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टेक्नोलॉजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जीवन और सुविधाजनक बनेगा

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि नयी पीढ़ी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया में उभर रहा है, जिससे आर्थिक और सामाजिक विकास में नई उम्मीद जगाई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे उत्पादन और जीवन की शैली बदलता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने आर्थिक और सामाजिक विकास में नई उम्मीद जगाई है । (Unsplash)

तकनीकी प्रगति के चलते चेहरा पहचान जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गहन रूप से चीनी लोगों के जीवन में शामिल हो चूका हैं । खरीददारी करते समय चेहरा पहचान से भुगतान किया जा सकता है, यात्रा करते समय चेहरा पहचान से ट्रेन में सवार हो सकते हैं, मोबाइल फोन देखते समय चेहरा पहचान से फोन खोल सकते हैं। आजकल चेहरा पहचान का व्यापक रूप से प्रयोग किया जा रहा है। कोविड-19 महामारी की रोकथाम के दौरान चेहरा पहचान के साथ शारीरिक तापमान लेने का उपकरण व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया, जिससे तापमान लेने की कार्यक्षमता काफी हद तक उन्नत हुई। इसके अलावा, चेहरा पहचान पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े व्यवसाय का तेज विकास हो रहा है, जो नवाचार का नया क्षेत्र बन गया है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि नयी पीढ़ी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया में उभर रहा है, जिससे आर्थिक और सामाजिक विकास में नई उम्मीद जगाई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे उत्पादन और जीवन की शैली बदलता है। आंकड़ों के अनुसार अब चीन में चेहरा पहचान से संबंधित उद्यमों की संख्या 10 हजार से अधिक है। अनुमान है कि वर्ष 2024 तक चेहरा पहचान का बाजार 10 अरब युआन से अधिक होगा।


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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तेज़ होगी डिजिटल अर्थव्यवस्था

व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2019 के अंत में चेहरा पहचान का राष्ट्रीय मापदंड बनाने का काम शुरू हो चुका है। हाल के वर्षों में चीन व्यक्तिगत सूचना की रक्षा पर जोर दे रहा है। इंटरनेट सुरक्षा कानून, ई-कॉमर्स कानून और नागरिक कानून संहिता आदि में व्यक्तिगत सूचना की सुरक्षा पर स्पष्ट नियम बनाए गए। उद्देश्य है कि चेहरा पहचान का तकनीक और अच्छे से समाज को फायदा पहुंचाएगा।

आज डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेज विकास हो रहा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्यापक तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। 5जी और औद्योगिक इंटरनेट के मिश्रण से डिजिटल चाइना और बुद्धिमान समाज का निर्माण तेज होगा, जिससे चीन के आर्थिक विकास में नई उम्मीद जगेगी और विश्व आर्थिक विकास के लिए ज्यादा अवसर पैदा होंगे। (आईएएनएस )

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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