कांग्रेस का सहारा महिला वोटबैंक हमारा!

कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने महिलाओं को लुभाने के लिए चले हैं कई बड़े दाव।(Wikimedia commons)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने महिलाओं को लुभाने के लिए चले हैं कई बड़े दाव।(Wikimedia commons)

ये मजमों में नई-नई घोषणायें करने वाले हैं।

सेक्युलर का प्रमाण देने वाले तो मंदिर-मंदिर भी जाने वाले हैं।

सुना है, चुनाव आने वाले हैं।।

यह कविता एक समय इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रही थी तभी हमने सोचा क्यों ना आज इसी पर एक विस्तृत रिपोर्ट आपके सम्मुख पेश करी जाए क्योंकि वर्तमान समय में कुछ ऐसा ही हो रहा है। "चुनाव आने वाले हैं" यह देख आप समझ गए होंगे कि उत्तर प्रदेश चुनाव से संबंधित यह लेख होने वाला है। दरअसल इतिहास की सबसे पुरानी पार्टी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी जो हालांकि वर्तमान में इतिहास बनने की कगार पर है उसकी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश की चुनावी नब्ज टटोल रही हैं। आपको बता दें लोकसभा चुनाव 2019 और 2017 विधानसभा चुनाव में यह साफ जाहिर हो चुका हैं कि कांग्रेस अपनी चुनावी जमीन पूरी तरीके से खो चुकी है। इसलिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने कई ऐसे ऐलान करें हैं जो वह कांग्रेस शासित राज्यों में स्वयं व लेना पूरा करा पाए लेकिन चुनावी राज्य में दावा जरूर ठोका है।

कांग्रेस अबकी बार आधी आबादी को साधने की तैयारी में है है। काग्रेस के इस नए दांव को नौकरी पेशा वर्ग की महिलाओं और गृहणियों को आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसके कई उदाहरण साफ तौर पर देखे गये हैं। वो बाराबंकी में प्रतिज्ञा यात्रा का शुभारंभ करने पहुंचीं सड़क पर बैठी बालिकाओं से मुलाकात की। इसके बाद धान के खेत पर पहुंचीं। यहां पहले से मौजूद महिलाओं से चर्चा की। उनके साथ खाना भी खाया। आपको बता दें इसके पहले प्रियंका वाड्रा ने लड़की हूं लड़ सकती हूं एवं महिलाओं को 40 फीसद टिकट के साथ महिलाओं को लुभाने के लिए कई वादे किए थे।

राजनीतिक विषेषज्ञों की मानें तो खासकर यहां की राजनीति जाति-धर्म पर आधारित है जिसमें महिलाएं मुद्दा नहीं होती हैं। राजनीति में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता अभी भी सर्व स्वीकार्य नहीं है और अक्सर पुरुष रिश्तेदारों के हस्तक्षेप के कारण कई सवाल उठाए जाते हैं। इसके उदाहरण महिला प्रधान तो पुरूष ही उसका काम देखते है। जिला पंचायत से लेकर ब्लाक प्रमुख हर जगह यही चीजें देखने को मिलती रही है, लेकिन कुछ जगह बदलाव भी हो रहे हैं।

राजनीति के जानकार प्रसून पांडेय कहते हैं कि प्रियंका के इस दांव से नई प्रतिभा सामने आएगी। 40 प्रतिशत सिर्फ महिलाओं को टिकट देने की बात करके उन्हें एक बड़ा गेम खेला है। अभी भाजपा, सपा, बसपा के मुकाबले भी कांग्रेस का जमीन में संगठन भी उतना मजबूत नहीं है। इसके लिए कांग्रेस संगठन मजबूत करने की बहुत जरूरत है। उनके इस वादे से दूसरे दल किसी न किसी रूप में महिलाओं कुछ नया करने प्रयास करेंगे। जैसे घोषणापत्र में महिलाओं के लिए कुछ नयी घोषणा महिलाओं के लिए कर सकते हैं।

हलांकि भाजपा की प्रवक्ता साक्षी दिवाकर कांग्रेस के इन वादों को खोखला मान रही है। उनका कहना है कि पहले इनकी जहां सरकारें वहीं सारे वादों को लागू करना चाहिए। चाहे छत्तीसगढ़ और राजस्थान वहां पर यह लागू करना चाहिए। राजस्थान में महिलाओं की हालत किसी से छिपी नहीं है। अपनी सरकारों के समय जो यहां की दुर्दशा कांग्रेस ने की है वह किसी से छिपी नहीं है। भाजपा सरकार उसे ठीक कर रही है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मोदी और योगी सरकार ने बहुत सारे काम किए हैं।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह का कहना है कि प्रियंका गांधी यूपी की प्रभारी है इसीलिए उन्होंने 40 प्रतिशत महिलाओं के टिकट के आरक्षण बात कर रही है। इसके बाद उनके सुझाव पर केन्द्रीय नेतृत्व अन्य राज्यों पर भी करेगा। छत्तीसगढ़ में हम 2500 वहां धान की कीमत दे रहे हैं। वहां पर गोधन योजना चल रही है। कर्जमाफी भी गयी है। भाजपा ने महिलाओं से किए गये एक भी वादे पूरे नहीं कर पायी इसीलिए वह बौखला गए हैं। उन्होंने बताया कि बनारस और गोरखपुर की रैली में जिस प्रकार से महिलाओं की भागीदारी देखकर परेषान है। अगर एक महिला महिलाओं के सषक्तिकरण की बात कर रही हैं तो इससे अन्य राजनीतिक दल परेशान क्यों हो रहे हैं।

खैर राजनीति तो अपनी जगह चलती रहेगी लेकिन यह वक्त बताएगा कि प्रियंका के वादे में कितना दम था की महिला वोट बैंक उनकी तरफ गया। जिसका जवाब यूपी विधानसभा चुनाव के परिणाम ही बता सकते हैं। लेकिन नेताओं को इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि वह जनता से ऐसे वादे करें जो पूरे हो सके ना कि जुमले छोड़े जाए।

Input: आईएएनएस; Edited By: Lakshya Gupta

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