Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
खेल

नस्लवाद के खिलाफ नंगे पैर घेरा बना विरोध दर्ज कराएगी आस्ट्रेलियाई टीम

आस्ट्रेलिया की पुरुष क्रिकेट टीम हर अंतर्राष्ट्रीय सीरीज से पहले नस्लवाद के खिलाफ नंगे पैर घेरा बनाकर अपना विरोध दर्ज कराएगी क्योंकि टीम ने पहले कोई विरोध दर्ज नहीं कराया।

ऑस्ट्रेलिया टीम नस्लभेद के खिलाफ नंगे पैर विरोध करेंगे। (IANS)

तेज गेंदबाज पैट कमिंस ने सोमवार को कहा कि आस्ट्रेलिया की पुरुष क्रिकेट टीम हर अंतर्राष्ट्रीय सीरीज से पहले नस्लवाद के खिलाफ नंगे पैर घेरा बनाकर अपना विरोध दर्ज कराएगी। कमिंस ने माना कि उनकी टीम ने नस्लवाद के खिलाफ पहले ज्यादा कुछ नहीं किया।

ईएसपीएनक्रिकइंफो ने कमिंस के हवाले से लिखा है, “‘हमने नंगे पर घेरा बनाकर खड़े होने का फैसला किया है। हम इसे हर सीरीज में करना चाहते हैं और यह हमारे लिए काफी आसान फैसला रहा। एक बार जब आपको इस चीज के बारे में पता चल जाता है तो यह आसान फैसला होता है। सिर्फ खेल के तौर पर ही नहीं हम इंसानियत के तौर पर भी नस्लवाद के खिलाफ हैं।”


उन्होंने कहा, “हम अपना हाथ ऊपर कर कह सकते हैं कि हमने अतीत में इसके खिलाफ ज्यादा कुछ नहीं किया है, लेकिन हम बेहतर करना चाहते हैं। इसलिए यह एक छोटी चीज है जो हम इन गर्मियों में जोड़ना चाहते हैं।”

कमिंस ने कहा कि खिलाड़ी निजी तौर पर इस संबंध में अलग-अलग तरीके से अपना रुख जाहिर कर सकते हैं लेकिन एक टीम के तौर पर नंगेपैर घेरा बनाकर खड़ा होना उन्हें सबसे उपयुक्त लगा।

यह भी पढ़ें: मुंबई की सफलता का राज अच्छे खिलाड़ियों का मजबूत कोर ग्रुप : द्रविड़

उन्होंने कहा, “साथ ही हम अपनी शिक्षा को लेकर काम करने वाले हैं। हम आस्ट्रेलिया के अपने इतिहास के बारे में सीखने वाले हैं।”

वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने पिछले महीने आस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की टीम के कप्तान एरॉन फिंच और इंग्लैंड की सीमित ओवरों की टीम के कप्तान इयोन मोर्गन को सीरीज में नस्लवाद के खिलाफ आवाज न उठाने और नस्लवाद के विरोध में एक घुटने पर न बैठने के कारण आड़े हाथों लिया था।

इसकी शुरुआत इंग्लैंड और वेस्टइंडीज सीरीज से हुई थी लेकिन आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई सीरीजों में ऐसा देखने को नहीं मिला था।(आईएएनएस)

Popular

चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्री आरटीपीसीआर टेस्ट के ज़्यादा दाम से परेशान दिखे। (Pixabay)

भारत सरकार की कंपनी, 'हिंडलैब्स'(Hindlabs) जो एक 'मिनी रत्न'(Mini Ratna) है, प्रति यात्री 3,400 रुपये चार्ज कर रही है और रिपोर्ट देने में लंबा समय ले रही है।

चेन्नई के एक ट्रैवल एजेंट और दुबई के लिए लगातार उड़ान भरने वाले सुरजीत शिवानंदन ने एक समाचार एजेंसी को बताया, "मेरे जैसे लोगों के लिए जो काम के उद्देश्य से दुबई की यात्रा करते हैं, यह इतना मुश्किल नहीं है और खर्च कर सकता है, लेकिन मैंने कई सामान्य मजदूरों को देखा है जो पैसे की व्यवस्था के लिए स्तंभ से पोस्ट तक चलने वाले वेतन के रूप में एक छोटा सा पैसा।"

Keep Reading Show less

यह वे लोग हैं जिन्होंने ने उत्कृष्टता का एक नया उदाहरण पेश कर खड़ा लिया एक विशिष्ट संसथान। (IANS)

जब द्वितीय विश्व युद्ध(World War-2) समाप्त हो रहा था, तब लोगों के एक समूह ने भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी सॉफ्ट पावर - आईआईटी(IIT) प्रणाली की स्थायी इमारत की नींव रखी।

इसमें तीन व्यक्ति शामिल थे जिन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य के रूप में कार्य किया। इनमें जो लोग शामिल थे उनमें नलिनी रंजन सरकार, देशबंधु चित्तरंजन दास की अनुचर और 1933 फिक्की(FICCI) की अध्यक्ष, आईसीएस अधिकारी से टाटा स्टील के कार्यकारी अधिकारी बने अर्देशिर दलाल, जो भारत के विभाजन के अपने कट्टर विरोध के लिए बेहतर जाने जाते हैं, और सर जोगेंद्र सिंह, एक संपादक, लेखक और पटियाला के पूर्व प्रधान मंत्री, जिन्होंने पंजाब में मशीनीकृत खेती की शुरूआत की।

बॉम्बे प्लान के लेखक, भारत के आर्थिक विकास के लिए विजन दस्तावेज उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा(JRD Tata), जीडी बिड़ला(GD Birla) और सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास(Sir Purushottamdas Thakurdas), सर अर्देशिर(Sir Ardeshir), वायसराय की कार्यकारी परिषद के योजना और विकास के सदस्य के रूप में, अमेरिकी सरकार को भारतीय वैज्ञानिकों को डॉक्टरेट फेलोशिप की पेशकश करने के लिए राजी किया ताकि वे नए स्थापित वैज्ञानिक परिषद और औद्योगिक अनुसंधान (सीएसआईआर) का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त योग्यता प्राप्त कर सकें।

हालांकि, सर अर्देशिर ने जल्द ही महसूस किया कि अमेरिकी सरकार के साथ यह व्यवस्था केवल एक अल्पकालिक समाधान हो सकती है और उभरते हुए नए भारत को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है जो योग्य वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति के लिए नर्सरी बन सकें।

Keep Reading Show less

टि्वटर ने सस्पेंड किए कई अकाउंट। (Wikimedia Commons)

नए नियमों की घोषणा भारतीय मूल के पराग अग्रवाल(Parag Aggarwal) द्वारा सह-संस्थापक जैक डोर्सी(jack dorsey) से ट्विटर के सीईओ(CEO) के रूप में पदभार संभालने के ठीक एक दिन बाद की गई थी। लेकिन चरमपंथी समूहों ने नई निजी मीडिया नीति का फायदा उठाना शुरू कर दिया था। जिसकी वजह से ट्विटर(Twitter) ने चरमपंथी विरोधी शोधकर्ताओं के कई खातों को निलंबित कर दिया है। इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट ने दी।


Keep reading... Show less