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भारत बायोटेक ने कहा ‘ब्राजील से कोई अग्रिम भुगतान नहीं मिला’

Bharat Biotech ने कहा, "पिछले कुछ हफ्तों के दौरान, ब्राजील और अन्य देशों में मीडिया में बड़े पैमाने पर कोवैक्सिन की खरीद प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने की खबरें आई हैं।"

(NewsGram Hindi)

 ब्राजील द्वारा 324 मिलियन डॉलर के कोवैक्सिन अनुबंध को निलंबित करने की घोषणा के बाद भारत बायोटेक(Bharat Biotech) ने कहा है कि उसे कोई अग्रिम भुगतान नहीं मिला है और न ही कोई टीके की आपूर्ति की है। भारत बायोटेक(Bharat Biotech) ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों के दौरान, ब्राजील और अन्य देशों में मीडिया में बड़े पैमाने पर कोवैक्सिन की खरीद प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने की खबरें आई हैं।”

स्वास्थ्य मंत्रालय, ब्राजील द्वारा कोवैक्सिन(Covaxin) की खरीद के विशिष्ट मामले में, नवंबर 2020 के दौरान एमओएच ब्राजील के साथ पहली बैठक के बाद से, 29 जून, 2021 तक, इस 8 महीने के दौरान अनुबंधों और नियामक अनुमोदनों के लिए कदम दर कदम अप्रोच का पालन किया गया है। भारत बायोटेक(Bharat Biotech) ने कहा, “ईयूए 4 जून 2021 को प्राप्त हुआ था। 29 जून 2021 तक, भारत बायोटेक(Bharat Biotech) को कोई अग्रिम भुगतान नहीं मिला है और न ही एमओएच ब्राजील को कोई टीके की आपूर्ति की गई है।” भारत बायोटेक ने दुनिया भर के कई देशों में अनुबंध, नियामक अनुमोदन और आपूर्ति के लिए समान दृष्टिकोण का पालन किया है, जहां कोवैक्सिन की सफलतापूर्वक आपूर्ति की जा रही है।


“भारत के बाहर की सरकारों को आपूर्ति के लिए कोवैक्सिन की कीमत 15-20 डॉलर प्रति खुराक के बीच स्पष्ट रूप से स्थापित की गई है। ब्राजील के लिए मूल्य निर्धारण भी 15 डॉलर प्रति खुराक पर इंगित किया गया है। भारत बायोटेक को उपरोक्त कीमत पर कई अन्य देशों से अग्रिम भुगतान प्राप्त हुआ है।”

भारत बायोटेक को कोई अग्रिम भुगतान नहीं मिला है और न ही एमओएच ब्राजील को कोई टीके की आपूर्ति की गई है।(Wikimedia Commons)

प्रेसिसा मेडिसमेंटोस ब्राजील में भारत बायोटेक(Bharat Biotech) का पार्टनर है, जो नियामक सबमिशन, लाइसेंस, वितरण, बीमा, तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण आदि के साथ सहायता, मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करती है। कंपनी सभी देशों में एक समान साझेदारी मॉडल का अनुसरण करती है, जहां इसके टीकों की आपूर्ति की जाती है। क्योंकि इन देशों में इसके अपने कार्यालय नहीं हैं। भारत बायोटेक(Bharat Biotech) और प्रेसिसा मेडिसमेंटोस ब्राजील में 5,000 विषय चरण क्लिनिकल ट्रायल कर रहे हैं, जिसे हाल ही में एएनवीएसए द्वारा अनुमोदित किया गया था। परीक्षण अल्बर्ट आइंस्टीन संस्थान द्वारा आयोजित किया जाएगा।

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ब्राजील मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “सीजीयू के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, अनुबंध में कोई अनियमितता नहीं है, लेकिन अनुपालन के लिए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिक गहन विश्लेषण के लिए अनुबंध को निलंबित करने का विकल्प चुना।” इससे पहले गुरुवार को, एक वैश्विक समाचार वायर ने सीएनएन ब्रासिल की एक रिपोर्ट की सूचना दी कि मंत्रालय ने अनुबंध को रद्द करने का फैसला किया है। ब्राजील के संघीय अभियोजकों ने फरवरी में हस्ताक्षरित अनुबंध के लिए तुलनात्मक रूप से उच्च कीमतों, त्वरित वार्ता और लंबित नियामक अनुमोदन का हवाला देते हुए सौदे की जांच शुरू की थी।(आईएएनएस-SHM)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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