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ओपिनियन

Anand Mahindra : विश्व विख्यात बिजनेस टायकून

महिंद्रा ग्रुप के निदेशक एवं अध्यक्ष आंनद महिंद्रा ने अपने 66 वें जन्मदिन पर अपने सभी फैंस को, उन्हें बधाई देने के लिए धन्यवाद कहा है।

आनंद महिंद्रा आज पूरे विश्व में एक लोकप्रिय बिजनेस टायकून के रूप में प्रख्यात हैं। (Wikimedia Commons)

महिंद्रा ग्रुप के निदेशक एवं अध्यक्ष आंनद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने अपने 66वें जन्मदिन पर अपने सभी फैंस को, उन्हें बधाई देने के लिए धन्यवाद कहा है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा : मैं आप सभी की शुभकामनाओं से अभिभूत हो उठा हूं। मैं आप सभी को व्यक्तिगत रूप से प्रतिक्रिया नहीं दे पाऊंगा। लेकिन मेरी प्रार्थना है कि, आप और आपका परिवार सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहे। 

1955 में जन्मे आनंद गोपाल महिंद्रा भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में बिजनेस टायकून (Business Tycoon) के रूप में जाने जाते हैं। आनंद महिंद्रा ने 1981 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए पूरा किया और बाद में महिंद्रा उर्जिन स्टील (Mahindra Ugine Steel) में शामिल हो गए। अपनी काबिलियत के दम पर आगे चलकर 1997 में आनंद महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के एमडी के रूप में नियुक्त हुए थे। आनंद महिंद्रा के नेतृत्व में महिंद्रा समूह ने, पॉवर बोट, मोटर वाहन, कृषि, वित्तीय, सॉफ्टवेयर और रियल एस्टेट सहित कई जगहों पर अपनी पैठ बनाई। महिंद्रा ग्रुप ने दुनिया भर में मार्क ब्रांड के अधिग्रहण में सक्रिय भूमिका निभाई। जैसे कि,सेसंयॉन्ग मोटर्स (Ssangyong Motors), प्यूज़ो मोटरसाइकल्स (Peugeot Motorcycles), गिप्सलैंड एरोनॉटिक्स, एरोस्टाफ ऑस्ट्रेलिया, बीएसए, जवा आदि। सात दशक से अधिक समय के साथ महिंद्रा ग्रुप में 150 से अधिक कंपनियां शामिल हैं। एक सौ से भी अधिक देशों में मौजूद हैं और 2,50,000 से अधिक लोग कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षा के क्षेत्र में भी महिन्द्रा ग्रुप्स ने अपना पूरा योगदान दिया है। महिंद्रा एजुकेशन ट्रस्ट, आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति, अनुदान और ऋण प्रदान करता है। 

पूरा विश्व इस दौरान या पिछले एक साल से कोरोना महामारी से जूझ रहा है। सभी ने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किए हैं। इस संकट की घड़ी में अपना योगदान अवश्य दिया है और इसी क्रम में महामारी के प्रकोप से, बिजनेस टायकून आनंद महिंद्रा ने घातक कोविड -19 (Covid-19) के खिलाफ लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 

आनंद महिंद्रा ने यह सुनिश्चित किया है कि देश के पिछड़े क्षेत्रों तक भोजन की सुविधाओं को पहुंचाया जा सके। मास्क, वेंटिलेटर और हैंड सैनिटाइजर के निर्माण के लिए भी महिंद्रा ग्रुप नए प्रयोग कर रहा है। 

यह भी पढ़ें :- COVID Warriors: चुनौती के खिलाफ लड़ाई को तैयार

आनंद महिंद्रा ने अस्पतालों में कोरोना संक्रमण से बचने के लिए एक उपाय को शामिल किया है। जहां, जब तक कोविड-19 टीके की सीधे आपूर्ति नहीं होती, तब तक खुले में कैंप लगाकर अस्पतालों और लोगों की मदद कर सकते हैं। इससे अस्पतालों पर दबाव कम पड़ेगा और अन्य कार्य भी नहीं रुकेंगे। महिंद्रा ने कहा, स्थानीय क्लब के साथ मिलकर एक टीकाकरण अभियान को शुरू किया जा सकता है। इससे टीकाकरण में भी तेजी आएगी। 

आनंद महिंद्रा आज पूरे विश्व में एक लोकप्रिय बिजनेस टायकून के रूप में प्रख्यात हैं। महिंद्रा ने अपनी मेहनत से महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है जहां से आज सभी इनकी वाहवाही करते हैं।

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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, एक श्रेष्ठ वीरांगना को यह देश कोटी – कोटी नमन करता है। (Wikimedia Commons)

भारतीय मध्ययुगीन इतिहास जहां अनेक वीर पुरुषों के वीरतापूर्ण कार्यों से भरा पड़ा है। वहीं स्त्री जाति के वीरतापूर्ण कार्यकलापों से यह अक्सर अछूता रहा है। सर्वत्र नारी को दयनीय, लाचार और मानसिक रूप से दास प्रवृति को ही दिखाया गया है। उस काल में यह गौरव से कम नहीं की रानी लक्ष्मीबाई ने भारतीय नारियों की इस दासतापूर्ण मानसिकता को ध्वस्त कर दिखाया था। इसलिए आज भी रानी लक्ष्मीबाई का नाम गर्व से लिया जाता है। एक ऐसी महिला स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने अंग्रजों से लोहा लिया था| आज उनके द्वारा किए गए संघर्ष सभी भारतीयों के हृदय में एक नवीन उत्साह का संचार कर देता है।

आइए आज उनके द्वारा देश की आन-बान-शान को बचाने के लिए किए गए संघर्ष को याद करें। उस युद्ध की बात करें जब उनकी तलवार ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और अंग्रजों के रक्त से अपने अस्तित्व को पूरा किया था।

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चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

सत्याग्रह का सामन्य अर्थ होता है "सत्य का आग्रह।" सर्वप्रथम इसका प्रयोग महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। उन्होंने भारत में कई आंदोलन चलाए, जिनमें चंपारण, बारदोली, खेड़ा सत्याग्रह आदि प्रमुख। हैं। सत्याग्रह स्वराज प्राप्त करने और सामाजिक संघर्षों को मिटाने का एक नैतिक और राजनीतिक अस्त्र है। आज हम ऐसे ही एक सत्याग्रह की बात करेंगे जिसे गांधी जी से प्रेणा लेकर शुरू किया गया था।

"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

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आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया।

मोपला हिंदु नरसंहार या मालाबार विद्रोह 100 साल पहले 20 अगस्त 1921 को शुरू हुई एक ऐसी घटना थी, जिसमें निर्दयतापूर्वक सैकड़ों हिन्दू महिला, पुरुष और बच्चों की हत्या कर दी गई थी। महिलाओं का बलात्कार किया गया था। बड़े पैमाने पर हिन्दुओं को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित करा दिया गया था।

आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया। आज हम मोपला हिन्दू नरसंहार, 1921 में हिन्दुओं के साथ हुई उसी दर्दनाक घटना की बात करेंगे। आपको बताएंगे की कैसे मोपला हिन्दू नरसंहार (Mopla Hindu Genocide) के खलनायकों को अंग्रेजों से लोहा लेने वाले नायकों के रूप में चिन्हित कर दिया गया।

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