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मनोरंजन

आयुष्मान ने अपनी फिल्म ‘बधाई हो’ को कहा दुर्लभ कहानी

अभिनेता आयुष्मान खुराना की फिल्म 'बधाई हो' को दो साल हो गए हैं। वह खुश हैं कि भारत में उनकी फिल्मों को स्वीकार किया गया है।

अभिनेता आयुष्मान खुराना। (Wikimedia Commons)

आयुष्मान खुराना स्टारर कॉमेडी फिल्म ‘बधाई हो’ को रिलीज हुए दो साल पूरे हो गए हैं। अभिनेता का कहना है कि वह अपने सिनेमा के माध्यम से भारत में वर्जित विषयों पर बातचीत को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह फिल्म एक ऐसी ही फिल्म है।

अमित शर्मा निर्देशित इस फिल्म की प्रमुख कहानी नीना गुप्ता और गजराज राव द्वारा अभिनीत एक वयस्क जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें एक्सीडेंटल गर्भावस्था का सामना करना पड़ता है। फिल्म में आयुष्मान ने उनके बेटे का किरदार निभाया है, जबकि सान्या मल्होत्रा ने अभिनेता की प्रेमिका की भूमिका निभाई है।


आयुष्मान ने कहा, “मैं अपने सिनेमा के माध्यम से भारत में वर्जित विषयों पर बातचीत को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा हूं। मेरी पहली फिल्म ‘विक्की डोनर’ से ही आप देखेंगे कि मैंने बदलाव की आवश्यकता के बारे में समाज के साथ क्रिएटिव तरीके से बातचीत करने की कोशिश की है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने दृढ़ता से महसूस किया है कि सिनेमा के माध्यम से हम समाज को महत्वपूर्ण विषयों के प्रति अपने नजरिए को व्यापक करने के लिए कह सकते हैं, ऐसे विषयों के बारे में जिन पर बात ही नहीं की जाती है।”

आयुष्मान खुश हैं कि भारत में उनकी फिल्मों को स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा, “हमारे देश के लोग शमीर्ले हैं, और इसमें सुंदरता है, लेकिन मैं इस बात से भी खुश हूं कि मेरे देश के लोगों ने सिनेमा की मेरी शैली को बहुत सराहा है।”

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आयुष्मान ने कहा कि ‘बधाई हो’ इस बात को उजागर करने का एक प्रयास है कि माता-पिता के बीच शारीरिक प्रेम को अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

आयुष्मान ने आगे कहा, “उनका प्यार इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि हमारा समाज गहरे मुद्दों को सामान्य करना चाहता है और एक कलाकार के रूप में मेरे लिए यह सबसे बड़ी मान्यता है। ‘बधाई हो’ के साथ मैंने अपने माता-पिता की यौन इच्छा को सामान्य करने की कोशिश की, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के लिए इस तरह की कहानी दुर्लभ थी, लेकिन यह आवश्यक था। (आईएएनएस)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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