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दुनिया

चीन, सावधान : बमवर्षक और विध्वंसक जहाज आपको करीब से देख रहे

अमेरिकी वायुसेना के लेफ्टिनेंट कर्नल एवं बॉम्बर टास्क फोर्स (बीटीएफ) कमांडर क्रिस्टोफर कॉनेंट ने कहा, "यह बॉम्बर मिशन योजना का भविष्य है।"

बमवर्षक विमान बी-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स।(Wikimedia Commons)

By: अतीत शर्मा

अमेरिकी वायुसेना ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने मंगलवार को डिएगो गार्सिया में अपनी नौसेना सहायता सुविधा (स्पोर्ट फेसिलिटी) में बी-2 स्टील्थ बॉम्बर मिशन के लिए अपना पहला विदेशी मोबाइल परिचालन केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।


393वें अभियान दल बम स्क्वाड्रन, व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस, मिसौरी द्वारा स्थापित यह केंद्र बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर के ‘कभी भी-कहीं भी’ अंजाम दिए जा सकने वाले मिशन को पूरा करने में सहायक होगा। यह बी-2 के किसी भी एयरफील्ड पर पूरी तरह से कार्य करने वाली मिशन योजना एवं निगरानी संचालित करने की क्षमता रखता है।

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इससे स्पष्ट रूप से बीजिंग में खतरे की घंटी जरूर बजेगी, जो पहले से ही व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस, मिसौरी में 509वें बॉम्ब विंग से तीन बी-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स की तैनाती से झुलस गया था। मिसौरी प्रशांत क्षेत्र के डिएगो गार्सिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आधार है।

बी-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स, (Wikimedia Commons)

इससे पहले जुलाई में चीन की धमकियों से बेपरवाह अमेरिका ने ताइवान की खाड़ी और दक्षिणी चीन सागर (साउथ चाइना सी) में अपने दो विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) को तैनात किया था, जिस पर चीन ने आपत्ति भी जताई थी। इसी समय जापानी नौसेना ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था।

अमेरिकी वायुसेना के लेफ्टिनेंट कर्नल एवं बॉम्बर टास्क फोर्स (बीटीएफ) कमांडर क्रिस्टोफर कॉनेंट ने कहा, “यह बॉम्बर मिशन योजना का भविष्य है।”

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य यहां वायुसेना ग्लोबल स्ट्राइक 2020 स्ट्रेटेजिक योजना की रूपरेखा के तौर पर दुनिया के किसी भी स्थान पर बी-2 इकाई को भेजने और लड़ाकू विमानों को संचालित करने की क्षमता पैदा करना है।”

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यूएस एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक 2020 स्ट्रेटेजिक प्लान के अनुसार, मौजूद प्रतिकूलताओं को दूर करने और कमांडरों की परिचालन क्षमता का विस्तार करने के लिए संचालन के भविष्य को पुनर्जीवित, सुदृढ़ और पुन: विकसित करके नए विचारों को अपनाना होगा।

वर्तमान में, 393वां ईबीएस डिएगो गार्सिया से मोबाइल सुविधा का परीक्षण कर रहा है। एक बार इसके एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड में लागू होने के बाद, इस तरह के मोबाइल संचालन केंद्र पिछले ऑपरेशन की तुलना में कमांडरों को अधिक लचीलेपन के साथ बम दागने वाले बलों को दुनियाभर में नियुक्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।

बता दें कि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बी-2 स्प्रिट दुनिया का सबसे घातक बॉम्बर है। यह बमवर्षक विमान एक साथ काफी परमाणु बम ले जा सकता है। हाल ही में इसके बेड़े में बेहद घातक और सटीक मार करने वाले बी 61-12 परमाणु बम शामिल किए गए हैं। यह परमाणु रडार की पकड़ में भी नहीं आता है और चुपके से हमले को अंजाम देने में सक्षम है।

ये बॉम्बर ऐसे समय पर डिएगो गार्सिया पहुंचे हैं, जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा विवाद चरम पर पहुंच गया है। चीन ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना और फाइटर जेट भारत से सटी सीमा पर तैनात किए हैं। ऐसे में अमेरिका द्वारा डिएगो गार्सिया, जो भारत के दक्षिणी तट से अधिक दूर नहीं है, वहां पर की गई यह तैनाती चीन की नींद उड़ाने वाली है।(आईएएनएस)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
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