कहानियां सोचने पर मजबूर करती हैं

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, PIB)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, PIB)

By: मोहम्मद शोएब

 पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में उन लोगों की तारीफ की जो कहानी सुनाने की भारतीय परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई मां अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिालने के लिए कहानी सुना रही होती है, तब देखें।

पीएम मोदी ने मन की बात में बेंगुलरू के विक्रम श्रीधर के बारे में भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि, बंगलूरू में एक विक्रम श्रीधर हैं, जो बापू से जुड़ी कहानियों को लेकर बहुत उत्साहित हैं, और भी कई लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे होंगे। आप जरूर उनके बारे में सोशल मीडिया पर शेयर करें।

विक्रम श्रीधर ने आईएएनएस को बताया, आज मैं बहुत खुश हूं, गर्व भी महसूस हो रहा है। 2017 में मैंने नौकरी छोड़ दी थी, क्योंकि मैं उस वक्त पार्ट टाइम स्टोरी टेलिंग करता था। नौकरी छोड़ने के बाद अब सिर्फ स्टोरी टेलिंग ही करता हूं। समय के साथ स्टोरी टेलिंग का स्टाइल बदल गया है।

उन्होंने बताया, इस प्रोफेशन में पुरुष की संख्या बहुत कम है, चुनौतियां भी हैं। ये काम आसान नहीं, ये हमारी एक परंपरा है। मैं देखता हूं हर जगह लोग परेशान है, दुखी है। क्यों ? हमेशा खुश रहो।

हमारे इस काम के बारे में लोग जागरूक है, लेकिन उतना नहीं। क्योंकि ये स्टोरी टेलिंग हमारी हमारी परंपरा है। इसमें भले ही पैसा न हो, लेकिन दिल बड़ा होना बहुत जरूरी होता है।

विक्रम श्रीधर, स्टोरी टेलर (विक्रम श्रीधर, Facebook)

मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं, एक दिन एक कहानी सुनो और सुनाओ क्योंकि ये एक थैरेपी है। आपको कभी डॉक्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपको सुकून मिलेगा।

नोएडा निवासी ऋतुपरना घोष 15 सालों से कहानी सुनाती आ रहीं हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया, हमारे पास कहानी सुनने के लिए वक्त ही वक्त है, क्योंकि हम हर रोज एक कहानी जीते हैं। कहानियां हमें एक समय में कई सारी जिंदगी से रूबरू करातीं हैं। हम कहानी सुनते व़क्त एक ही समय पर दूसरा किरदार भी निभा सकते हैं।

पीएम मोदी ने भी कहा कि ये एक पुरानी परंपरा है, पहले स्टोरी टेलिंग ओरल फॉर्म में ही होती थी। किताबों में कहानियां छपने के बाद ओरल फॉर्म कम हो गया, क्योंकि लोग किताबों में ही कहानी पढ़ने लगे। अब बहुत सारे माध्यम हो गए हैं कहानी सुनने के, पसंद, नपसंद भी बढ़ने लगी है।

स्टोरी टेलर लोगों को कहानी सुनाते वक्त अपने हिसाब से कहानियों में बदलाव कर सकता है। कहानी सोचने और खुद सीखने पर मजबूर करती हैं।

पीएम मोदी से पहले हमें तमाशा मूवी के वक्त हम लोगों को याद किया गया था। लोगों के मन मे सवाल थे, लोग स्टोरी टेलर क्यों बनना चाहते हैं।

आज के समय में बहुत सारे स्टोरी टेलर्स हैं। हर शहर में अब एक ग्रुप है जो स्टोर टेलिंग करता है, छोटे छोटे जगहों से लोग अब आने लगे हैं।

एक और स्टोरी टेलर। (विक्रम श्रीधर, Facebook)

नोएडा निवासी आशिमा मिश्रा एक स्टोरी टेलर हैं जो छोटे बच्चों को कहानियां सुनाती हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया, मेरे हिसाब से जब बच्चा पैदा होता हैऔर उसके आखिरी सफर तक हम कहानियों से बने हैं। कहानियों के बेसिस पर हमारे किरदार पर प्रभाव पड़ता है।

बच्चों को कुछ समझाने के लिए अगर आप उन्हें बोलोगे तो वो नहीं सुनते, लेकिन बच्चों को कहानियां सुनाकर समझाए तो वो जल्द समझ जाते हैं।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के दौरान रविवार को कहानी कहने की कला यानी स्टोरी टेलिंग पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में किस्सा-गोई की समृद्ध परंपरा रही है। हमें जरूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधायें बनाई थी, वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। ऐसी ही एक विधा जैसे मैने कहा, कहानी सुनाने की कला स्टोरी टेलिंग।(आईएएनएस)

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