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दुनिया

आसियान देशों के 1000 छात्र आईआईटी में कर सकेंगे पीएचडी

केंद्रीय मंत्री ने कहा,यह कार्यक्रम भारत और आसियान देशों की 25 वर्षों से भी अधिक पुरानी साझेदारी एवं भारत की ह्यएक्ट ईस्ट पॉलिसी की मजबूती का यह ज्वलंत प्रमाण है।

आसियान देशों के 1000 छात्र भारत में क्र सकते हैं पी.एच.डी की पढ़ाई। (सांकेतिक चित्र, Unsplash)

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) देशों के 1000 छात्र भारत के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में पीएचडी कर सकेंगे। शुक्रवार को आसियान राष्ट्रों के राजदूतों की उपस्थिति में आसियान पीएचडी फेलोशिप कार्यक्रम के पहले बैच का स्वागत किया। इन्हें भारत में अनुकूल शिक्षा का परिवेश एवं वातावरण देने का आश्वासन दिया। आसियान इंटीग्रेशन के तहत भारत सीएलएमवी (कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम) देशों के लॉ एनफोर्समेंट ऑफिसर्स को भाषा प्रशिक्षण देने के साथ ही, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मैनेजमेंट, मुंबई द्वारा कैपिटल मार्केट से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देने का काम भी कर रहा है।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, इस फेलोशिप कार्यक्रम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सभी दस आसियान देशों के नेताओं की उपस्थिति में की थी। इसके तहत आसियान देशों के 1000 छात्र भारत के आईआईटी संस्थानों में पीएचडी कर सकेंगे। मैं आसियान देशों से आने वाले सभी छात्रों को यह आश्वासन देना चाहता हूं कि उन्हें हमारे देश, हमारी शिक्षण संस्थाओं द्वारा भारतीय बच्चों की तरह अनुकूल शिक्षा का अनुकूल परिवेश एवं वातावरण मिलेगा।


डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री(फ़ाइल फोटो, PIB)

केंद्रीय मंत्री ने कहा,यह कार्यक्रम भारत और आसियान देशों की 25 वर्षों से भी अधिक पुरानी साझेदारी एवं भारत की ह्यएक्ट ईस्ट पॉलिसी की मजबूती का यह ज्वलंत प्रमाण है। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए सबसे बड़े क्षमता विकास कार्यक्रमों में से एक है। हम एक ग्लोबल माइंडसेट और ग्लोबल अप्रोच के साथ हम भारत को उच्च शिक्षा के एक ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ‘शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण’, ‘स्टडी इन इंडिया’ के साथ साथ ही ‘क्वालिटी एजुकेशन’ पर हमारा खास फोकस है और आज का कार्यक्रम इसी दिशा में उठाए गए एक सकारात्मक कदम है।

डॉ. निशंक ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रतीक है कि भारत अपने ‘अतिथि देवो भव तथा वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच के साथ साथ इस ग्लोबलाइज्ड संसार में सर्वे भवंतु सुखिन की संस्कृति को सदैव पोषित करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। हम पूरे विश्व को एक साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते है। आईआईटी संस्थान हमारे वैश्विक ब्रांड हैं जो इसको सार्थक कर रहे है।

यह भी पढ़ें: आविष्कार करने वाले छात्रों को मिलेगी पेटेंट दायर करने की शिक्षा

निशंक ने कहा, भारत एवं आसियान देशों का संबंध बहुत गहरा, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक है और यह केवल एक सम्पर्क नहीं है बल्कि एक लाइव लिंक है। यह लिंक केवल ढाई-तीन दशकों में तैयार नहीं हुआ है बल्कि हमारी जड़ें बौद्ध धर्म, दर्शन एवं रामायण महाकाव्य से जुड़ी हुई हैं। आसियान देशों में भारतीय फिल्मों की शूटिंग, रामलीला का मंचन, अंकोरवाट का मंदिर जैसे तमाम उदाहरण हमारे ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों की कहानी सुनाते हैं। हमारी पुरानी संस्कृति और जुड़ाव का यह नया रूप है। हमारी संस्कृति और सभ्यता के जुड़ाव चिर काल से रहे है , यह कार्यक्रम उन जुड़ावों को और मजबूती देगा।(आईएएनएस)

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स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (IANS)

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में 76 सत्र मे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरक भाषण दिया।

यूएनजीए में भाषणों के सप्ताहांत चरण की शुरुआत के कुछ ही क्षणों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "लोकतंत्र उद्धार कर सकता है, लोकतंत्र ने करके दिखाया है"। अपनी बात को आगे कहते हुए उन्होंने गहरी संवेदना से भरी, खुद के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, "स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है।

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मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष 22 मिनट के अपने संबोधन में 'अद्वितीय' पैमाने पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और समस्या-समाधान क्षमता के संदर्भ में भारत की शक्ति के विचार को सामने रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत में सुधार होता है, तो दुनिया बदल जाती है। भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों की मापनीयता और उनकी लागत-प्रभावशीलता दोनों अद्वितीय हैं।"

पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

आकांक्षा: "ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार, भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

स्वास्थ्य देखभाल: "50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देकर, भारत ने उन्हें क्वालिटी हेल्थ सर्विस से जोड़ा है। भारत ने 3 करोड़ पक्के घर बनाकर, बेघर परिवारों को घर का मालिक बनाया है।"

जलापूर्ति: "प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक, पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं।"

भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

यह भी पढ़ें :- खान को भारत का जवाब : पाकिस्तान 'आतंकवादियों का समर्थक, अल्पसंख्यकों का दमन करने वाला'

वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

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