क्या अरविंद केजरीवाल ‘चंदाचोर’ है ?

क्या अरविंद केजरीवाल ‘चंदाचोर’ है ?
अरविंद केजरीवाल (Wikimedia Commons)

By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार

जिस प्रकार बरसात का मौसम आते ही मेंढक कुएं-पोखर, जोहड़-नालों से बाहर निकलकर आवाज़ करने लगते हैं, उसी प्रकार चुनाव आते ही केजरीवाल(Arvind Kejriwal) उर्फ़ केजरूद्दीन जैसा चंदाचोर, महाधूर्त तथा ऐसे एजेंट जोकि देश की जनता के समक्ष ईमानदार देशभक्त होने की अपनी रटी-रटाई झूठी स्क्रिप्ट और सत्य-आभासी भाव-शैली से देश की जनता को मंत्रमुग्ध तथा भाव-विभोर कर वोट बटोरने में लग जाता है, फिर फ्री बिजली-पानी एवं डीटीसी बस में निःशुल्क यात्रा के चक्कर में देश की मासूम जनता भी उसके फेंके कथित राजनीतिक पासों के झांसे में आकर उसे ही वोट कर देती है।

तत्पश्चात, दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के पर्दे पर देश के शहीद क्रांतिकारियों सुभाष, आजाद, भगतसिंह का बैनर चस्पा कर अन्ना हजारे(Anna Hazare) जैसे बेहद सरल, निष्कपट, ईमानदार और राष्ट्रवादी शख्सियत को उल्लू बना कर अपने बीवी बच्चों की झूठी सौगंध खाकर केजरूद्दीन राष्ट्र विरोधी ताकतों अपने विदेशी आकाओं के इशारे पर अमल करता हुआ मुख्यमंत्री की द्वितीय पारी में धीरे-धीरे दिल्ली की सभी मस्जिदों के इमाम (मौलवियों) तथा उनके सहायकों का वेतन प्रतिमाह बढ़ाकर ₹18000 एवं ₹9000 करने के साथ ही दिल्ली की जनता के विकास, सड़क, शिक्षा, रोजगार, राशन-पानी, बिजली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को दरकिनार कर लगभग 100 करोड़ की लागत से स्कूल-अस्पताल बनाने की बजाय विभेदकारी हज़-हाउस और अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्याओं को वोट बैंक की खातिर दिल्ली में बसाकर फ्री-बिजली, पानी और राशन कार्ड की सुविधा दे रहा है।

जिसका परिणाम कालांतर में देश-दिल्ली की अवाम और उनकी अगली पीढ़ी को ही अंततः भुगतना पड़ेगा। जिन्होंने अपनी मासूमियत की खातिर केजरूद्दीन एजेंट जैसे फर्जीवाल की "आप" पार्टी(Aam Aadmi Party) को दिल्ली(Delhi) की सत्ता सौंपकर अपने ही आने वाले कल की बर्बादी की पटकथा तैयार कर दी है। जिसकी चाल चरित्र और चेहरा ही उसके महज चुनावी विकास-राष्ट्रवाद के नारे से कतई मेल नहीं खाता ।

केजरीवाल एजेंट उपरोक्त कथित अपनी झूठी देशभक्ति, ईमानदारी और फ्री बिजली-पानी का झुनझुना अपने मंत्रमुग्धयुक्त झूठे वक्तव्यों से यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा के चुनाव में बजाता घूम रहा है। जबकि चुनाव पश्चात केजरूद्दीन को करना वही है जो उसे राष्ट्र विरोधी ताकतों उसके आकाओं द्वारा सिखाया-पढाया गया है। केजरूद्दीन की पंजाब की एक हालिया प्रेस कान्फ्रेंस से केजरूद्दीन की उक्त कथनी-करनी सत्य प्रमाणित भी हो चुकी है। जिसमें वह मीडिया को एक और जहां केंद्र सरकार से लाख मतभेद होने पर सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ खड़े होने का वाक्छल अपने मुखारविंद से कर रहा है, वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के आतंकवादियों पर भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगता है। ये वही केजरूद्दीन है जिसने किसान आंदोलन की आड़ में चले राष्ट्र विरोधी आंदोलन के षड्यंत्रकारी खालिस्तानी धड़े द्वारा दिल्ली के लाल किले की प्राचीर पर देश की आन-बान-शान तिरंगे को उतारकर खालिस्तानी झंडा फहराने वालों के लिए फ्री बिजली-पानी की व्यवस्था की थी।

ये वही केजरूद्दीन है जिसने दिल्ली के सभी जिला में गीता ग्रंथ को विस्मृत कर उर्दू के प्रचार-प्रसार हेतु महज उर्दू लर्निंग सेंटर खोलने का निर्णय लिया है।

कहने का लब्बोलुआब यह है कि देश-दिल्ली के लोगों को केजरूद्दीन के साधु वेश में छुपे रावण और उसकी सोद्देश्यपूर्ण कुमंशा-धारणा को पहचानना होगा। उन्हें केजरूद्दीन के हर शब्द-वक्तव्य को ध्यानपूर्वक संधि-विच्छेद के मार्फत उसके गूढ़ मंतव्यों को डिकोड करना होगा। उन्हें अतिशीघ्र यह समझना होगा कि केजरूद्दीन के अन्ना-आंदोलन की पृष्ठभूमि क्या थी और अब सत्ता हासिल करने उपरांत वह एक धर्म विशेष की हिमायत-किफायत और तिज़ारत हेतु कार्य कर रहा है। साथ ही राष्ट्र की एकता-अखंडता हेतु आमजन को ही यह समझना होगा और केजरीवाल उर्फ केजरूद्दीन व उसकी आम आदमी पार्टी के कथित कुकर्मों, कारनामों, राष्ट्र विरोधी हरकतों एवं वर्ग विशेष के हितकारी के कृत्यों-फैसलों पर निरंतर नजर रखते हुए उसका पर्दाफाश कर उसे सत्ता में आने से रोककर राष्ट्र को सुदृड़-सुरक्षित करना होगा। अन्यथा सुभाष, भगत सिंह, आजाद, पटेल, तिलक जैसे शहीद क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी देशभक्त अब कदाचित् अवतार नहीं लेंगे।

अस्वीकरण- इस लेख में प्रस्तुत किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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