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निर्भया कांड को हुए 8 साल पर क्या दिल्ली में कोई बदलाव आया? पढ़िए यह रिपोर्ट

निर्भया के साथ नृशंस सामूहिक दुष्कर्म और हत्या को आठ साल बीत चुके हैं, चार युवकों को फांसी भी दी जा चुकी है। मगर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल अब भी वहीं का वहीं हैं।

आज भी महिलाओं की सुरक्षा दिल्ली में चिंता का विषय है। (सांकेतिक चित्र)

निर्भया के साथ नृशंस सामूहिक दुष्कर्म और हत्या को आठ साल बीत चुके हैं, चार युवकों को फांसी दी जा चुकी है, फिर भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में कमी नहीं आ रही है।

राष्ट्रीय राजधानी में इस साल अक्टूबर तक दुष्कर्म के 1,429 मामले सामने आए हैं। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में दुष्कर्म के 1,884 मामले सामने आए थे, जो साल खत्म होने तक बढ़कर 2,168 मामले हो गए। 2012 में कुल 706 रेप केस दर्ज किए गए थे, जिसमें 16 दिसंबर को निर्भया के साथ नृशंस गैंगरेप भी शामिल था।


दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक महिलाओं पर हमले के कुल 1,791 मामले दर्ज किए। इसकी तुलना में 2019 में इसी अवधि के दौरान 2520 मामले दर्ज किए गए, जो साल के अंत तक बढ़कर 2,921 हो गए। 2012 में इसी अपराध के लिए कुल 727 मामले दर्ज किए गए थे।

2019 में इसी अवधि में 2,988 सूचित आंकड़ों के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक कुल 2,226 महिलाओं का अपहरण किया गया था। 2019 के अंत तक दिल्ली में महिलाओं के अपहरण के 3,471 मामले सामने आए। 2012 में महिलाओं के अपहरण के कुल 2,048 मामले दर्ज किए गए थे।

यह भी पढ़ें – महिलाओं का गहना अब कमजोरी नहीं, हथियार बनेगा

दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक आईपीसी की धारा 498-ए/406 के तहत 1,931 मामले दर्ज किए। पिछले साल इसी अवधि के दौरान कुल 3,052 मामले दर्ज किए गए थे, जो साल खत्म होने के समय तक बढ़कर 3,792 हो गए। 2012 में दिल्ली पुलिस ने महिलाओं के पति और ससुराल वालों के खिलाफ 2,046 मामले दर्ज किए थे।

दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक दहेज हत्या के 94 मामले भी दर्ज किए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसी प्रकृति के 103 मामले दर्ज हो रहे हैं। साल 2012 में दिल्ली पुलिस ने दहेज हत्या के कुल 134 मामले दर्ज किए थे। (आईएएनएस)

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बिहार के 11 जिलों में 60 फीसदी से ज्यादा लोग है गरीब! सांकेतिक चित्र, (Wikimedia Commons)

नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक(Multidimensional Poverty Index) की ताजा रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार(Bihar) के पांच जिलों में 60 फीसदी लोग अमीर वर्ग के हैं, जबकि 11 जिलों में 60 फीसदी से ज्यादा लोग गरीब वर्ग के हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट से पता चला है कि बिहार के 38 जिलों में से किशनगंज सबसे गरीब जिला है।

रिपोर्ट की माने तो, सीमांचल क्षेत्र के अल्पसंख्यक बहुल किशनगंज जिले में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले 64.75 प्रतिशत लोग हैं, इसके बाद अररिया (64.65 प्रतिशत), मधेपुरा जिला (64.43 प्रतिशत), पूर्वी चंपारण (64.13 प्रतिशत), सुपौल (64.10 प्रतिशत), जमुई (64.01 प्रतिशत), सीतामढ़ी (63.46 प्रतिशत), पूर्णिया (63.29 प्रतिशत), कटिहार (62.80 प्रतिशत), सहरसा (61.48 प्रतिशत) और शिवहर (60.30 प्रतिशत) से हैं। इस बीच, जिन जिलों में 50 फीसदी लोग गरीब श्रेणी में आते हैं, उनमें मुंगेर (40.99 फीसदी), रोहतास (40.75 फीसदी), सीवान (40.55 फीसदी) और भोजपुर (40.50 फीसदी) शामिल हैं।

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26/11 आतंकी हमले की तस्वीर (Twitter)

मुंबई में हुए 26/11 हमले को एक दशक बीत चुका है। लेकिन जैसे जैसे समय आगे बढ़ रहा है उसी तरीके 26/11 हमले के समय होने वाली घटना भी उजागर हो रही है। इसी तरह अबकी बार एक ऐसा खुलासा किया गया है जो तात्कालिक मनमोहन सिंह सरकार पर कई प्रश्न खड़े कर रहा है? यह खुलासा आर.एस.एन. सिंह द्वारा किया गया है। सिंह एक पूर्व सैन्य खुफिया अधिकारी हैं, जिन्होंने बाद में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में काम किया।

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