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ब्रह्मपुत्र मेल बनी बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन

ब्रह्मपुत्र मेल पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन तक बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन बन गई है। वापसी में भी यह ट्रेन कामाख्या स्टेशन से बिजली के ट्रैक पर चलकर ही दिल्ली के लिए रवाना हुई।

ब्रह्मपुत्र मेल पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन तक बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन बन गई है।(Unsplash)

हरित परिवहन की दिशा में काम कर रहे भारतीय रेलवे को गुरुवार के दिन बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। दरअसल भारतीय रेलवे ने, बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन ( Brahmaputra mail ) का सफल संचालन किया है। यह ट्रेन पूर्वोत्तर के असम राज्य में गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन तक चली। इसप्रकार ब्रह्मपुत्र मेल(Brahmaputra mail) पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन तक बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन बन गई है। वापसी में भी यह ट्रेन कामाख्या स्टेशन से बिजली के ट्रैक पर चलकर ही दिल्ली के लिए रवाना हुई।

यह ट्रेन उच्च गति क्षमता, सुपरफास्ट ट्रेनों के संचालन के लिए उपयुक्त होने , समय और ऊर्जा की बचत, उन्नत ब्रेकिंग तकनीक, उच्च हॉर्स पावर के साथ उच्च क्षमता वाले इंजन, विश्वसनीयता, लाइन क्षमता में सुधार, प्रदूषण मुक्त परिवहन, कम रख-रखाव और कम परिचालन लागत के कारण ज्यादा बेहतर मानी जाती हैं।


जानकारी के अनुसार एक दिन पहले बिजली से चलने वाली पार्सल ट्रेन के सफल संचालन के बाद यह ट्रेन गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन तक बिजली से चलने वाली पहली मेल/एक्सप्रेस यात्री ट्रेन बन गई है और इसी के साथ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में एक नए युग की शुरूआत भी मानी जा रही है।

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आपको बता दें, पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत कुल 760 किलोमीटर मार्ग / 1701 ट्रैक किलोमीटर का विद्युतीकरण किया जा चुका है। अब तक, कटिहार और मालदा से न्यू कूचबिहार तक बिजली से चलने वाले इंजन की ट्रेनें आ रही थीं, जहां ट्रेन से बिजली से चलने वाले इंजन को अलग किया जा रहा था और आगे की यात्रा के लिए डीजल इंजन को जोड़ा जा रहा था। अब रेलवे के विद्युतीकरण कार्य पूरा होने और कामाख्या तक रेल खंड के चालू होने के साथ, ये ट्रेनें बिना इंजन बदल सीधे कामाख्या तक जाएंगी।

Input: आईएएनएस; Edited By: Lakshya Gupta

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बॉम्बे प्लान के लेखक, भारत के आर्थिक विकास के लिए विजन दस्तावेज उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा(JRD Tata), जीडी बिड़ला(GD Birla) और सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास(Sir Purushottamdas Thakurdas), सर अर्देशिर(Sir Ardeshir), वायसराय की कार्यकारी परिषद के योजना और विकास के सदस्य के रूप में, अमेरिकी सरकार को भारतीय वैज्ञानिकों को डॉक्टरेट फेलोशिप की पेशकश करने के लिए राजी किया ताकि वे नए स्थापित वैज्ञानिक परिषद और औद्योगिक अनुसंधान (सीएसआईआर) का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त योग्यता प्राप्त कर सकें।

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