चुनाव से पहले प्रियंका गाँधी ने खुद को हिंदुत्व की बहँस अलग किया

चुनाव से पहले प्रियंका गाँधी ने खुद को हिंदुत्व की बहँस अलग किया
प्रियंका गाँधी (Wikimedia Commons)

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा(Priyanka Gandhi Vadra) ने 'हिंदूवाद बनाम हिंदुत्व(Hindutva)' बहस से खुद को दूर कर लिया है, और कहा है कि पूरे मामले पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खर्शीद का विचार व्यक्तिगत था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, उन्होंने संवेदनशील बहस से खुद को दूर करने की कोशिश की है।

कामतानाथ मंदिर की 'परिक्रमा' करने और पूजा-अर्चना करने के बाद चित्रकूट में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "कोई भी इसे मेरे लिए परिभाषित नहीं कर सकता, यह मेरा विश्वास है, यह उनकी निजी राय है।"

हिंदुत्व की बहस के मुद्दे पर कांग्रेस(Congress) को पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को मनीष तिवारी ने कहा था कि कांग्रेस को इस तरह की बहस में नहीं पड़ना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा की कांग्रेस को दार्शनिक रूप से इस बहस में शामिल नहीं होना चाहिए जो इसकी मूल विचारधारा से मीलों दूर है। उन्होंने कहा कि उदारवाद और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखने वालों को पार्टी में होना चाहिए, नहीं तो अगर आप धर्म को राजनीति का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो आपको दक्षिणपंथी पार्टियों में होना चाहिए न कि कांग्रेस में, जो धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती है।

तिवारी ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी को अपनी मूल विचारधारा पर टिके रहना चाहिए और इससे विचलित नहीं होना चाहिए क्योंकि अतीत में पार्टी के नेताओं ने भाजपा का मुकाबला करने के लिए 'नरम-हिंदुत्व' की लाइन पर चलने की कोशिश की थी।

प्रियंका ने राज्य चुनावों से पहले नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश की और विवाद से खुद को दूर कर लिया क्योंकि वह खुद उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का नेतृत्व कर रही हैं। वह अब तक राज्य के सभी महत्वपूर्ण मंदिरों के दर्शन कर चुकी हैं। बुधवार को उन्होंने चित्रकूट के कामतानाथ के दर्शन किए और रामचट में महिला संवाद भी किया।

सलमान खुर्शीद (Wikimedia Commons)

प्रियंका गाँधी का यह बयान तब आया है जब उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद(Salman Khurshid) ने अपनी नई किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन अवर टाइम्स' में 'द केसर स्काई' के एक अंश में लिखा है कि सनातन धर्म और संतों के लिए जाने जाने वाले शास्त्रीय हिंदूत्व को एक मजबूत संस्करण द्वारा एक तरफ धकेला जा रहा है। सभी मानक हाल के वर्षों के आईएसआईएस और बोको हराम जैसे समूहों के जिहादी इस्लाम के समान राजनीतिक संस्करण लगते हैं।

पिछले दिनों राहुल गांधी ने भी एक पार्टी समारोह में बोलते हुए कहा कि जैसा कि हम जानते हैं कि हिंदू धर्म, और हिंदुत्व में क्या अंतर है? क्या वे एक ही चीज हैं? अगर वे एक ही चीज हैं, तो उनका एक ही विवरण क्यों नहीं है ? उनके अलग-अलग नाम क्यों हैं? आप हिंदू धर्म शब्द का उपयोग क्यों करते हैं, हिंदुत्व का उपयोग क्यों नहीं करते, अगर वे एक ही चीज हैं? वे स्पष्ट रूप से अलग चीजें हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सलमान ख्रुशीद से असहमति जताई और नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश की। आजाद ने एक बयान में कहा कि हम हिंदुत्व की समग्र संस्कृति से अलग राजनीतिक विचारधारा के रूप में सहमत नहीं हैं, लेकिन हिंदुत्व की आईएसआईएस और जेहादी इस्लामिस्ट से तुलना करना तथ्यात्मक रूप से गलत और एक अतिशयोक्ति है।

Input-IANS ; Edited By- Saksham Nagar

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