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मनोरंजन

बिग बी ने कोविड सुविधा के लिए उपकरण, संसाधन किया दान|

अमिताभ बच्चन जुहू में 25 बेड वाली ऑक्सीजन सुविधा स्थापित करने में मदद के लिए संसाधन दान कर दिए हैं| उन्होंने निर्माता आनंद पंडित के साथ मिलकर काम किया है।

अमिताभ बच्चन ऑक्सीजन सुविधा स्थापित करने में मदद के लिए संसाधन दान कर रहे हैं। (Wikimedia Commons)

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) जुहू में 25 बेड वाली ऑक्सीजन सुविधा स्थापित करने में मदद के लिए संसाधन दान कर रहे हैं। दिग्गज अभिनेता ने ऑक्सीजन (Oxygen) सुविधा स्थापित करने में निर्माता आनंद पंडित के साथ मिलकर काम किया है।

दादर में पहले से ही इसी तरह की सुविधा स्थापित करने वाले पंडित कहते हैं, “जुहू में ऋतंभरा विश्व विद्यापीठ में 25-बेड ऑक्सीजन की सुविधा स्थापित की गई है। परीक्षण के बाद, केंद्र मंगलवार सुबह 10 बजे तक चल रहा था और फिर 18 मई को श्री बच्चन ने सुविधा के लिए उपकरण और बुनियादी ढांचे को दान कर दिया है और बीएमसी द्वारा सभी आवश्यक अनुमतियां प्रदान की गई हैं।”


उन्होंने कहा, “जब अमित जी ने सुना कि मैं जुहू में स्थानों की तलाश कर रहा हूं, तो उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि वह हर संभव मदद करना चाहते हैं। उन्होंने हमेशा मेरी सामाजिक पहल का पूरे दिल से समर्थन किया है और अपना समय और संसाधन का योगदान दिया है। मुझे उम्मीद है कि यह केंद्र जरूरतमंद लोगों के लिए बहुत आवश्यक राहत और उपचार करने में मदद करेगा। हम इस कठिन समय के दौरान किसी भी तरह से बदलाव लाने के तरीके ढूंढते रहेंगे।”

जुहू में ऋतंभरा विश्व विद्यापीठ में 25-बेड ऑक्सीजन की सुविधा स्थापित की गई है। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

पंडित ने हाल ही में अभिनेता-फिल्म निर्माता अजय देवगन के साथ मिलकर शिवाजी पार्क में 20-बेड का कोविड आईसीयू स्थापित किया था और बोरीवली में एक और स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं और स्थानों की तलाश कर रहे हैं।

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वह कहते हैं, “उद्योग के लिए इस समय एक साथ आना अनिवार्य है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सके। हम एक ऐसे आर्थिक, मानवीय और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं जो पिछले साल भी अकल्पनीय रहा होगा। हम लोगों को इस महामारी के इर्द-गिर्द धूमिल कहानियों को बदलने के लिए सब कुछ करना चाहिए जो आशा देता है।

पंडित के प्रोडक्शन की फिल्म ‘चेहरे’ में अमिताभ बच्चन नजर आएंगे। कोविड (Covid-19) के प्रकोप के कारण फिल्म की नाटकीय रिलीज को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। (आईएएनएस-SM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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