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राजनीति

विपक्ष के ‘शब्दवाण’ से घिरता सत्ता पक्ष!

बिहार विधानमंडल के चल रहे बजट सत्र में सदन के बाहर और भीतर विपक्ष के 'शब्दों के तीर' से सत्ता पक्ष लगातार घिरती जा रही है।

By: मनोज पाठक


बिहार विधानमंडल के चल रहे बजट सत्र में सदन के बाहर और भीतर विपक्ष के ‘शब्दों के तीर’ से सत्ता पक्ष लगातार घिरती जा रही है। सत्ता पक्ष भले ही विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव में अनुभव की कमी कह कर अपनी भड़ास निकाल रहा है, लेकिन विपक्ष किसी भी मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरने से नहीं चूक रहा है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले महागठबंधन को सत्ता भले ही नहीं मिली हो लेकिन राजद राज्य की सबसे बडी पार्टी बनकर सामने आई। इसके बाद ही विपक्ष के तेवर से इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि राजद किसी भी मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ दो-दो हाथ करने को तैयार होगी। चुनाव के बाद जब मंत्रिमंडल का गठन किया गया तब शिक्षा मंत्री बने मेवालाल चौधरी को विपक्ष के दबाव में इस्तीफा देना पडा। विधानमंडल के बजट सत्र को भी देखा जाए तो विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड रहा है।

दीगर बात है कि विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा सदन चलाने में भी सफल रहे हैं। विपक्ष सरकार को घेरने के किसी भी मुद्दे को हाथ से नहीं देना चाहती है। हाजीपुर में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की योजना का उद्घाटन विभागीय मंत्री मुकेश सहनी के बदले उनके भाई ने कर दिया। इस दौरान उन्हें सरकारी प्रोटोकॉल भी मिला। इस मामले को लेकर बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ। दोनों सदनों में सरकार को जब कठघरे में खड़ा किया गया तो सत्ता पक्ष की भारी फजीहत हुई। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हस्तक्षेप करना पड़ा और बाद में मंत्री को भी अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।

आरजेडी नेता तेजश्वी यादव।(फाइल)

इसके बाद कई दिनों तक विपक्ष मंत्री रामसूरत राय के भाई के बहाने सरकार को घेरते रहा। इधर, विपक्ष शराबबंदी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते रहा है। विपक्ष लगातार मंत्रियों पर भी प्रश्न का सही उत्तर नहीं देने का आरोप लगाता रहा है। विधानसभा में सोमवार को तो अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गन्ना मंत्री प्रमोद कुमार के मंत्री बनाए जाने पर ही सवाल उठा दिए। एक प्रश्न के उत्तर में गन्ना मंत्री जवाब दे रहे थे तभी सवाल के जवाब के बीच में ही तेजस्वी ने सत्ता पक्ष की तरफ इशारा करते हुए कहा, “अरे यार, गजब करते हैं। आपलोगों को कैसे मंत्री बना दिया। जवाब देने आता नहीं। कौन-कौन कहां-कहां से आ जाते हैं, यार।”

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इसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने तो इसे परंपरा के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे सदन नहीं चल सकता। राजद के महासचिव आलोक मेहता कहते हैं कि बिहार सरकार सवालों का जवाब तक सही नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का सवाल करने का हक है। सत्ता पक्ष भी विपक्ष के इन आचरणों को लेकर मुखर है। जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह कहते हैं कि मंत्री तेजस्वी यादव से ज्यादा पढ़े लिखे और काबिल हैं। जनता ने उनको चुनकर सदन में भेजा है। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विरोधी दल के नेता पद की अपनी मर्यादा है, लेकिन बिना संघर्ष के कुर्सी मिल जाने से वे इसकी गरिमा नहीं समझ पा रहे हैं। विपक्ष के नेता दो दिन पूर्व सदन में विपक्ष को तरजीह नहीं दिए जाने को लेकर राजभवन मार्च तक कर चुके हैं।(आईएएनएस-SHM) 

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गामी पांच राज्यों में होने वाले चुनाव का बिगुल बज गया है और अब भाजपा जीत के लिए वापस से उनके मोदी नामक "ट्रम्प कार्ड" का इस्तेमाल करेगी। (Wikimedia Commons)

अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले चुनावों का बिगुल बज चूका है। पाँचों राज्यों में चुनाव जीतने के लिए राजनितिक पार्टियां रणनीति बनाने में लगी। इन पांचों राज्यों में सबसे बड़ी नज़र भाजपा(Bhajpa) पर होगी क्योंकि पांच राज्यों में से तीन राज्यों में उसकी सत्ता है। पांच राज्यों में से उत्तराखंड(Uttarakhand) में भी चुनाव होने हैं जहां भाजपा ने इस साल 3 मुख्यमंत्री बदल दिए हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी(Pushkar Dhami) हैं जिन्हे आए हुए कुछ ही महीने हुए हैं ऐसे में भाजपा के लिए उत्तराखंड का पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आ गया है।

सैन्य बाहुल्य राज्य उत्तराखंड में पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) की ऐसी छवि बन चुकी जिसे विपक्ष के लिए फिलहाल तोडना ना मुमकिन है। पिछले चुनाव में कांग्रेस में हुई बगावत और मोदी का जादू ही वो वजह था जिसने राज्य की 70 सीटों में से 57 सीटें भाजपा की झोली में दाल दी थी।

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देश में अब तक ओमीक्रोन से संक्रमित दो मरीज मिल चुके हैं। [pixabay]

दुनिया में तेजी से फैल रहे कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन ने अब भारत में भी दस्तक दे दी है। मामले की गंभीरता आप इस बात से समझ सकते हैं कि देश के टॉप साइंटिस्ट ने शुक्रवार को यह चेतावनी तक दे दी है कि यह वेरिएंट देश में तीसरी लहर ला सकता है। बता दें कि देश में अब तक ओमीक्रोन से संक्रमित दो मरीज मिल चुके हैं। ये दोनों मरीज कर्नाटक से हैं। इनमे से एक शख्स 66 साल का विदेशी है जो 20 नवंबर को बैंगलुरु आया था। कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद इसे प्राइवेट होटल में आइसोलेट कर दिया गया, जिसके बाद 27 नवंबर को ये शख्स दुबई लौट गया। वहीं 46 साल का जो दूसरा शख्स ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित है, वो स्थानीय है और 22 नवंबर को ये पॉजिटिव पाया गया था। फिलहाल इनके संपर्क में आए लोगों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) के लिए भेजे गए हैं। अब आइये जानते हैं कि क्या होती है जीनोम सिक्वेंसिंग।

जीनोम सिक्वेंसिंग क्या है ?

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हेल्थ स्टार्टअप्स ने भारत के सेकेंडरी केयर सर्जरी मार्केट का लाभ उठाया। [IANS]

हेल्थकेयर स्टार्टअप्स (Healthcare Startups) ने भारत में स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ देश में सेकेंडरी केयर सर्जरी बाजार में तेजी ला दी है। सर्जरी स्वास्थ्य देखभाल खर्च और सेकेंडरी केयर सर्जरी के साथ बढ़ते बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है।

प्रिस्टिन केयर, प्रैक्टो और मिरास्केयर जैसे हेल्थकेयर स्टार्टअप्स ने ऐसे तकनीकी प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जो सस्ते दामों पर डॉक्टरों, ग्राहकों और अस्पतालों को जोड़ते हैं।

ये स्टार्टअप (Healthcare Startups) ऑनलाइन चिकित्सा सलाह प्रदान करते हैं और उसके बाद यदि आवश्यक हो तो देशभर के छोटे अस्पतालों में हर्निया, बवासीर, पित्त पथरी आदि जैसी बीमारियों के लिए गैर-महत्वपूर्ण न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की जरूरत होती है, जो महानगरों के बड़े अस्पतालों की तुलना में कम क्षमता पर चलते हैं।

प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care), जो जनवरी 2021 से लगभग पांच गुना बढ़ चुका है, इस क्षेत्र में अग्रणी है। इसमें 80 से अधिक क्लीनिकों, 400 से अधिक साझेदार अस्पतालों और 140 से अधिक इन-हाउस सुपर स्पेशियलिटी सर्जनों का एक पारिस्थितिकी तंत्र है। यह देशभर के 22 से अधिक शहरों में काम करता है।

हाल ही में आए मिरास्केयर क्लीनिक एंड सेंटर भी उन्नत सामान्य, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और प्रोक्टोलॉजी में उपचार की एक सीरीज प्रदान करता है।

Memorial Hospital Central, hopitals in india, online health facilities पूरे भारत में 2,000 बड़े आकार के अस्पतालों में पहले से ही ऐसी सुविधाएं हैं। [Wikimedia Commons]

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