यमुना साफ़ करने के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने मांगा एक दशक से ज्यादा का समय। Prime Minister's Office, GODL-India, via Wikimedia Commons
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दिल्ली वालों के साथ BJP ने की चीटिंग! यमुना साफ़ करने के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने मांगा एक दशक से ज्यादा का समय

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना को पूरी तरह साफ करने में एक दशक से भी ज्यादा समय लग सकता है। इस बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

Author : Preeti Ojha
  • यमुना की सफाई का वादा कर चुनाव लड़ने वाली BJP अब सत्ता में आते ही लंबा समय मांगती नजर आ रही है।

  • दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक दशक वाले बयान पर विपक्ष ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक नालों और सीवेज का पानी पूरी तरह ट्रीट नहीं होगा, यमुना दिल्ली में साफ नहीं हो सकती।

यमुना नदी की गंदगी कोई नई या अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। दिल्ली में यमुना पिछले कई दशकों से प्रदूषण का शिकार रही है, लेकिन बीते 20–25 वर्षों में हालात लगातार बिगड़ते चले गए। बढ़ती आबादी, अनियंत्रित शहरीकरण और कमजोर सीवेज व्यवस्था ने नदी को नाले में बदल दिया। इसके बावजूद हर चुनाव में यमुना की सफाई एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाती है।

भारतीय जनता पार्टी ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यमुना को साफ करने का वादा करके जनता से वोट मांगे थे। चुनाव प्रचार में कहा गया कि सत्ता में आते ही यमुना की स्थिति सुधारी जाएगी और नदी को साफ किया जाएगा। पोस्टर, भाषण और घोषणापत्रों में यमुना की सफाई को प्राथमिकता के तौर पर पेश किया गया, जिससे लोगों में उम्मीद जगी कि इस बार हालात बदलेंगे।

सत्ता में आते ही बदला सुर, एक दशक का समय मांगा

चुनाव के बाद जब भाजपा की सरकार बनी, तो दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान सामने आया, जिसने नई बहस को जन्म दे दिया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना को पूरी तरह साफ करने में एक दशक से भी ज्यादा समय लग सकता है। इस बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का कहना है कि चुनाव से पहले जनता को जल्द बदलाव का सपना दिखाया गया, लेकिन अब वही सरकार लंबा समय मांग रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह अपने वादों से पीछे हटने जैसा है। AAP नेताओं ने कहा कि अगर सफाई में इतना ही लंबा समय लगना था, तो चुनाव के दौरान बड़े-बड़े दावे क्यों किए गए? कांग्रेस ने भी सवाल उठाया कि भाजपा अब वही बातें कह रही है, जिन पर वह पहले की सरकारों को घेरती थी।

AAP सरकार के दौर में क्या बदला, क्या नहीं

यह भी सच है कि आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में यमुना पूरी तरह साफ नहीं हो पाई। AAP सरकार के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बढ़ाने, नालों को टैप करने और यमुना एक्शन प्लान जैसे कदम उठाने की बातें कही गईं। कुछ जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार भी हुआ, लेकिन जमीन पर नतीजे सीमित रहे।

यमुना का पानी कई इलाकों में नहाने या छूने लायक भी नहीं रहा। विपक्ष उस समय AAP सरकार से लगातार सवाल करता रहा कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद नदी साफ क्यों नहीं हुई। अब वही तर्क भाजपा सरकार दे रही है कि समस्या पुरानी और जटिल है और इसे रातों-रात हल नहीं किया जा सकता।

दिल्ली में यमुना आखिर गंदी क्यों हो जाती है?

दिल्ली में यमुना के प्रदूषित होने की सबसे बड़ी वजह सीवेज और बिना ट्रीटमेंट के छोड़ा जाने वाला नालों का पानी है। राजधानी के दर्जनों बड़े और सैकड़ों छोटे नाले सीधे यमुना में गिरते हैं। कई इलाकों में आज भी पूरा सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम मौजूद नहीं है।

इसके अलावा औद्योगिक कचरा, अवैध कॉलोनियां, धार्मिक गतिविधियों के बाद छोड़ा गया कचरा और प्रशासनिक लापरवाही भी नदी को नुकसान पहुंचाती है। जब तक हर नाले का पानी पूरी तरह ट्रीट होकर यमुना में नहीं जाएगा और निगरानी सख्त नहीं होगी, तब तक यमुना की हालत सुधरना मुश्किल है। साफ शब्दों में कहें तो यमुना की सफाई सिर्फ एक सरकार या एक कार्यकाल की नहीं, बल्कि लगातार और ईमानदार प्रयास की मांग करती है।

यमुना नदी दिल्ली में 1980 के दशक से गंभीर रूप से खराब होना शुरू हुई। 1990 के बाद आई इसकी हालत ख़राब होनी शुरू हुई, जब दिल्ली की आबादी तेज़ी से बढ़ी, लेकिन सीवर और ट्रीटमेंट सिस्टम उतने नहीं बढ़े और 2000 के बाद यमुना दिल्ली में लगभग नाले जैसी बनती चली गई। आज दिल्ली की यमुना करीब 80% प्रदूषित है। कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी इसके लिए एक दूसरे पर सिर्फ आरोप लगाते रहे हैं लेकिन इसे साफ़ करने की कोशिश किसी ने नहीं की। खासकर तब जब पिछले 10 साल से बीजेपी ही केंद्र में है, और अब तो दिल्ली के साथ MCD में भी नरेंद्र मोदी की ही सरकार है। दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए ₹250 करोड़ बजट रखा है, और एक साल सत्ता संभालते होने जा रहे हैं, लेकिन हालात ज्यों के त्यों हैं। आज भी झाग वाली समस्या सुनने को मिलती ही है।

(PO)