कैलाश विजयवर्गीय के 5 बड़े विवाद  X
राष्ट्रीय

'महिलाओं को सूर्पनखा, तो शत्रुघन सिन्हा को कुत्ता...', कैलाश विजयवर्गीय के 5 बड़े विवाद जिन पर मचा सियासी बवाल

कैलाश विजयवर्गीय पहली बार किसी विवाद में नहीं पड़े हैं। उनका विवादों से गहरा नाता है। आज हम आपको उनके 5 ऐसे विवादों के बारे में बटेंगे जिनपर सियासी बवाल मच गया था।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

Summary

  • विवादित बयानों के कारण बार-बार सुर्खियों में रहे कैलाश विजयवर्गीय।

  • महिलाओं और विपक्षी नेताओं पर टिप्पणियों से सियासी बवाल।

  • संवेदनशील मुद्दों पर बयान देकर आलोचनाओं में घिरे।

साल 2005 में एक फिल्म आई थी सरकार। उस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक बहुत ताक़तवर राजनीतिक/सामाजिक नेता का किरदार निभाते हैं। उनका एक मशहूर डायलॉग भी है, "मुझे जो सही लगता है, वो मै करता हूँ।" ये डायलॉग कहीं ना कहीं असल ज़िन्दगी में कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) की राजनीति में दिखती है।

हाल ही में उनका एक विवाद देखने को मिला जहाँ वो NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि फोकट के सवाल मत करो। पत्रकार को उन्होंने घंटा तक कह दिया। हालांकि, ये पहली बार नहीं है कि कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) किसी विवाद में पड़े हैं। उनका विवादों से गहरा नाता है।

ऐसे में आज हम आपको कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) के 5 ऐसे विवादों के बारे में बताएंगे जिनपर सियासी बवाल मच गया था।

प्रियंका गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी

मामला 2019 का है जब कांग्रेस ने प्रियंका गाँधी वाड्रा को महासचिव बनाया था। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने उनपर भद्दी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के पास कोई सही नेतृत्व नहीं है, इसलिए वह चॉकलेटी फेस (chocolaty face) का सहारा ले रही है। उनका इशारा प्रियंका की राजनीतिक एंट्री की ओर था।

विजयवर्गीय ने इसे कांग्रेस की आत्म-अविश्वास की निशानी बताया था। उस समय कांग्रेस ने इस तरह की आलोचनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय संगठनात्मक रणनीति और विपक्षी एकता पर ज़ोर दिया, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने का मौका मान रही थी।

हालांकि, पार्टी की तरफ से सज्जन कुमार वर्मा ने भाजपा नेता के टिप्पणी की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि मानव को भगवान की रचना माना जाता है, इसलिए किसी की सूरत पर तंज करना ठीक नहीं और इससे भाजपा का सम्मान कम होता है।

अग्निवीर पर विवादित बयान

ये मामला 2022 का है, जब कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने अग्निवीर पर विवादित बयान दिया था। अग्निवीर केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत सेना में महज 4 साल के लिए ही भर्ती होती है। इसको लेकर विपक्ष की ओर से काफी विवाद हो रहा था, तब विजयवर्गीय ने विवादित टिप्पणी की थीं।

उन्होंने कहा था कि अग्निवीरों को बीजेपी कार्यालय में सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने इंदौर में कहा कि जब कोई अग्निवीर चार साल की सेवा पूरी कर निकलता है, तो वह ₹11 लाख और अग्निवीर टैग लेकर आता है, इसलिए अगर उन्हें अपनी पार्टी कार्यालय में सुरक्षा रखना हो तो वे इन्हें प्राथमिकता देंगे।

इस बयान के बाद उनकी काफी किरकिरी हुई थी। विपक्षी पार्टियों ने इसे सेन्याओं और अग्निवीरों का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रामेश ने तंज कसा कि इससे स्पष्ट हो गया कि 2019 के “मैं भी चौकीदार” अभियान का अर्थ क्या था।

वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के युवा सेना में शामिल होने के लिए निरंतर और सम्मान के साथ सेवा करना चाहते हैं, न कि बीजेपी कार्यालयों के बाहर सुरक्षा देना चाहते हैं। उन्होंने इसे युवाओं और सेना के प्रति अनादर बताया। कांग्रेस की ओर से हनुमंत राव ने हैदराबाद में विजयवर्गीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, यह कहते हुए कि उनका बयान भारतीय सेना और जवानों के सम्मान के खिलाफ था।

जब विवाद बढ़ा, तो कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने सफ़ाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शब्दों को “टूलकिट गैंग” ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया है और वह केवल यह कहना चाहते थे कि अग्निवीरों द्वारा प्राप्त अनुशासन और कौशल का उपयोग सेवा के बाद भी किसी सकारात्मक भूमिका में किया जा सकता है।

शत्रुघन सिन्हा की कुत्ते से तुलना

ये मामला 2015 का जब बिहार में विधानसभा के चुनाव के नतीजे आए थे। शत्रुघन सिन्हा चुनाव के नतीजों पर अपनी राय दे रहे थे। इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने उनकी तुलना कुत्ते से की थी। इस विवाद की शुरुआत इसलिए हुई थी क्योंकि सिन्हा का कहना था कि अगर बीजेपी ने उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार बनाया होता, तो एनडीए की करारी हार कुछ कम होती।

इसी पर विजयवर्गीय से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, तो उन्होंने कहा, “जब एक कार चलती है, तो उसके नीचे चलने वाला कुत्ता यह सोचता है कि कार उसकी वजह से चल रही है; इसी तरह कुछ लोग पार्टी में अपनी महत्ता का गलत आभास रखते हैं।”

बयान तेजी से विवादित हो गया और राजनीति में इसकी निंदा हुई। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे सार्वजनिक रूप से आलोचना की, और पूछे कि क्या ऐसे अपमानजनक बयान देने की जिम्मेदारी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ही दी है। शाह उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

बता दें कि उस समय विजयवर्गीय का कुत्ते वाला बयान राजनीतिक बयानबाज़ी की एक उदाहरण के रूप में देखा गया, जिस पर अलग‑अलग दलों ने प्रतिक्रिया दी और बहस हुई।

ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेटर्स पर की भद्दी टिप्पणी

ये मामला ज्यादा पुराना नहीं है। 23 अक्टूबर 2025 की घटना है। हुआ ये था कि भारत में महिला वर्ल्ड कप खेला जा रहा था, इस दौरान मध्य प्रदेश के इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। इस घटना ने न सिर्फ महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए बल्कि राजनीतिक विवाद भी पैदा कर दिया। 23 अक्टूबर 2025 को ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के दौरान इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ियों के साथ मॉल रोड/खजराना क्षेत्र में एक बाइक सवार द्वारा छेड़छाड़ की गई। पुलिस ने आरोपी अक़ील को कार्रवाई करते हुए तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

इस पर जब कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि ह घटना खिलाड़ियों और पुलिस दोनों के लिए एक सबक है। उन्होंने सुझाव दिया कि खिलाड़ियों को स्थानीय प्रशासन या सुरक्षा को पहले से सूचित करना चाहिए जब वे होटल से बाहर निकलते हैं, क्योंकि भारतीय जनता में क्रिकेटरों की भारी भीड़ और लोकप्रियता होती है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपनी लोकप्रियता का आभास नहीं करते और इससे सावधान रहना चाहिए।

उनके इस बयान की विपक्षी दल, महिला अधिकार समूह और जनता ने तीखी आलोचना की थी। कांग्रेस नेताओं ने इसे “बेहद निराशाजनक और प्रतिक्रियावादी” बताया, यह कहकर कि मंत्री ने पीड़ितों को दोषी ठहराया बजाय कि सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

महिलाओं की तुलना शूर्पणखा से की

ये मामला 8 अप्रैल 2023 का है जब कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने महिलाओं पर विवादित बयान दे दिया था। उन्होंने लड़कियों के कपड़ों को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जो लड़कियां खबर कपड़े पहनती हैं, वो रामायण के राक्षसी पात्र “शूर्पणखा” जैसी दिखती हैं, न कि देवी जैसी। उनका यह बयान महावीर जयंती के एक कार्यक्रम के दौरान इंदौर में आया था।

उन्होंने कहा था कि महिलाओं को देवी जैसा माना जाता है, लेकिन जिस तरह कुछ युवतियाँ कपड़े पहनती हैं, वो उनकी छवि से मेल नहीं खातीं और उन्हें “शूर्पणखा” जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे रात में बाहर जाते हैं तो कुछ युवा नशीले पदार्थों के प्रभाव में दिखाई देते हैं, और यह सब संस्कृति और आदर्शों के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे स्त्री‑विरोधी टिप्पणी करार दिया। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की नेता ने कहा कि यह बयान हर महिला का अपमान है और यह दिखाता है कि कुछ नेताओं के पास महिलाओं के प्रति आदर और संवेदनशीलता की कमी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार अब तय करेगी कि महिलाओं क्या पहनना चाहिए, क्या खाना चाहिए और किससे मिलना चाहिए?

त्रिपुरा की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इसे बीजेपी की “ख़राब सोच” बताया था और कहा था कि ऐसे विरोधाभासी बयान यह दर्शाते हैं कि देश पीछे की ओर चल रहा है, जहाँ महिलाओं को कपड़ों के कारण दोषी ठहराया जाता है। बता दे कि इस टिप्पणी को लेकर सामाजिक मीडिया में भी तीखी आलोचना हुई थी।