी एक परदेशी नहीं माना।

वो कहते हैं कि एक बार मैं दोस्तों के साथ धूप खाने निकला था। तो एक मेरे एक दोस्त ने बोला कि लगता नहीं है कि बायर्स्की कोई परदेशी है। इसके दो कारण हो सकते हैं। या तो ये एक गुप्तचर है या इसका पूर्व जन्म भारत में हुआ था। इस मजाक का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मै कोई गुप्तचर नहीं हूँ लेकिन हाँ मेरा पूर्व जन्म जरूर हिंदुस्तान में हुआ होगा।

हिंदी में कैसे बात करते हैं बायर्स्की?

अमूमन यह देखा जाता है कि जब आप कोई नई भाषा सीखते हैं, तो पहले आप उसे अपनी मातृभाषा में सोचते हैं, फिर उसका दिमाग में अनुवाद कर बोलने की कोशिश करते हैं। कुछ ऐसा ही सवाल मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) से हुआ कि वो हिंदी में बात कैसे करते हैं? क्या वो पहले पोलैंड में सोचते हैं और फिर हिंदी में बात करते हैं।

इसपर उन्होंने कहा कि अधिकांश तो मैं पॉलिश भाषा में सोचता हूँ लेकिन जब बात हिंदी में करता हूँ, तो मैं हिंदी में ही सोचता हूँ। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राचीन ऋषियों की बात पहले होती है और विचार बाद में निकलता है लेकिन कभी ऐसा होता है कि अर्थ पहले निकलते हैं और बात पहले आती है। इस प्रश्न का जवाब मुश्किल तो बहुत है।

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) का कहने का मतलब साफ़ था, ये स्थति पर निर्भर करता है कि आप किस तरीके से बात करना चाहते हैं।

भारतीय अपनी संस्कृति भूल रहे हैं

मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) ने इस इंटरव्यू के दौरान भारत की सभ्यता पर भी बात की और चिंता भी ज़ाहिर की, कि हिंदुस्तान के लोग अपनी सभ्यता को भूलते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता किस ओर जा रही है, ये मुझे कहने का हक़ नहीं है लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि तकनीकी सभ्यता बहुत ही ज्यादा रुचिकार है और इसके कारण लोग अपनी सभ्यता को भूलते जा रहे हैं। तकनीकी बहुत ज्यादा जरूरी नहीं है, इसलिए प्रकृति के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए। अगर आप लोग भारतीय सभ्यता को बचा लेते हैं, तो ये हमारे (यूरोप) लिए भी एक सीख होगी।

बता दें कि अंत में उन्होंने यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच भी तनाव कम होना चाहिए।

कौन हैं मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की?

12 जनवरी 1937 को पोलैंड के विल्नियस (Vilnius) में मारिया क्रिज़्स्तोफ़ बायर्स्की (Maria Krzysztof Byrski) का जन्म हुआ था। हाल ही में उन्होंने अपना 86 वां जन्मदिन भी मनाया। वो भारत में करीब 6 साल रहे और बनारस हिंदी विश्वविद्यालय में भारतीय इतिहास, संस्कृति और संस्कृत पर अध्यन किया और 1966 में अपनी पीएचडी (Phd) भी पूरी की। वहीं, 1993 से 1996 के बीच दिल्ली में वो पोलैंड के राजदूत के रूप में काम भी किये। करीब 9 से 10 साल उन्होंने भारत की धरती पर बिताए।

बता दें कि बायर्स्की को नाट्यशास्त्र की दुनिया का विशेषज्ञ माना जाता है। उनकी किताब 'Concept of Ancient Indian Theatre' एक प्रामाणिक ग्रन्थ मानी जाती है। उन्होंने कई भारत की संस्कृत की किताबों का पॉलिश भाषा में अनुवाद किया, ताकि यूरोप के लोग भारतीय संस्कृति को जान पाएं। उनकी इन उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 25 जनवरी 2025 को पद्मश्री देने की घोषणा की गई। 28 मार्च 2022 को राष्ट्रपति राम नाथकोविंद द्वारा उन्हें इस महान उपलब्धि से नवाजा गया।