Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

भारत और कजाकिस्तान के रिश्ते को इस साक्षात्कार से जानें

By – आरती टीकू सिंह भारत और कजाकिस्तान (India and Kazakhstan) आपस में एक आर्थिक और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। भारत में कजाकिस्तान (Kazakhstan) के राजदूत येरलन अलिम्बयेव ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने अपने देश में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के महत्व और राजनीतिक सुधारों के बारे में

By – आरती टीकू सिंह

भारत और कजाकिस्तान (India and Kazakhstan) आपस में एक आर्थिक और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। भारत में कजाकिस्तान (Kazakhstan) के राजदूत येरलन अलिम्बयेव ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने अपने देश में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के महत्व और राजनीतिक सुधारों के बारे में बात करने के अलावा भारत (India) के साथ द्विपक्षीय संबंधों को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर भी प्रकाश डाला।


पेश हैं साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश :

प्रश्न : कजाकिस्तान के संसदीय चुनावों पर सभी की निगाहें थीं। इस बार कजाकिस्तान में राष्ट्रीय चुनाव अलग कैसे थे?

उत्तर : हमने 10 जनवरी 2021 को मजलिस (संसद का निचला सदन) में संसदीय चुनाव कराए। ये चुनाव केवल कजाकिस्तान (Kazakhstan) के लिए ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र राष्ट्रों के पूरे राष्ट्रमंडल के लिए भी बहुत हरावल (वैन्गार्ड) थे। सबसे पहले तो संसदीय चुनाव वैश्विक कोविड-19 महामारी के युग में आयोजित हुए। इसके बावजूद पूरी चुनाव प्रक्रिया सार्वजनिक सुरक्षा उपायों, जैसे मास्क पहनना, सामाजिक दूरी, सुरक्षात्मक व्यक्तिगत उपकरण आदि के अनुरूप हुई।

सुधारों की बात करें तो पार्टी की सूची में महिलाओं और युवाओं के लिए 30 प्रतिशत कोटा, राय और विपक्ष की संस्कृति का स्वागत और एक संसदीय विपक्षी संस्थान का गठन शामिल है। मजलिस के लिए आखिरी चुनाव मार्च 2016 में हुए थे।

यह भी पढ़ें – मिलिए नासा में वैज्ञानिक रह चुके यूपी के डॉ. सरोज से, अमेरिका में भारतीयता की मिसाल

भारत और कजाकिस्तान के बीच आधिकारिक रूप से 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। (Wikimedia Commons)

भारतीय चुनाव पर्यवेक्षकों के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूं, जो शंघाई सहयोग संगठन टीम का हिस्सा रहे और नूर-सुल्तान में भारतीय दूतावास के एक हिस्से के रूप में पर्यवेक्षकों के तौर पर कुछ मतदान केंद्रों का दौरा किया।यह देखते हुए कि भारत और कजाकिस्तान (India and Kazakhstan) रणनीतिक साझेदार हैं, मैं वास्तव में विश्वास करता हूं कि आगे विकासवादी लोकतंत्रीकरण प्रक्रियाएं हमारे बंधन को और भी मजबूत बनाएंगी। कजाकिस्तान संसद की नए सिरे से बनाई गई रचना देश में सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए गुणवत्तापरक विधायी समर्थन पर केंद्रित होगी।

प्रश्न : 1992 से भारत और कजाकिस्तान के बीच संबंध कैसे विकसित हुए?

उत्तर : भारत के मध्य एशिया के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं और कजाकिस्तान (Kazakhstan) क्षेत्र में एक विशेष स्थान रखता है। हमारे द्विपक्षीय संबंध हर साल बढ़ रहे हैं और इनका विस्तार जारी है। आधिकारिक रूप से 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 29 वर्षों में कजाकिस्तान के राष्ट्रपति ने पांच बार भारत का दौरा किया और भारतीय प्रधानमंत्रियों ने पांच बार कजाकिस्तान का दौरा किया। हमारे देशों के नेता वार्षिक आधार पर मिलते रहते हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच शामिल हैं।

यह भी पढ़ें – भारत के लिए गर्व का क्षण, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फहराया तिरंगा

भारतीय प्रधानमंत्रियों ने अभी तक कुल पांच बार कजाकिस्तान का दौरा किया है। (Wikimedia commons)

भारत और कजाकिस्तान (India and Kazakhstan) के बीच संबंधों ने इस अवधि में काफी गतिशीलता और गति प्रदर्शित की है। भारत 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद एक स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र के रूप में कजाकिस्तान को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। साल 2009 में सामरिक भागीदारी पर हस्ताक्षर करके हमारे देशों के बीच सहयोग को एक उच्च स्तर पर लाया गया था। वर्तमान में हम महामारी के साथ स्थिति स्थिर होते ही 2021 में राष्ट्रपति कासम-जोमार्ट टोकायेव की पहली राष्ट्र यात्रा की व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।

इस समय कजाकिस्तान (Kazakhstan) मध्य एशिया में भारत का मुख्य व्यापार भागीदार है। द्विपक्षीय व्यापार कारोबार क्षेत्र के बाकी राष्ट्रों के साथ भारत के कुल व्यापार कारोबार से अधिक है और 2020 के 11 महीनों में 2.3 अरब डॉलर के बराबर है।

प्रश्न : कजाकिस्तान और भारत के व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर : मध्य एशिया यूरेशियन महाद्वीप के सभी चार भागों को जोड़ने वाला एक अनूठा क्षेत्र है। प्राचीन काल से इस क्षेत्र ने यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा मार्ग प्रदान किया है। आज मध्य एशियाई क्षेत्र पूर्व (चीन) और पश्चिम (यूरोप) को जोड़ने वाले भूमि गलियारे में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है और इसका काफी महत्व है। (आईएएनएस)

Popular

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

Keep Reading Show less

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहा हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है (wikimedia commons)

उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विख्यात है , यहां हिंदु धर्म के कई तीर्थ स्थल हैं। उत्तराखंड राज्य के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ विशेष कदम उठाये हैं। इस माह की शुरुआत में धामी सरकार ने प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से बढ़ती मुस्लिम आबादी पर काबू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति लाने पर हामी भरी थी। धामी सरकार से RSS से जुड़े 35 संगठनों ने यह मांग की थी। कई हिन्दूवादी संगठनों का दावा है कि उत्तराखंड के कई शहर देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मुस्लिम आबादी कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है ।

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहां हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है यह हिंदुओ के आस्था का केंद्र रहा है। सनातन धर्म के प्रमुख केंद्रों में एक, जहां सभी मठ, अखाड़े और आध्यात्मिक केंद्र स्थित हैं। यह हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक कार्यो की पवित्र भूमि है। यहां पर हिन्दू अस्थि विसर्जन से लेकर जनेऊ या उपनयन संस्कार और यंहा तक की काँवड़ यात्रा में जाने के लिए भक्त जन यंहा गंगा जल तक लेने आते हैं।

Keep Reading Show less

अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

Keep reading... Show less