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देश

Bhopal Gas Tragedy : आज भी कहीं अपाहिज नजर आते हैं तो कहीं हांफते, घिसते लोग

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 36 साल पहले हुए गैस हादसे के प्रभावितों के घाव अब तक नहीं भरे हैं। अभी भी वे न्याय और अपने हक के लिए भटक रहे हैं।

भोपल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में गैस लीक होने की वजह से हज़ारों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे। (Wikimedia commons)

By – संदीप पौराणिक

भोपाल में दो-तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को यूनियन कार्बाइड से जहरीली गैस रिसी थी और उसने हजारों लोगों को अपने आगोश में ले लिया था, तो दूसरी ओर हादसे के 36 साल बाद भी लोग बीमारी और समस्याओं से जूझ रहे हैं। लोगों को न तो बेहतर इलाज मिल पाया है और न ही मुआवजा। यही कारण है कि उनके भीतर सरकारों को लेकर घोर असंतोष है।


भोपाल गैस हादसे ने चिरौंजी बाई (85) की जिंदगी को भी मुसीबतों से घेर दिया। उन्होंने गैस हादसे में अपने पति, सास, बड़ी बेटी और दो बेटों को खोया है। उस रात को याद करके उनकी आंखें भर आती हैं और वे बताती हैं कि उनकी जिंदगी तो मुसीबतों का पहाड़ बन गई है। सरकार से पेंशन ही मिल जाती थी जिसके सहारे उनकी जिंदगी चल रही थी मगर अब तो वह भी बंद है।

भोपाल गैस त्रासदी में पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। (Twitter)

अकेली चिरौंजी बाई ऐसी नहीं है बल्कि हजारों महिलाएं ऐसी हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं ह्रदय लीवर गुर्दे आदि के हजारों मरीज है जिन्हें उपचार की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। गैस संयंत्र के आसपास की बस्तियों में रहने वाला एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलता जो समस्याओं से या बीमारी से ग्रसित नहीं हो, क्योंकि लोगों को तो पीने का पानी भी साफ नहीं मिल पा रहा है।

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गैस पीड़ितों की लंबे समय से लड़ाई लड़ने वाले सतीनाथ षडंगी कहते हैं कि इस हादसे के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को अमेरिकी सरकार और भारत की सरकार के रवैए के कारण सजा नहीं मिल पाई और वह बगैर जेल जाए ही दुनिया को छोड़ गया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है भोपाल गैस त्रासदी से उपजा दर्द आज भी हम सबको याद है। ईश्वर ऐसी त्रासदी से देश और दुनिया के हर कोने को सर्वदा सुरक्षित रखे। अमूल्य जीवन की रक्षा और सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए समाज एवं सरकार मिलकर कार्य करें, तो ऐसी विपदाओं से विश्व हमेशा सुरक्षित रहेगा।

यूनियन कार्बाइड से दो-तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को रिसी जहरीली गैस मिथाइल आईसो साइनाइड ने हजारों को लेागों को एक ही रात में मौत की नींद सुला दिया था। उस मंजर के गवाह अब भी उस रात को याद कर दहशतजदा हो जाते हैं और वे उस रात को याद ही नहीं करना चाहते। बीते 35 साल में राज्य और केंद्र में कई सरकारें बदल चुकी हैं, मगर गैस पीड़ितों का दर्द कम नहीं हुआ।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए – World Needs To Decrease Fossil Fuels Production By 6%

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की संयोजक साधना कार्णिक ने सरकारों पर गैस पीड़ितों के प्रति नकारात्मक रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गैस प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को जहरीला और दूषित पानी पीने को मिल रहा है। यही कारण है कि, गुर्दे, कैसर, फेंफड़े, हृदय और आंखों की बीमारी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गैस पीड़ितों की मौत हो रही है, मगर उनका पंजीयन नहीं किया जा रहा है।

गैस कांड प्रभावित बस्तियों में अब भी पीड़ितों की भरमार हैं। कहीं अपाहिज नजर आते है तो कहीं हांफते, घिसते लोग। विधवाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीमार बढ़ रहे है। कहने के लिए तो गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल खोले गए हैं मगर इलाज की वह सुविधाएं नहीं है जिसकी बीमारों को जरुरत है। (आईएएनएस)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता ( wikimedia Commons )

अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ की एक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग 71% दर्ज की गई है यह जानकारी 'द मॉर्निंग कंसल्ट' ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए साझा की है। 'द मॉर्निंग कंसल्ट' के सर्वे के मुताबिक अप्रूवल रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत दुनिया भर के 13 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

मॉर्निंग कंसल्ट’ दुनिया भर के टॉप लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है। मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में नेताओं की रेटिंग पर नज़र रख रही है। रेटिंग पेज को सभी 13 देशों के नवीनतम डेटा के साथ साप्ताहिक रूप से अपडेट किया जाता है।

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अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' हिंदी में जल्द होगी रिलीज ( wikimedia commons )


हाल ही में रिलीज़ हुई अल्लू अर्जुन की फ़िल्म 'पुष्पा: द राइज़' को दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया इस फ़िल्म के आने के बाद से तमिल फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है। लोग उनकी फिल्म को खूब पसंद कर रहे हैं । अब दर्शकों को अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' को हिंदी में रिलीज होने का इंतजार है। यह फ़िल्म भगवान विष्णु की पौराणिक कहानी से प्रेरित है।
पुष्पा की तरह फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' से भी दर्शक जुड़ाव महसूस करें इसके लिए मेकर्स ने इस फ़िल्म के टाइटल के मायने भी बताए।

फिल्म निर्माण कम्पनी ‘गोल्डमाइंस टेलीफिल्म्स’ ने अपने ट्विटर हैंडल पर फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु'का मतलब बताते हुए लिखा की “अला वैकुंठपुरमुलु पोथन (मशहूर कवि जिन्होंने श्रीमद्भागवत का संस्कृत से तेलुगु में अनुवाद किया) की मशहूर पौराणिक कहानी गजेंद्र मोक्षणम की सुप्रसिद्ध पंक्ति है। भगवान विष्णु हाथियों के राजा गजेंद्र को मकरम (मगरमच्छ) से बचाने के लिए नीचे आते हैं। उसी प्रकार फिल्म में रामचंद्र के घर का नाम वैकुंठपुरम है, जहाँ बंटू (अल्लू अर्जुन) परिवार को बचाने आता है। अला वैकुंठपुरमुलू की यही खूबी है।”

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फ़िल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी (Wikimedia Commons)

दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए ये साल काफी व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो प्रतिबद्धताएं हैं वह 2023 के अंत तक ऐसे ही रहने वाली हैं।

साल 2022 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए बहुत व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल राम रेड्डी की बिना शीर्षक वाली फिल्म, कानू भेल की 'डिस्पैच', अभिषेक चौबे की फिल्म और राहुल चितेला की फिल्म जैसे नए प्रोजेक्ट के लिए बैक-टू-बैक शूटिंग करेंगे।


मनोज बाजपेयी ने हाल ही में दो प्रोजेक्ट को खत्म किया है, एक रेड्डी की अभी तक बिना शीर्षक वाली फिल्म के साथ, जिसमें दीपिक डोबरियाल भी हैं। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों पर हुई फिर, उन्होंने कानू बहल द्वारा निर्देशित आरएसवीपी के 'डिस्पैच' को समाप्त किया, जो अपराध पत्रकारिता की दुनिया में स्थापित एक खोजी थ्रिलर है।

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