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राजनीति

Uttar Pradesh Assembly elections 2022: कोरोना से उत्पन्न हुए रोष को चुनाव से पहले शांत कराने में जुटी भाजपा

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोरोना की दूसरी लहर में हुई असुविधाओं से उत्पन्न हुए रोष को शांत कराने में जुटी हुई है।

भाजपा कोरोना से उठे रोष को कम करने में जुटी हुई है।(Wikimedia Commons)

By: विवेक त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में होने वाले Uttar Pradesh Assembly elections 2022 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोरोना की दूसरी लहर में हुई असुविधाओं से उत्पन्न हुए रोष को शांत कराने में जुटी हुई है। अब चुनाव में महज कुछ माह ही शेष हैं। ऐसे में पार्टी कोई भी ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहती जिसका विपक्षी दल आराम से फायदा उठा सके। इसीलिए कार्यकतार्ओं से भावनात्मक संबंधों को मजबूत करने की कवायद चल रही है। अभी हाल में भाजपा की चली तीन दिन की बैठक में भी राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के सामने हुए फीड बैक में इस बार हुई कोरोना की समस्याओं को लेकर मुद्दा प्रमुखता से उठा। इसी के बाद उन्हीं के निर्देशन में तैयार हुई कार्ययोजना में यह मुद्दा प्रमुख है। इसी कारण प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव खुद पश्चिमी जिले बरेली, रामपुर, मुजफ्फरनगर समेत तमाम जिलों का दौरा किया वहां कार्यकतार्ओं के घरों में जाकर संवेदना दे रहे हैं। यह क्रम उनका लगातार जारी रहेगा। इसके अलावा महामंत्री संगठन सुनील बसंल भी इसी अभियान को आगे बढ़ाने में लगे हैं।


भाजपा के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में आमजन और कार्यकतार्ओं ने अपना बहुत कुछ खो दिया है। महामारी के दौरान लोगों को बेड न मिलना और ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतें के कारण एक नाकारात्मक माहौल बना है। इससे अपने कार्यकर्ता भी रूठ गए है। ऐसे में उन्हें मानाने और उनके साथ संवदेना का रंग गाढ़ा करने की कवायद हो रही है। गांव-गांव जाकर सभी के साथ दु:ख में संगठन खड़ा होंने का अहसास दिलाया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक विधानसभा में करीब 100 लोगों की सूची बनायी जाएगी जो कोरोना के कारण हुई अव्यवस्था से नाराज हैं। फिर उनके सुझाव लेकर उन्हें अमल किया जाएगा।

कोरोना महामारी के बाद उठे रोष में सभी राजनीतिक दल अपना-अपना तिकड़म लगा रहे हैं।(Pixabay)

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं,” 2017 के विधानसभा चुनाव में यह साफ संकेत मिला था कि समान्य, ओबीसी और अन्य लोगों ने भाजपा को वोट किया था। इसी कारण इन्हें तीन सौ ज्यादा सीटें मिली थी। दो साल बाद छुटपुट चीजों से भी लोग ज्यादा परेशान नहीं थे। इसी कारण 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से 63 सीटे मिली थी। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से आमजन शहर-ग्रामीणों को बहुत सारी परेषानियां झेलनी पड़ी। कई परिवारों से लोग दिवंगत हुए हैं। इसे लेकर नाराजगी लोगों में ज्यादा है। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। क्योंकि 6 माह में चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा का अब पूरी ताकत लगाकर लोगों की नाराजगी और सरकार के प्रति एंटी इंकम्बेंसी को दूर करने का प्रयास करना होगा। ”

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उन्होंने बताया कि विपक्ष घात लगाकर बैठा कि कब ऐसा मौका मिले कि उप्र में भाजपा को 2012 या उससे पहले वाली संख्या में पहुंचा दें। लोगों में नाराजगी है भाजपा उसे दूर करना चाह रही है। किसी परिवार में जो सदस्य चला गया है उसे वापस नहीं ला पाएंगे, लेकिन उनके घर जाकर संत्वना देना और परिवार को अश्वासन दिलाना होगा कि जो हुआ तो हुआ, लेकिन हम आपके साथ खड़े हैं। इस अश्वासन से भाजपा के थिंक टैंक को लगता है इससे आमजन की नाराजगी दूर होगी। राजीव ने बताया कि जिस चीज ने पिछले चुनाव में मदद की, विचारधारा, पार्टी लेवल, उन सभी समर्थकों, नेताओं की क्या नाराजगी है, उसे दूर करे। कोविड के दौरान हुई दिक्कतों से भाजपा को परेशानी है। उसे कम करने की कोशिश हो रही है। लोगों से आत्मीय संबंध बनाने का प्रयास भी चल रहा है। इसमें कितना सफल होंगे। यह तो आने वाला समय बताएगा। वरिष्ठ विष्लेषक पीएन द्विवेदी कहते हैं, ” कोरोना महामारी में लोगों का बहुत नुकसान हुआ है। ऐसे में भाजपा बूथ और मंडल लेवल के परिवारों तक पहुंचने से अच्छा संदेश जाएगा।”(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता ( wikimedia Commons )

अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ की एक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग 71% दर्ज की गई है यह जानकारी 'द मॉर्निंग कंसल्ट' ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए साझा की है। 'द मॉर्निंग कंसल्ट' के सर्वे के मुताबिक अप्रूवल रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत दुनिया भर के 13 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

मॉर्निंग कंसल्ट’ दुनिया भर के टॉप लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है। मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में नेताओं की रेटिंग पर नज़र रख रही है। रेटिंग पेज को सभी 13 देशों के नवीनतम डेटा के साथ साप्ताहिक रूप से अपडेट किया जाता है।

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अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' हिंदी में जल्द होगी रिलीज ( wikimedia commons )


हाल ही में रिलीज़ हुई अल्लू अर्जुन की फ़िल्म 'पुष्पा: द राइज़' को दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया इस फ़िल्म के आने के बाद से तमिल फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है। लोग उनकी फिल्म को खूब पसंद कर रहे हैं । अब दर्शकों को अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' को हिंदी में रिलीज होने का इंतजार है। यह फ़िल्म भगवान विष्णु की पौराणिक कहानी से प्रेरित है।
पुष्पा की तरह फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' से भी दर्शक जुड़ाव महसूस करें इसके लिए मेकर्स ने इस फ़िल्म के टाइटल के मायने भी बताए।

फिल्म निर्माण कम्पनी ‘गोल्डमाइंस टेलीफिल्म्स’ ने अपने ट्विटर हैंडल पर फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु'का मतलब बताते हुए लिखा की “अला वैकुंठपुरमुलु पोथन (मशहूर कवि जिन्होंने श्रीमद्भागवत का संस्कृत से तेलुगु में अनुवाद किया) की मशहूर पौराणिक कहानी गजेंद्र मोक्षणम की सुप्रसिद्ध पंक्ति है। भगवान विष्णु हाथियों के राजा गजेंद्र को मकरम (मगरमच्छ) से बचाने के लिए नीचे आते हैं। उसी प्रकार फिल्म में रामचंद्र के घर का नाम वैकुंठपुरम है, जहाँ बंटू (अल्लू अर्जुन) परिवार को बचाने आता है। अला वैकुंठपुरमुलू की यही खूबी है।”

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फ़िल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी (Wikimedia Commons)

दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए ये साल काफी व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो प्रतिबद्धताएं हैं वह 2023 के अंत तक ऐसे ही रहने वाली हैं।

साल 2022 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए बहुत व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल राम रेड्डी की बिना शीर्षक वाली फिल्म, कानू भेल की 'डिस्पैच', अभिषेक चौबे की फिल्म और राहुल चितेला की फिल्म जैसे नए प्रोजेक्ट के लिए बैक-टू-बैक शूटिंग करेंगे।


मनोज बाजपेयी ने हाल ही में दो प्रोजेक्ट को खत्म किया है, एक रेड्डी की अभी तक बिना शीर्षक वाली फिल्म के साथ, जिसमें दीपिक डोबरियाल भी हैं। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों पर हुई फिर, उन्होंने कानू बहल द्वारा निर्देशित आरएसवीपी के 'डिस्पैच' को समाप्त किया, जो अपराध पत्रकारिता की दुनिया में स्थापित एक खोजी थ्रिलर है।

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