गंगा से जोड़ी जाएंगी झारखंड की दो नदियां, राज्य के कई जिलों को होगा फ़ायदा

झारखंड की दो नदियों दामोदर एवं सस्वर्णरेखा को गंगा नदी से जोड़ा जाएगा ( Pixabay )
झारखंड की दो नदियों दामोदर एवं सस्वर्णरेखा को गंगा नदी से जोड़ा जाएगा ( Pixabay )

झारखंड की दो नदियों दामोदर और स्वर्णरेखा को पश्चिम बंगाल में फरक्का से होकर गुजरने वाली गंगा नदी के साथ जोड़ा जायेगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इसकी इसकी फिजिब्लिटी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसके बाद डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने का काम शुरू हो गया है। यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गोड्डा क्षेत्र के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को भेजे गये पत्र में दी है। सांसद ने लोकसभा में इससे जुड़ा मामला उठाया था। इस परियोजना से झारखंड के बारह जिले लाभान्वित होंगे। इन नदियों को आपस में जोड़े जाने से झारखंड के कई ऐसे जिलों में भी पेजयल, सिंचाई एवं विद्युत परियोजनाओं के लिए पानी उपलब्ध कराया जायेगा, जहां जलस्रोतों की कमी है।

इस परियोजना से झारखंड के जो जिले लाभान्वित होंगे, उनमें इन जिलों में रांची, जमशेदपुर, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, दुमका, सरायकेला-खरसावां और चाईबासा शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री के पत्र में बताया गया है सोन डैम-गंगा लिंक से सहायक नदियों, दक्षिण कोयल -सुवर्णरेखा, शंख -दक्षिण कोयल और बराकर-दामोदर सुवर्णरेखा को जोड़े जाने की भी योजना है और इसके लिए प्री-फिजिब्लिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गयी है।

झारखंड की दो नदियों दामोदर एवं सस्वर्णरेखा को गंगा नदी से जोड़ा जाएगा ( Pixabay )

गंगा-दामोदर और स्वर्णरेखा को इंटरलिंक करने की परियोजना से झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के इलाके भी लाभान्वित होंगे। इसके तहत इंटर बेसिन वाटर ट्रांसफर का सिस्टम विकसित किया जाना है। बताया गया है कि नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसीने अब तक 30 नदियों की पहचान की है, जिन्हें आपस में लिंक किया जाना है।

एजेंसी को नौ राज्यों झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ से नदियों को इंटरलिंक करने के कुल 46 प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 35 प्रस्तावों पर प्री प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने कर ली गई है। सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि इंटर स्टेट रिवर लिंक प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने से झारखंड के दुमका सहित कई इलाकों में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पायेगा। (आईएएनएस-AS)

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