माही (M.S Dhoni) के शांत सोच, मजबूत नेतृत्व और बेमिसाल फिनिशिंग स्टाइल के लिए भारत के करोड़ो फैंस ने उन्हें ‘कैप्टन कूल’ नाम दिया।  [Wikimedia Commons]
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'कैप्टन कूल' सिर्फ नाम नहीं, अब बनने जा रहा है ब्रांड!

जब कोई सुपरस्टार अपने फैंस की दी हुई पहचान को इतनी गंभीरता से स्वीकार करता है, तो वो सिर्फ खिलाड़ी नहीं, दिलों का राजा बन जाता है। अब "कैप्टन कूल"('Captain Cool') ना सिर्फ दिलों में रहेगा, बल्कि बिज़नेस और ब्रांड की दुनिया में भी एक चमकता नाम होगा और यह कदम धोनी को एक बार फिर बना देता है, "मास्टर ऑफ द फिनिश!”

Author : Sarita Prasad

महेंद्र सिंह धोनी या माही (M.S Dhoni) आज क्रिकेट जगत में एक ऐसा नाम है जिनकी क्रिकेट खेलने की स्टाइल, शांत स्वभाव और कैप्टेंसी के सभी दीवाने हैं। माही के शांत सोच, मजबूत नेतृत्व और बेमिसाल फिनिशिंग स्टाइल के लिए भारत के करोड़ो फैंस ने उन्हें ‘कैप्टन कूल’ ('Captain Cool') नाम दिया। सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि माही अब अपने फैंस के द्वारा प्यार से दिए इस नाम को ब्रांड बनाने जा रहें हैं। जी हां! महेंद्र सिंह धोनी ने कैप्टन कूल ('Captain Cool') नाम को ब्रांड बनाने का ठान लिया है और इसके लिए ट्रेडमार्क अप्लाई कर दिया है। यह सिर्फ एक ट्रेडमार्क नहीं, बल्कि उस इमोशनल बॉन्ड का प्रमाण है जो धोनी और उनके फैंस के बीच बना है। जब कोई सुपरस्टार अपने फैंस की दी हुई पहचान को इतनी गंभीरता से स्वीकार करता है, तो वो सिर्फ खिलाड़ी नहीं, दिलों का राजा बन जाता है। अब "कैप्टन कूल" ना सिर्फ दिलों में रहेगा, बल्कि बिज़नेस और ब्रांड की दुनिया में भी एक चमकता नाम होगा और यह कदम धोनी को एक बार फिर बना देता है, "मास्टर ऑफ द फिनिश!”

क्या होता है ट्रेडमार्क?

ट्रेडमार्क एक प्रतीक यानी सिंबल होता हैं जो किसी कंपनी की पहचान होती है और इसी के ज़रिए वह दूसरे वस्तुओं से अलग दिखती है। उदाहरण के तौर पर समझ सकतें हैं कि जैसे कोका कोला एक कोल्ड ड्रिंक ब्रांड है और बाज़ार में कोका कोला के अलावा भी कंपनी है जो कोल्ड ड्रिंक बेचती है, लेकिन कोका कोला को हम बाकी से अलग देख सकतें है। कुछ इसी प्रकार से माही ने कैप्टन कूल नाम के लिए ट्रेडमार्क अप्लाई किया है और यदि यह एप्लीकेशन स्वीकार कर लिया जाता है तो इस नाम को धोनी के अलावा और कोई भी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। आपको बता दें कि यह ट्रेडमार्क मुख्य रूप से खेल प्रशिक्षण, खेल से जुड़ी सुविधाएं और कोचिंग सेवाओं से संबंधित वर्ग में रजिस्टर्ड कराया गया है। यानी इसकी संभावना अधिक है कि इस नाम का इस्तेमाल क्रिकेट इंस्टीट्यूट्स के लिए किया जाएगा।

एक छोटे से शहर से आने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने कभी नहीं सोचा था कि क्रिकेट उनके जीवन में एक नई कहानी लिख सकता है।

महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट जर्नी

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड में हुआ था। एक छोटे से शहर से आने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने कभी नहीं सोचा था कि क्रिकेट उनके जीवन में एक नई कहानी लिख सकता है। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में एक फुटबॉल गोलकीपर के रूप में स्पोर्ट्स में एंट्री मारी थी, लेकिन उनके कोच ने जब उनका जज्बा देखा तो उन्होंने धोनी को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया और धीरे-धीरे क्रिकेट धोनी की जिंदगी बन गया।

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महेंद्र सिंह धोनी ने टीटीई की नौकरी भी की है लेकिन उनके क्रिकेट का सपना और उनकी रुचि ने उन्हें क्रिकेट की तरफ मोड़ दिया। भारतीय क्रिकेट टीम में 2004 में महेंद्र सिंह धोनी ने एंट्री ली और इसके बाद जैसे उनकी जिंदगी ही बदल गई। उनकी आक्रामक बैटिंग, लंबे छक्के और आत्मविश्वास ने सबको चौंका दिया। 2007 में भारतीय क्रिकेट टीम का T20 वर्ल्ड कप हारने के बाद जब टीम को दोबारा से बनाया जा रहा था तब महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान चुना गया। उसी साल उन्होंने भारत को पहला टी20 वर्ल्ड कप जिताया। इसके बाद 2011 में वनखेड़े स्टेडियम में उनका छक्का भारत को वनडे वर्ल्ड कप ( World Cup) जिताने का ऐतिहासिक पल बन गया। धोनी की कप्तानी में भारत ने ICC की तीनों बड़ी ट्रॉफियां – T20 WC, ODI WC और Champions Trophy जीतीं। उनकी निर्णय लेने की क्षमता, खिलाड़ियों पर विश्वास, और संकट की घड़ी में शांत रहने की आदत ने उन्हें नायक बना दिया।

धोनी की कप्तानी में भारत ने ICC की तीनों बड़ी ट्रॉफियां – T20 WC, ODI WC और Champions Trophy जीतीं।

कैप्टन कूल नाम के पीछे छिपी है यह कहानी

धोनी के फैंस उन्हें प्यार से कैप्टन कूल ('Captain Cool') बुलाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैप्टन कूल बुलाने के पीछे एक कहानी छुपी है। 2016 के T20 वर्ल्ड कप के दौरान जब भारत को बांग्लादेश से जीत हासिल करने के लिए सिर्फ एक विकेट चाहिए थी उस वक्त जब पूरा स्टेडियम सभी खिलाड़ी काफी दबाव में थे तब महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी सूझबूझ और शांति दिमाग से तिगड़म लगाकर भारत को जीत दिलाई।आखिरी गेंद पर खुद विकेटकीपर की जगह दौड़कर रन आउट किया और भारत को जीत दिला दी। उन्होंने न तो विकेट के पीछे चिल्लाया, न कोई पैनिक दिखाया बस शांति से प्लान बनाया और उसे अंजाम दिया।उन्होंने कभी भी मैदान पर गुस्सा या तनाव जाहिर नहीं किया चाहे स्थिति कितनी भी गंभीर क्यों न हो। उनके चेहरे की शांत मुस्कान, मैदान पर चुपचाप सोचता हुआ दिमाग और आखिरी ओवर में भी बिना घबराए फैसला लेना, यही उनकी पहचान बन गया। [Rh/SP]