Saturday, May 15, 2021
Home राजनीति क्या आदिवासी हिन्दू नहीं?

क्या आदिवासी हिन्दू नहीं?

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हारवर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए नए विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने झारखंड के आदिवासियों को हिन्दू नहीं माना है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन(Hemant Soren) ने हारवर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए नए विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने झारखंड(Jharkhand) के आदिवासियों को हिन्दू नहीं माना है। उन्होंने ने कहा कि आदिवासी न कभी हिन्दू थे और न होंगे। इस बयान को भाजपा की विचारधारा पर कटाक्ष माना जा रहा है। किन्तु क्या है असल मामला? क्या आदिवासी हिन्दू नहीं है? या सोरेन अपनी राजनीति को और चमकाने के लिए यह बयान दिया है?

आपको ज्ञात होगा कि भारतीय सनातन संस्कृति को पालन और उस पर अमल करने वाला हिन्दू कहलाता है। झारखंड(Jharkhand) के भी आदिवासी वह सभी रीति-रिवाज़ों का पालन करते हैं जो कहीं न कहीं हिन्दू धर्म(Hindu Dharma) से मेल खाता है। वह प्रकृति को अपना संरक्षक एवं उसी को देवता मानते हैं, जिसे हिन्दू संस्कृति में भी देखा जा सकता है। जिसका साक्ष्य है वेदों में संरचित यह श्लोक:

“यत्ते भूमे विखनामि क्षिप्रं तदपि रोहतु। मां ते मर्म विमृग्वरी या ते हृदयमर्पितम।।”

इस श्लोक का भाव यह है कि “हे पृथ्वी माँ! मैं जिस प्रकार भी आपको क्षति या हानि पहुंचाता हूँ, वह जल्द से जल्द ठीक हो जाए।”

वेद आदिवासी Veda Hindu and Adivasi

आदि एवं वासी: ‘आदिवासी’ यह शब्द का अर्थ है कि एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाली निवासी जिनका उस क्षेत्र से संबंध प्राचीन काल से रहा हो। यदि इस अर्थ को मान लिया जाए तो यह भी सोचने की जरूरत है कि भारत वर्ष हिन्दू राष्ट्र था, जिसका मतलब यहाँ के सभी निवासी हिन्दू थे। तब इन आदिवासियों को क्यों अलग धर्म का बताया जा रहा है?

यह भी पढ़ें: क्या है मान्यता है हिन्दू धर्म में पहनावे की?

अब जब आदिवासी एवं उनके हिन्दू होने का मुद्दा उठा ही है, तो यह मुद्दा भी उठना चाहिए कि देश के कई भागों में मिशनरी घूम-घूम कर इन आदिवासियों और पिछड़े वर्ग पर निशाना साध धर्मांतरण का गोरखधंधा चला रहे हैं। फिर यह सवाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से किया जाना चाहिए कि आदिवासी बहुल क्षेत्रो में धर्मांतरण क्यों पैर पसार रहा है? और सरकार इस विषय पर क्या करवाई कर रही है?

भारत में आदिवासी जनसंख्या है 8.6% और इसी वजह से उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया है किन्तु एक आदिवासी छात्र को समाज में जगह बनाने के लिए आज भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है, वहीं तथाकथित अल्पसंख्यक वर्ग आसानी से हासिल कर लेता है। बहरहाल, अभी यह मुद्दा और कितना तूल पकड़ता है यह आने वाला समय ही बताएगा। 

POST AUTHOR

Shantanoo Mishra
Poet, Writer, Hindi Sahitya Lover, Story Teller

जुड़े रहें

7,635FansLike
0FollowersFollow
177FollowersFollow

सबसे लोकप्रिय

धर्म निरपेक्षता के नाम पर हिन्दुओ को सालों से बेवकूफ़ बनाया गया है: मारिया वर्थ

यह आर्टिक्ल मारिया वर्थ के ब्लॉग पर छपे अंग्रेज़ी लेख के मुख्य अंशों का हिन्दी अनुवाद है।

विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसे बहा रही केजरीवाल सरकार, कपिल मिश्रा ने लगाया आरोप

पिछले 3 महीनों से भारत, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इन बीते तीन महीनों में, हम लगातार राज्य सरकारों की...

भारत का इमरान को करारा जवाब, दिखाया आईना

भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर आईना दिखाते हुए करारा जवाब दिया...

जब इन्दिरा गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ मुग़ल आक्रमणकारी बाबर को दी थी श्रद्धांजलि

ये बात तब की है जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हुआ करती थी। वर्ष 1969 में इन्दिरा गांधी काबुल, अफ़ग़ानिस्तान के...

दिल्ली की कोशिश पूरे 40 ओवर शानदार खेल खेलने की : कैरी

 दिल्ली कैपिटल्स के विकेटकीपर एलेक्स कैरी ने कहा है कि टीम के लिए यह समय है टूर्नामेंट में दोबारा शुरुआत करने का।...

गाय के चमड़े को रक्षाबंधन से जोड़ने कि कोशिश में था PETA इंडिया, विरोध होने पर साँप से की लेखक शेफाली वैद्य कि तुलना

आज ट्वीटर पर मचे एक बवाल में PETA इंडिया का हिन्दू घृणा खुल कर सबके सामने आ गया है। ये बात...

दिल्ली दंगा करवाने में ‘आप’ पार्षद ताहिर हुसैन ने खर्च किए 1.3 करोड़ रूपए: चार्जशीट

इस साल फरवरी में हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों को लेकर आज दिल्ली पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल किया।...

क्या अमनातुल्लाह खान द्वारा लिया गया ‘दान’, दंगों में खर्च हुए पैसों की रिकवरी थी? बड़ा सवाल!

फरवरी महीने में हुए दिल दहला देने वाले हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस आक्रमक रूप से लगातार कार्यवाही कर रही...

हाल की टिप्पणी