कुंभ मेले के बहाने तबलीगी जमातियों को क्लीन चिट देना निरर्थक

कुंभ मेले के बहाने तबलीगी जमातियों को क्लीन चिट देना निरर्थक
साधुओं की तुलना जमातियों से करना कहीं से भी जायस नहीं है. (File Photo)

हिंदू धर्मं के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है कुंभ मेला. 1 अप्रैल को शुरू होकर 30 अप्रैल को इसे समाप्त होना था पर कोरोना महामारी के चलते इसे खत्म किए जाने की घोषणा हो चुकी है. सालों-साल से लाखों की संख्या में भक्त यहां आते हैं, गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं और इसके तट पर पूजा-अर्चना करते हैं. हालाकिं कोरोना के चलते इस बार माहौल थोड़ा खराब हो गया और शाही स्नान में शामिल होने वाले सैकड़ों लोगों में संक्रमण भी फैला.

लेकिन इसी बात की आड़ लेकर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हिंदू धर्मं के प्रति अपने कुभाव और सामाजिक समन्वय खराब करने का काम कर रहें हैं. बॉलीवुड में फ्लॉप रही एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं और कहा है कि जो लोग तबलीगियों से नाराज़ थे, अब खुद से सवाल क्यों नहीं पूछते. अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर राम गोपाल वर्मा भी पीछे नहीं रहे. उन्होंने ट्वीट किया- 'लाखों लोग कुम्भ मेले में अपने कर्म धोने के लिए डुबकी लगा रहे हैं और आशीर्वाद के रूप में कोविड पा रहे हैं. यही लोग आगे कोविड फैलाएंगे और आगे चलकर मर जाएंगे'.

क्या लिब्रलधारी तबका कुम्भ के जरिए तबलिगी जमात के काले करतूतों को छुपाना चाहता है?(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

तो वहीं दलित नेता उदित राज भी फेक न्यूज़ फैलाते हुए दिखे. उन्होंने एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा कि 1500 तबलिगी जमात भारत में कोरोना जेहाद कर रहे थे और अब लाखों साधू जुटे कुम्भ में उस जेहाद और कोरोना से निपटने के लिए. जबकि ये तस्वीर फेक साबित हुई. एक नज़र अगर जमातियों की हरकत पर डाली जाए तो ये साफ़ हो जाएगा की कुंभ में आए साधुओं से उनकी तुलना कितनी निरर्थक है. इन्ही जमातियों ने पहले तो कोरोना ब्लास्ट किया और जब उपचार की बारी आई तो सरकारी अस्पतालों में बेड तोड़ डाले. महिला कर्मचारियों को छेड़ने के भी आरोप सामने आए तो कई जमातियों के अस्पताल में गंदगी फैलाते हुए वीडियो भी दिखे.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अगरवाल ने बताया कि तबलीगी जमात से संबंधित मरीज देश के 23 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि देश में करीब 30% कोरोना मरीज सिर्फ तबलीगी जमात से संबंधित हैं. यही नहीं, कोविड-19 मरीजों की संख्या के लिहाज से टॉप 10 राज्यों में पांच राज्य ऐसे हैं जहां जमाती मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है.

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