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मनोरंजन

कीर्ति कुल्हारी: ओटीटी अब सुरक्षित और बढ़िया विकल्प

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपने काम से दर्शकों का दिल जीत लिया है। उन्हें हाल ही में डिजिटल रूप से रिलीज हुई फिल्म 'शादीस्थान' में देखा गया था।

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी(Wikimedia Commons)

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी ने ‘क्रिमिनल जस्टिस: बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स’, ‘बार्ड ऑफ ब्लड’ और ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने काम से दर्शकों का दिल जीत लिया है। उन्हें(Kirti Kulhari) हाल ही में डिजिटल रूप से रिलीज हुई फिल्म ‘शादीस्थान’ में देखा गया था। वह(Kirti Kulhari) कहती हैं कि ओटीटी स्पेस सभी के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है।

कीर्ति(Kirti Kulhari) ने आईएएनएस को बताया “थिएटर अभी एक विकल्प के बहुत कम हैं। लोग (थिएटर का दौरा करने पर विचार नहीं कर रहे हैं। निर्माता और वितरक खुद थिएटर (रिलीज) करने पर विचार नहीं कर रहे हैं क्योंकि इसमें बहुत कुछ जोखिम है। दुनिया अभी इस तरह की अवस्था में है कि अगर थिएटर काम नहीं करता है तो यह वास्तव में बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।”


अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी(Wikimedia Commons)

उन्होंने कहा “ओटीटी अब एक सुरक्षित विकल्प बन गया है और एक बढ़िया विकल्प है क्योंकि आपको वह करने को मिलता है जो आप करना पसंद करते हैं। अपके अभिनय और लोग आपको देखने को मिलते हैं, और आपको इस बोझ के बिना कुछ महत्वपूर्ण करने को मिलता है कि क्या कोई फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर चलेगी या नहीं ।”

यह भी पढ़े:बॉलीवुड अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सूद ने कहा कि आज ‘सबसे बड़ी चैरिटी’ है किसी को नौकरी देना .

38 वर्षीय अभिनेत्री ने आगे कहा: “आप सिर्फ अपना काम करना चाहते हैं क्योंकि आप चाहते हैं, और लोग इसे इसलिए देखते हैं क्योंकि वे चाहते हैं। मुझे लगता है कि इस समय इस तरह की व्यवस्था से सभी को फायदा होता है।”

कीर्ति अब मेडिकल थ्रिलर वेब सीरीज ‘ह्यूमन’ की तैयारी कर रही हैं। (आईएएनएस-PS)

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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