एक तिहाई से अधिक बच्चों के पास नहीं है इंटरनेट की सुविधा!

एक तिहाई से अधिक बच्चों के पास नहीं है इंटरनेट की सुविधा!
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इंटरनेट का उपयोग दोगुना से अधिक हो गया है (WIKIMEDIA COMMONS)

पिछले साल कोविड प्रेरित लॉकडाउन के दौरान, स्कूलों ने बच्चों को संक्रामक बीमारी से बचाने और उनके पाठों के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए अपनी कक्षाओं को ऑनलाइन स्थानांतरित कर दिया था। लेकिन शुक्रवार को एक रिपोर्ट आई है जो सरकार एवं समाज से कई प्रश्न करती है? दरअसल रिपोर्ट से पता चला है कि उस अवधि के दौरान भारत में एक तिहाई से अधिक बच्चों की इंटरनेट तक पहुंच नहीं थी। अब आप लोग यह सोचिए जबकि किसी वस्तु का माध्यम ही नहीं होगा तो वह वस्तु का प्रवाह कैसे संभव होगा? अर्थात बिना इंटरनेट के ऑनलाइन शिक्षण कार्य कैसे हो सकता है?

डिजिटल नीति के मुद्दों पर काम करने वाले एक क्षेत्रीय थिंक टैंक, लिरनेशिया की रिपोर्ट के अनुसार एक आर्थिक नीति थिंक टैंक, आईसीआरआईईआर के साथ साझेदारी में ने दिखाया कि नामांकित स्कूली बच्चों वाले सभी परिवारों में से 64 प्रतिशत के पास इंटरनेट का उपयोग था जबकि शेष 36 प्रतिशत के पास इंटरनेट की पहुंच नहीं थी। बता दें, शोध में 350 गांवों और वार्डो सहित पूरे भारत में 7,000 घरों का एक सर्वेक्षण शामिल था।


36 प्रतिशत के पास नहीं थी इंटरनेट की पहुंच (Wikimedia commons)

इंटरनेट वाले परिवारों में, 31 प्रतिशत बच्चों के किसी न किसी प्रकार की दूरस्थ शिक्षा प्राप्त करने की संभावना थी, जबकि इंटरनेट के बिना केवल 8 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की दूरस्थ शिक्षा प्राप्त हुई है। उसी समय, लिरनेशिया द्वारा किए गए एक हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है कि पिछले चार वर्षों में इंटरनेट का उपयोग दोगुना से अधिक हो गया है और यह कि कोविड से संबंधित लॉकडाउन ने कनेक्टिविटी की बढ़ती मांग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

15-65 आयु वर्ग की आबादी में, 49 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग किया था, जबकि 15-65 आयु वर्ग की आबादी के केवल 19 प्रतिशत ने 2017 के अंत में इसका दावा किया था। इससे पता चला कि 2020 और 2021 में 130 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता ऑनलाइन आए। 2020 में इंटरनेट का उपयोग शुरू करने वाले लगभग 80 मिलियन में से 43 प्रतिशत या 34 मिलियन से अधिक ने कहा कि उन्होंने कोविड संकट के कारण ऐसा करना शुरू कर दिया।

लिरनेशिया के सीईओ हेलानी गलपया ने एक बयान में कहा, "अगर हम केवल लोगों के जुड़ने के बारे में सोचते हैं, तो भारत बहुत प्रगति कर रहा है। लेकिन 'डिजिटल इंडिया' के वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचने से पहले व्यवस्थित और संरचनात्मक बदलाव की जरूरत है।

input : आईएएनएस ; Edited by Lakshya Gupta

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