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थोड़ा हट के

बक्सवाहा की जंगल बचाओ मुहिम को सेलिब्रिटी का साथ

आशुतोष राणा ने लिखा है कि, मुझे विश्वास है कि मध्यप्रदेश शासन अपनी संवेदनशीलता के चलते हर कीमत पर प्रकृति के पक्ष में ही निर्णय लेगा।

अभिनेता आशुतोष राणा।(आईएएनएस)

बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगल को हीरा खनन के लिए एक निजी कंपनी को सौंपने के लिए चल रही कवायद का विरोध दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। अब इस अभियान को आमजन, राजनेताओं के साथ सेलिब्रिटी का भी साथ मिलने लगा है। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा और माउंट एवरेस्ट विजेता मेघा परमार भी जंगल बचाओ मुहिम का हिस्सा बन गई हैं। बक्सवाहा के जंगल में हीरे का भंडार पाए जाने के बाद खनन का काम एक कंपनी को सौंपा जाने की तैयारी है। इस कंपनी को लगभग 382 हेक्टेयर वन क्षेत्र लीज पर दिया जाने वाला है। यह घना और समृद्ध जंगल तो है ही साथ में यहां से लोगों की आजीविका चलती है। इससे संस्कृति भी जुड़ी हुई है। यही कारण है कि सरकार की कोशिशों का विरोध शुरू हो गया है।

राज्य के अनेक विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस परियोजना को ही निरस्त करने की मांग की है। सभी जंगल बचाने के पक्षधर हैं और अब तो फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा और पर्वतारोही मेघा परमार भी जंगल बचाने की मुहिम में साथ आ गए हैं।


इस अभियान को आमजन, राजनेताओं के साथ सेलिब्रिटी का भी साथ मिलने लगा है।(Pixabay)

फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने अपनी फेसबुक वॉल पर संपत्ति-विपत्ति शीर्षक से लिखा है कि, “जन्म और जीवन की रक्षा के लिए जल, जंगल, जमीन का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक होता है, इन सभी का रक्षण, संवर्धन जनतंत्र की प्राथमिकता होती है, किंतु मनुष्य के हृदय में इसके संवर्धन का संकल्प कितना गहरा है इसकी परीक्षा के लिए प्रकृति कई खेल खेलती है और वही जांचने के लिए प्रकृति ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड स्थित बक्सवाहा के विशाल जंगलों में देश के सबसे बड़े हीरे के भंडारण का पता दे दिया, अब धर्म संकट है कि मनुष्य को यदि हीरे चाहिए तो से कम से कम सवा दो लाख पेड़ों की निर्मलता से काटकर अलग करना होगा।”

आशुतोष राणा ने मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए लिखा है कि, मुझे विश्वास है कि मध्यप्रदेश शासन अपनी संवेदनशीलता के चलते हर कीमत पर प्रकृति के पक्ष में ही निर्णय लेगा, क्योंकि प्रकृति की लय से लय मिलाकर न चलना ही प्रलय का कारण होता है।

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आशुतोष राणा के बाद पर्वतारोही मेघा परमार भी हीरे की खातिर पेड़ों की कटाई के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं। मेघा मध्य प्रदेश की पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट को फतह किया है, साथ ही वे मध्यप्रदेश की। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।

उन्होंने ,सेव बक्सवाहा फारेस्ट अभियान का समर्थन करते हुए कहा है कि हमें सोचना होगा कि हीरा महत्वपूर्ण है या फिर जरूरी है जान, जरूरी है गले में हीरा पहनना या जरूरी है प्राण वायु यह तय करेंगे आप, सभी मेरे साथ एकजुट होकर आवाज उठाइए, हमें प्राणवायु चाहिए न कि गले में पहनने वाला हीरा चाहिए, इसलिए जरूरी है कि हम अपने लिए अपनी प्रकृति के लिए एकजुट हों और और हरे पेड़ की रक्षा के लिए हम मिलकर आवाज उठाएं ।(आईएएनएस-SHM)

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