इंसानों की तरह बुद्धि रखने वाला कूड़ादान!

इंसानों की तरह बुद्धि रखने वाला कूड़ादान!
कृत्रिम बुद्धि की मदद से इंसानों के तरीके बुद्धिमानी से कार्य करता है डस्टबिन। (प्रतीकात्मक चित्र, Wikimedia Commons)

वर्तमान में सरकार भारत को स्वच्छ करने के लिए नए तरीके अपना रही हैं। सरकार के अलावा अन्य संस्थान भी अपने तरीके से टेक्नोलॉजी की सहायता लेकर ऐसा करने का प्रयास कर रही हैं। इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) के एक फैकल्टी और उनकी टीम ऐसा कूड़ेदान बनाया है जो इंसानों की तरह व्यवहार करता है और कृत्रिम बुद्धि की मदद से बुद्धिमानी से काम करता है। जामिया के इस नए अविष्कार को ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बौद्धिक संपदा के रूप में पेटेंट प्रदान किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डस्टबिन को पेटेंट कार्यालय, ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बौद्धिक संपदा के रूप में पेटेंट प्रदान किया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) के एक फैकल्टी ने बनाया है स्मार्ट कूड़ादान (Twitter)

'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड डस्टबिन' शीर्षक के आविष्कार का मुख्य उद्देश्य कूड़ेदान को उसमें फेंके गए विस्फोटक, रेडियोधर्मी सामग्री आदि जैसी हानिकारक वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम बनाकर उसे स्मार्ट बनाना है। सेंसर डस्टबिन के साथ लगे होते हैं जो इसमें डंप की गई किसी भी हानिकारक वस्तु के बारे में संकेत भेजकर सूचित करेंगे।

जामिया मिलिया इस्लामिया के फैकल्टी डॉ. मनसफ द्वारा यह आविष्कार किया गया है। इसमें डॉ. किरण चौधरी, शिवाजी कॉलेज, डीयू और अन्य संस्थानों के शोधकर्ता भी टीम का हिस्सा थे। डॉ आलम एसोसिएट प्रोफेसर, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, और आईओटी प्रयोगशाला, कंप्यूटर विज्ञान विभाग भी इसमें शामिल रहे हैं। डॉ आलम ने कहा हमने इस कूड़ेदान को सुरक्षा पहलू को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है जिससे कूड़ेदान इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं और कृत्रिम बुद्धि की मदद से बुद्धिमानी से काम करते हैं। यह निश्चित रूप से समाज के लिए एक उपयोगी उत्पाद होगा।

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आपको बता दें, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए ने दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में जामिया के 16 शोधकर्ताओं को शामिल किया है। यह सूची कुछ स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एमिनेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर जॉन इओनिडिस के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा तैयार की गई है। इसे एल्सेवियर बीवी, विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय ने प्रकाशित किया है।

भारत से कुल 3352 शोधकर्ताओं ने इस सूची में स्थान पाया जो वैश्विक शोध मंच पर देश के बहुमूल्य प्रभाव का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें से 16 शोधकतार्ओं जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) से संबंधित है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा दो अलग-अलग सूचियां जारी की गईं। पहली प्रतिष्ठित सूची करियर-लॉन्ग डेटा पर आधारित है जिसमें 08 जामिया प्रोफेसरों ने अपनी जगह बनाई। वर्ष 2020 के प्रदर्शन की दूसरी सूची में संस्थान के 16 वैज्ञानिक हैं।

input : आईएएनएस ; Edited by Lakshya Gupta

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