भारत के हितैषी, पाक मीडिया के सामने कर रहे हैं हाय-तौबा!

भारत के हितैषी, पाक मीडिया के सामने कर रहे हैं हाय-तौबा!
(NewsGram Hindi, साभार: Wikimedia Commons)

कुछ ही समय पहले कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक क्लब हाउस चैट, सोशल मीडिया पर लीक हुआ है। इस चैट में कांग्रेस के नेता कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद वापस अनुच्छेद 370 को बहाल करने की बात कह रहे हैं।

आपको बता दें कि दिग्विजय सिंह क्लब हाउस चैट पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। इसी बीच एक पाकिस्तानी पत्रकार शाहजेब जिल्लानि ने कहा की कश्मीर में जिस तरह से राजनीतिक समीकरण बदला है उससे 'मैं हैरान और सदमे में हूँ'। मजे की बात यह है कि शाहजेब कभी भारत नहीं आए। साथ ही 'पाकिस्तानी' पत्रकार ने यह आरोप भी लगाया की भारत में सरकार ने पत्रकारिता को कब्जे में कर रखा है।

आपको यह भी बता दें कि शाहजेब पाकिस्तान से नहीं, 'जर्मनी' में रह कर यह बोल रहे थे। पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया की भारत द्वारा अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद ही भारत-पाकिस्तान में सबंध बिगड़े हैं। लेकिन सवाल यह कि क्या संबंध सुधरे कब थे? अब, क्योंकि पाकिस्तान के पत्रकार ने सवाल पूछा था और भारत 'सरकार' के विरोध में पूछा था, इस पर विपक्ष के नेता दिग्विजय सिंह का खुश होना स्वाभाविक था।

क्या कहा दिग्विजय सिंह ने?

नेता विपक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि " मैं मानता हूँ कि जो चीज समाज के लिए खतरनाक है, वह धार्मिक कट्टरवाद है, चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख या कुछ भी हो। धार्मिक कट्टरवाद नफरत की ओर ले जाता है और नफरत से हिंसा फैलती है। इसलिए मुझे लगता है कि धार्मिक कट्टरवाद द्वेष, बीमारी और वायरस है। प्रत्येक समाज और धार्मिक समूह को यह समझना होगा कि हर व्यक्ति को अपनी परंपरा और विश्वास का पालन करने का अधिकार है। किसी को भी अपनी आस्था, भावनाएँ और धर्म किसी पर थोपने का अधिकार नहीं है।"

(पुरे चैट को सुनने के लिए दिए गए ट्विटर आईडी पर क्लिक करें)

दिग्विजय सिंह ने कश्मीरी पंडितों और हिन्दू राजा को याद करते हुए कहा कि " जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाया गया, तब कश्मीर में लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया था। इस दौरान इंसानियत को दरकिनार किया गया और इसमें कश्मीरियत नहीं थी। सभी को काल कोठरी में बंद कर दिया गया था। मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हिन्दू राजा था और दोनों साथ काम करते थे। और कश्मीरी पंडितों को आरक्षण दिया गया था।"

दिग्विजय सिंह ने कश्मीर में हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात को क्लब हाउस चैट में तो उठाया, किन्तु दिग्विजय सिंह जिस पार्टी से नाता रखते हैं, उसके नेता और स्वयं दिग्विजय सिंह इस सवाल से क्यों भागते हैं जब उनसे यह पूछा जाता है कि कितने विस्थापित कश्मीरी पंडितों को यूपीए सरकार ने पुनर्स्थापित कराया? अनुच्छेद 370 हटने से पहले क्यों देश के सुरक्षा बलों को आतंकियों को मारने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता था? और क्यों आज के कश्मीर में पत्थरबाजी और देश विरोधी नारों के शोर कम हो गए हैं? साथ ही क्यों हाल ही में आतंकियों द्वारा मारे गए कश्मीरी पंडित और भाजपा नेता राकेश पंडित पर उनके दो शब्द नहीं निकले?

कौन है यह पत्रकार?

आपको बता दें कि जिन पत्रकार महोदय ने न कभी भारत दर्शन किया, उन्हें भारत की राजनीति के विषय में चिंता हो रही है और वह भी जर्मनी में बैठे-बैठे। ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार, जिल्लानी बीबीसी के पूर्व संवाददाता हैं। और अभी वर्तमान में डीडब्ल्यू न्यूज के साथ काम कर रहे हैं।

बहरहाल, दिग्विजय सिंह पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं, दिग्विजय सिंह ही वह व्यक्ति है जिन्होंने 'हिन्दू टेररिज्म' या 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों का सबसे पहले प्रयोग किया था और यहां तक की वह 'आर.एस.एस की साजिश- 26/11', किताब के विमोचन में भी गए थे। जिसमें इस आतंकी हमले का कसूरवार सी.आई.ए, मोसाद और आर.एस.एस को ठहराया गया।

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