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देश

मनरेगा में गफलत अब आसान नहीं

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अब गफलत करना आसान नहीं होगा, क्योंकि मध्य प्रदेश में दो मोबाइल एप बनाए गए है

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अब गफलत करना आसान नहीं होगा, क्योंकि मध्य प्रदेश में दो मोबाइल एप बनाए गए है. (Wikimedia Commons)

 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अब गफलत करना आसान नहीं होगा, क्योंकि मध्य प्रदेश में दो मोबाइल एप बनाए गए है, जिनके जरिए मजदूरों की उपस्थिति से लेकर अफसरों के कार्यस्थल निरीक्षण का ब्यौरा होगा, साथ ही फोटो भी अपलोड होगी।

मनरेगा में बड़े पैमाने पर गफलतें सामने आती रही है, कहीं मजदूरों के स्थान पर मषीनों से काम कराया जाता है तो कहीं फर्जी नाम के मजदूर बना दिए जाते है। इतना ही नहीं निर्माण कायरें की गुणवत्ता भी घटिया किस्म की होती है। अब ऐसी गड़बड़ियां आसानी से पकड़ी जा सकेंगी।


The Union Minister for Rural Development, Panchayati Raj, Drinking Water and Sanitation, Shri Narendra Singh Tomar addressing at the inauguration of the GeoMGNREGA workshop, in New Delhi on August 09, 2016…The Minister of State for Rural Development, Shri Ram Kripal Yadav is also seen..

राज्य में अब मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये दो नये मोबाइल एप का उपयोग प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से अधिकारियों द्वारा किये गए निरीक्षण और मजदूर द्वारा की गई मजदूरी की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

एक एप को एरिया ऑफिसर एप” नाम दिया गया है। इसके माध्यम से राज्य-स्तरीय, जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अन्य अधिकारियों द्वारा जाँच व भ्रमण के समय मनरेगा के कार्यों की गुणवत्ता तथा उपयोगिता पर टीप, कार्य-स्थल से जियो टैग फोटो सहित अपलोड की जा सकेगी। अधिकारियों द्वारा किये गये दौरा तथा जाँच रिपोर्ट नस्तियों पर न होकर मोबाइल पर रहेगी, जिसे पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता पूर्ण तरीके से ऑनलाइन देखा जा सकेगा।

आगामी एक सप्ताह में जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला, पंचायत को अपने जिले के कम से कम एक कार्य-स्थल की जाँच रिपोर्ट एप्लीकेशन के माध्यम से अपलोड करने के निर्देश जारी किये गये हैं।

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इसी प्रकार मनरेगा अंतर्गत कार्यों पर लगे मजदूरों की उपस्थिति कागज पर दर्ज करने के बजाए मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम एप” के माध्यम से मेट व ग्राम रोजगार सहायक द्वारा कार्य-स्थल पर प्रतिदिन सुबह 11.30 बजे के पहले ली जायेगी। कार्य-स्थल से प्रति दिवस दर्ज मजदूरों की उपस्थिति जियो टैग फोटोग्राफ के साथ नरेगा पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी, जिससे मनरेगा के कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहेगी। आगामी 20 अगस्त से केवल ऐसे मजदूरों का भुगतान होगा, जिनकी हाजिरी सीधे कार्य-स्थल से दर्ज की गई है।

–(आईएएनएस PS)

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अल फैज़ान मुस्लिम फंड के मालिक मोहम्मद फैज़ी ने की खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी (wikimedia commons)

बिजनौर के नगीना शहर में मोहल्ला लुहारी सराय में स्थित 'अल फैजान मुस्लिम फंड लिमिटेड' का मालिक मोहम्मद फैज़ी खाताधारकों के साथ ठगी(Fraud) कर करोड़ो रुपए की नगदी के साथ सोने-चांदी जेवरात लेकर फरार हो गया है। पुलिस ने कई लोगों के शिकायत के बाद प्रबंधक मोहम्मद फ़ैज़ी और एक अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तमाम लोगों के शिकायत के आधार पर पुलिस ने 'अल फैजान म्युचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड' मोहल्ला लाल सराय नगीना के का संचालन के रहे मोहम्मद फैजी पुत्र अहमदुल्ला निवासी शाहजीर नगीना 420 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जाँच शुरू कर दी है। नगीना के मोहल्ला लाल सराय में स्थित 'अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड' का संचालन मोहम्मद फैज़ी बीते पांच साल से कर रहा था। खाताधारकों को बिना कोई सूचना दिए आरोपी मोहम्मद फैज़ी शाखा बन्द कर फरार हो गया।

Bijnor, bijnor police, Bank fraud अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड तले मोहम्मद फैज़ी ने खाताधारकों को लगाया चूना। करोड़ो ले कर फरार। ( Pixabay )

बता दें कि 'अल फैज़ान मुस्लिम फंड' की शाखा में लोग प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन करते थे। ख़बर है की अल फैजान की शाखा में नगीना व आसपास के लोग के करोड़ों रुपए की नकदी के साथ साथ सोने चांदी के जेवरात भी जमा करते थे। रोज की तरह जब लोग अल फैज़ान फंड लिमिटेड की शाखा में लेन देन के लिए पहुंचे तो उन्हें निर्धारित समय सीमा के बाद भी शाखा बंद मिली। इसके बाद खाताधारकों को शक हुआ तो पता चला कि अल फैजान मुस्लिम फंड शाखा का संचालक मोहम्मद फैज़ी करोड़ों रुपए की नकदी के साथ साथ खाताधारकों के शाखा में जमा सोने-चांदी के जेवरात भी लेकर फरार हो गया। पुलिस की माने तो अब तक 170 से भी अधिक तहरीर दर्ज की जा चुकी हैं और पुलिस खाताधारकों के हुए नुकसान की खोज बीन में जुट गई है ।

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